उत्तराखंड : हाईकोर्ट ने कहा - फीस के मामले में निजी स्कूलों के प्रत्यावेदन पर एक सप्ताह में निर्णय लें सचिव
नैनीताल हाईकोर्ट ने कोरोना संकट काल में सरकारी व गैर सरकारी स्कूलों द्वारा अभिभावकों से ट्यूशन और अन्य क्रियाकलापों की फीस के मामले में दायर याचिका को निस्तारित करते हुए निजी विद्यालयों के संचालकों से कहा है कि वह शिक्षा सचिव को प्रत्यावेदन दें।
वहीं, हाईकोर्ट ने सचिव शिक्षा से केंद्र सरकार के अनलॉक प्लान को ध्यान में रखते हुए स्कूल संचालकों के प्रत्यावेदन पर एक सप्ताह के भीतर निर्णय लें ताकि स्कूलों और अभिभावकों के बीच सामंजस्य बना रहे। इसके अलावा, कोर्ट ने यह भी कहा है कि अभिभावकों के पक्ष में 12 मई को जो अंतरिम आदेश पारित किया था वह यथावत रहेगा जब तक कि कोई अंतिम निर्णय सरकार न ले।
मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। देहरादून निवासी कुंवर जपिन्द्र सिंह और अन्य ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि कोरोना संकट काल के दौरान सरकारी व गैर सरकारी स्कूलों की तरफ से अभिभावकों से ट्यूशन फीस के अलावा अन्य क्रियाकलापों के लिये फीस ली जा रही है।
याचिका में कहा गया कि दो मई को जारी शासनादेश में निजी और अर्द्ध सरकारी स्कूलों को सिर्फ ट्यूशन फीस लेने की अनुमति दी गई थी। इस शासनादेश को याचिकाकर्ता ने चुनौती देते हुए ऑनलाइन पढ़ाई को लेकर कहा था कि इससे लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
पूर्व में हाईकोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में कहा था कि कोई भी विद्यालय अभिभावकों को फीस के लिए बाध्य नहीं करेगा। साथ ही सरकार को निर्देश दिया था कि वह जिलेवार शिक्षा अधिकारियों को इस पूरे मामले में नोडल अधिकारी बनाए ताकि उनके जरिये अभिभावकों की समस्त शिकायतें दर्ज कराईं जा सकें।
इस आदेश के अनुपालन में सरकार ने शिक्षा अधिकारियों को नोडल अधिकारी नामित कर शिकायतों को सुना और जो स्कूल फीस के लिए दबाव बना रहे थे, उनको नोटिस जारी कर उचित कार्रवाई की गई। हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद मामले में दायर याचिका को निस्तारित करते हुए विद्यालय संचालकों से अपना प्रत्यावेदन शिक्षा सचिव के समक्ष रखने को कहा,जबकि शिक्षा सचिव से कहा कि वह एक सप्ताह के भीतर उस प्रत्यावेदन पर कार्रवाई करें।
पंचायत चुनाव : मतपत्र पर प्रत्याशी का नाम व फोटो मामले में मांगा जवाब
हाईकोर्ट ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के मतपत्र पर चुनाव चिन्ह के बजाय प्रत्याशी का नाम व फोटो अनिवार्य करने के मामले में दायर याचिका पर सुनवाई के बाद राज्य निर्वाचन आयोग को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार आकाश गहलोत व अन्य ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्य के चुनाव के लिए प्रयुक्त बैलेट में प्रत्याशियों का सिर्फ चुनाव चिन्ह अंकित रहता है। इस वजह से मतदाता कई बार भ्रमित हो जाता है और जनता को सही प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाता है। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने राज्य निर्वाचन आयोग को मामले में चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
रोडवेज कर्मियों को मार्च-अप्रैल का पैसा कब तक दोगे : हाईकोर्ट
हाईकोर्ट ने परिवहन निगम के सचिव से पूछा है कि कर्मचारियों को मार्च-अप्रैल का वेतन कब तक देंगे। कोर्ट ने इसकी रिपोर्ट 15 जून तक पेश करने के निर्देश दिए। सुनवाई के दौरान परिवहन निगम ने जब शपथपत्र पेश कर कोर्ट को बताया कि उसे यूपी सरकार से परिसंपत्तियों के बंटवारे सहित सात सौ करोड़ रुपये नहीं मिले हैं तो कोर्ट ने कहा कि अगर यूपी से पैसा नहीं मिलेगा तो क्या कर्मचारियों को वेतन नहीं दोगे।
मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। उत्तराखंड रोडवेज कर्मचारी यूनियन ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि हड़ताल करने पर सरकार उन पर एस्मा लगा देती है, जो नियम विरुद्ध है। सरकार उन लोगों को हड़ताल करने पर मजबूर करती आई है। सरकार व परिवहन निगम न तो उनको नियमित कर रही है और ना ही उन्हें नियमित वेतन दिया जा रहा है। यही नहीं, कर्मचारियों को पिछले चार साल से ओवरटाइम का पैसा भी नहीं दिया जा रहा है।
याचिका में कहा गया कि रिटायर कर्मचारियों के देयकों का भुगतान भी अब तक नहीं किया गया है। यूनियन का सरकार व निगम के साथ कई बार मांगों को लेकर समझौता हो चुका है। इसके बाद भी सरकार एस्मा लगाने को तैयार रहती है। जहां सरकार ने निगम को 69 करोड़ रुपया बकाया देना है वहीं उत्तर प्रदेश परिवहन निगम ने भी उत्तराखंड के परिवहन निगम को सात सौ करोड़ रुपया देना है। अगर सरकार और निगम इसे वसूले तो यूनियन और निगम की सारी समस्याएं हल हो जाएं।