उत्तराखंड: मुफ्त सुविधा की मंजिल अभी बहुत दूर, कई अस्पतालों में डायलिसिस की सुविधा ही नहीं
प्रदेश के कोरोनेशन चिकित्सालय, बेस चिकित्सालय हल्द्वानी, मेला चिकित्सालय हरिद्वार, संयुक्त चिकित्सालय कोटद्वार, जिला चिकित्सालय रुद्रपुर में डायलिसिस केंद्र पीपीपी मोड पर संचालित हैं। जबकि राजकीय दून मेडिकल कॉलेज, राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर, बेस चिकित्सालय अल्मोड़ा, जिला चिकित्सालय रुद्रप्रयाग, जिला चिकित्सालय पिथौरागढ़ में स्वास्थ्य विभाग की ओर से डायलिसिस केंद्र संचालित किए जा हैं।
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विस्तार
प्रदेश के पहाड़ों में भी अब मरीजों को डायलिसिस की सुविधा मिलेगी। जल्द ही पांच पर्वतीय जिलों में पब्लिक प्राइवेट पाटर्नरशिप(पीपीपी मोड) में डायलिसिस केंद्र संचालित किए जाएंगे। वर्तमान में आठ जिलों में सरकार और पीपीपी मोड पर डायलिसिस केंद्र चल रहे हैं। प्रदेश में नेफ्रोलॉजी का एक भी पद नहीं है। जिससे विभाग की ओर से फिजीशियनों को विशेष प्रशिक्षण देकर डायलिसिस केंद्रों में सेवाएं ली जा रही है।
प्रदेश के कोरोनेशन चिकित्सालय, बेस चिकित्सालय हल्द्वानी, मेला चिकित्सालय हरिद्वार, संयुक्त चिकित्सालय कोटद्वार, जिला चिकित्सालय रुद्रपुर में डायलिसिस केंद्र पीपीपी मोड पर संचालित हैं। जबकि राजकीय दून मेडिकल कॉलेज, राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर, बेस चिकित्सालय अल्मोड़ा, जिला चिकित्सालय रुद्रप्रयाग, जिला चिकित्सालय पिथौरागढ़ में स्वास्थ्य विभाग की ओर से डायलिसिस केंद्र संचालित किए जा हैं।
विभाग के माध्यम चल रहे केंद्रों में फिजीशियनों को प्रशिक्षण देकर तैनात किया गया। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत बागेश्वर, चमोली, चंपावत, टिहरी व उत्तरकाशी जिले और संयुक्त चिकित्सालय रुड़की में डायलिसिस केंद्र पीपीपी मोड पर स्थापित किए जाएंगे।
स्वास्थ्य विभाग में नेफ्रोलॉजी का एक भी पद नहीं है। जिससे डायलिसिस केंद्रों को पीपीपी मोड पर संचालित किए जा रहे हैं। आयुष्मान योजना के गोल्डन कार्ड धारकों और बीपीएल श्रेणी के मरीजों को सरकार की ओर से निशुल्क डायलिसिस की सुविधा दी जा रही है। वर्ष 2020-21 में 1204 रोगियों की डायलिसिस की गई। जबकि 21-22 में जुलाई माह तक 856 रोगियों का सुविधा दी गई।
वर्तमान में स्वास्थ्य विभाग में नेफ्रोलॉजी नहीं है। जिससे विभाग की ओर से फिजीशियन डॉक्टरों को डायलिसिस की विशेष ट्रेनिंग देकर सेवाएं ली जा रही है। प्रदेश के आठ जिलों में डायलिसिस केंद्र संचालित हैं। जबकि पांच जिलों में जल्द ही पीपीपी मोड पर डायलिसिस केंद्र संचालित करने की प्रक्रिया चल रही है।
- डॉ. तृप्ति बहुगुणा, स्वास्थ्य महानिदेशक
देहरादून: दो सरकारी अस्पतालों में है डायलिसिस की सुविधा
जिले में राज्य सरकार के एक सरकारी अस्पताल और एक में पीपीपी मोड में संचालित केंद्र में डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध है। राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में वर्तमान में डायलिसिस की 15 मशीनें हैं। जिनमें से 12 नई मशीनें लगभग एक साल पहले खरीदी गई हैं। तीन मशीनें करीब 10 साल पुरानी हैं। जिनका इस्तेमाल अब कम ही हो पा रहा है। 12 नई मशीनों में से दो पोर्टेबल मशीन कोरोना मरीजों के लिए अलग से आईसीयू में स्थापित की गई हैं। दून अस्पताल में रोजाना औसतन पांच मरीजों का डायलिसिस होता है। अस्पताल के वरिष्ठ नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. हरीश बसेरा ने बताया कि एक मरीज का हफ्ते में कम से दो दिन डायलिसिस होता है। आयुष्मान व गोल्डन कार्डधारकों समेत अन्य अनुमन्य मरीजों के लिए डायलिसिस की निशुल्क सुविधा उपलब्ध है। अन्य मरीजों के लिए एक बार के डायलिसिस का आठ सौ रुपए शुल्क है। इसके अलावा पीपीपी मोड पर राजकीय जिला कोरोनेशन अस्पताल में भी निजी कंपनी डायलिसिस की सुविधा दे रही है। जबकि निजी अस्पतालों में एक बार के डायलिसिस का खर्च 1500 से तीन हजार रुपये तक है।
हरिद्वार: मरीजों को फ्री डायलिसिस का इंतजार
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किडनी की बीमारी से पीड़ित मरीजों के लिए निशुल्क डायलिसिस सुविधा की घोषणा कर दी है। सीएम की घोषणा से हरिद्वार में डायलिसिस कराने वालों पर उम्मीद जगी है। हरिद्वार मेला अस्पताल में अप्रैल 2019 से डायलिसिस की सुविधा है। डायलिसिस सेंटर पीपीपी मोड पर संचालित है। सेंटर में हरिद्वार के अलावा रुड़की और लक्सर से मरीज डायलिसिस करवाने आते हैं। रोजाना औसतन 25 से 30 मरीजों की डायलिसिस होती है। अटल आयुष्मान कार्ड वाले मरीजों की मुफ्त डायलिसिस होती है, जबकि अन्य मरीजों से एक बार डायलिसिस के 1028 रुपये लिए जाते हैं। डायलिसिस सेंटर में तीन टेक्नीशियन, दो नर्सिंग स्टॉफ और दो एमबीबीएस डॉक्टर हैं।
श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में है डायलिसिस सुविधा
राजकीय मेडिकल कॉलेज से संबद्ध बेस अस्पताल में डायलिसिस की सुविधा है। कॉलेज के मेडिसिन विभाग के अधीन डायलिसिस यूनिट का संचालन होता है। यूनिट में 3 मशीन स्थापित हैं। यहां प्रतिमाह 60 से 75 के बीच डायलिसिस होते हैं। यूनिट में फिजिशियन की देखरेख में नर्सिंग स्टाफ व तकनीशियन मरीजों का डायलिसिस करते हैं। अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक प्रो. केपी सिंह ने बताया कि एक बार डायलिसिस कराने का यूजर चार्ज 708 रुपये लिया जाता है।
उत्तरकाशी में नहीं है डायलिसिस की सुविधा
सीमांत जनपद के किसी भी अस्पताल में डायलिसिस की सुविधा नहीं है। यहां के लोगों को देहरादून जाना पड़ता है। जिले में एक जिला चिकित्सालय, चार सीएचसी व करीब 30 पीएचसी हैं। जनपद की करीब 70 फीसदी आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिले के 6 या 7 लोग डायलिसिस के लिए देहरादून या अन्य शहरों में जाते हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष दीपक बिजल्वाण का कहना है कि जनपद में डायलिसिस की सुविधा के लिए लगातार शासन से मांग की जा रही है लेकिन सुविधा उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। सीएमओ डा. केएस चौहान ने बताया कि जिला चिकित्सालय में डायलिसिस की सुविधा के लिए एक माह पूर्व शासन को प्रस्ताव भेजा गया है।
टिहरी : दूसरे शहरों पर निर्भर हैं मरीज
जिले के किसी भी अस्पताल में डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध नहीं है। गंभीर रूप से बीमार लोगों को डायलिसिस के लिए ऋषिकेश, देहरादून समेत अन्य बड़े शहरों की दौड़ लगानी पड़ती है। सीएमओ डा. संजय जैन ने बताया कि सरकार ने वर्तमान में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन से संयुक्त चिकित्सालय नरेंद्रनगर में चार बेड का डायलिसिस सेंटर बनाने की स्वीकृति दे दी है लेकिन डायलिसिस बेड संचालन के लिए पदों का सृजन नहीं हो पाया है।
कोटद्वार बेस अस्पताल में निशुल्क मिल रही डायलिसिस सुविधा
किडनी के मरीजों को राजकीय बेस अस्पताल कोटद्वार में निशुल्क डायलिसिस की सुविधा मिल रही है। प्रदेश स्वास्थ्य निदेशालय की ओर से अस्पताल में चंडीगढ़ की कंपनी की ओर से पीपीपी मोड में केंद्र को संचालित किया जा रहा है। पूर्व में डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध नहीं होने पर क्षेत्र के किडनी के मरीजों को बड़े शहरों में मंहगे दाम पर उपचार कराने के लिए जाना पड़ता था। जुलाई 2017 में कोटद्वार बेस अस्पताल के ट्रामा सेंटर के भवन में डायलिसिस सेेंटर का शुभारंभ किया गया। सेंटर में डायलिसिस रक्त शोधन की आधुनिक आठ आधुनिक मशीनें स्थापित की गई हैं। यहां पर पर्याप्त संख्या में डॉक्टर नर्स समेत अन्य संबंधित स्टाफ की तैनाती की गई है। स्वास्थ्य निदेशालय के मार्गदर्शन में कोटद्वार बेस अस्पताल में डायलिसिस सेंटर को पीपीपी मोड में मनी माजरा चंडीगढ़ की कंपनी राही केयर प्राइवेट लिमिटेड की ओर से संचालित किया जा रहा है। शुरुआत में इसका शुल्क 1200 रुपये रखा गया था। इसके बाद सेंटर को आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा योजना से भी जोड़ दिया गया। वर्तमान में किडनी रोग के मरीजों को आयुष्मान कार्ड के माध्यम से मुफ्त डायलिसिस की सुविधा दी जा रही है। बेस अस्पताल के पीएस डॉ. बीसी काला ने बताया कि बेस अस्पताल में पीपीपी मोड में डायलिसिस सेंटर का सफल संचालन किया जा रहा है।
चमोली में किसी अस्पताल में नहीं डायलिसिस की व्यवस्था
चमोली जनपद के जिला अस्पताल गोपेश्वर सहित किसी भी अस्पताल में डायलिसिस की व्यवस्था नहीं है। हालांकि जिला अस्पताल में डायलिसिस के लिए भूमि चयन प्रक्रिया चल रही है। सीएमओ डा. केके अग्रवाल ने बताया कि भूमि चयन प्रक्रिया पूर्ण होने पर जल्द ही जिला अस्पताल में डायलिसिस की व्यवस्था कर दी जाएगी। यहां सीटी स्केन की व्यवस्था भी की जा रही है। जिसकी प्रक्रिया गतिमान है।
रुद्रप्रयाग : जिला अस्पताल में हैं तीन मशीनें
जिला चिकित्सालय रुद्रप्रयाग में इसी वर्ष जनवरी में डायलिसिस की तीन मशीनें लगाई गईं हैं। यहां सप्ताह में दो से तीन जरूरतमंद मरीजों का डायलिसिस हो रहा है। मशीनें स्थापित होने के बाद से क्षेत्र के लोगों को देहरादून व अन्य स्वास्थ्य केंद्रों की दौड़ नहीं लगानी पड़ रही है। सीएमएस डा. दिग्विजय सिंह रावत ने बताया कि डायलिसिस मशीनों के संचालन के लिए प्रशिक्षण प्राप्त दो कर्मचारी तैनात किए गए हैं।
चंपावत : जिला अस्पताल मेें भी डायलिसिस की सुविधा नहीं
प्रदेश सरकार कई बार डायलिसिस की व्यवस्था का एलान कर चुकी है लेकिन चंपावत जिला अस्पताल सहित किसी भी सरकारी अस्पताल में डायलिसिस की सुविधा नहीं है। चंपावत जिले में हर माह 10 से अधिक लोगों को डायलिसिस की जरूरत होती है। इसके लिए उन्हें ऊधमसिंह नगर, हल्द्वानी जाना पड़ता है। सीएमओ डॉ. आरपी खंडूरी का कहना है कि डायलिसिस के लिए स्वास्थ्य महानिदेशालय को पत्र भेजा गया है। उम्मीद है कि इस साल के अंत तक जिला अस्पताल में डायलिसिस की सुविधा मिल जाएगी।
पिथौरागढ़ में निशुल्क हो रहा डायलिसिस
जिला अस्पताल में नि:शुल्क डायलिसिस सुविधा है। यहां एक वर्ष पहले डायलिसिस यूनिट शुरू हुई थी। डायलिसिस के लिए एक डॉक्टर, एक तकनीशियन, दो नर्सिंग अधिकारी और एक वार्ड ब्वॉय को तैनात किया गया है। सीएमओ डॉ. एचसी पंत ने बताया कि तत्कालीन डीएम ने खनिज फाउंडेशन से एक तकनीशियन की तैनाती की है। किसी तरह का कोई भी चार्ज मरीज से नहीं लिया जा रहा है। पिथौरागढ़ जिला अस्पताल में डायलिसिस की सुविधा शुरू होने से जिले के मरीजों को अब हल्द्वानी या दिल्ली की दौड़ नहीं लगानी पड़ रही है। एक वर्ष पूर्व तक मरीजों को हल्द्वानी जाना पड़ता था।
रुद्रपुर जिला अस्पताल के डायलिसिस सेंटर में 10 बेडों की सुविधा
जिला अस्पताल में पीपीपी मोड पर राही केयर सेंटर कंपनी का डायलिसिस सेंटर संचालित हैं। यहां 10 बेड की सुविधा है। यहां प्रतिदिन 28 से 29 मरीजों की डायलिसिस हो रही है। सेंटर में अटल आयुष्मान कार्ड के माध्यम से मरीजों के लिए डायलिसिस की सुविधा है, लेकिन सरकार ने राही केयर कंपनी का करीब एक करोड़ रुपये का भुगतान लंबे समय से लटका रखा है। जिला अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि डायलिसिस सेंटर के भुगतान के लिए शासन को पत्र भेजा गया है।
अल्मोड़ा : मात्र बेस अस्पताल में होता है डायलिसिस
जिले में अल्मोड़ा बेस अस्पताल में ही डायलिसिस की सुविधा है। बेस अस्पताल के पीएमएस डॉ. एचसी गड़कोटी ने बताया कि अस्पताल में शनिवार और बुधवार दो दिन डायलिसिस सुविधा मिलती है। यहां तीन स्टाफ नर्स, एक सिस्टर इंचार्ज और एक डॉक्टर की टीम डायलिसिस करती है। जिला अस्पताल के डॉक्टर बेस में आकर डायलिसिस करते हैं। यहां तीन मशीने हैं।
हल्द्वानी में आयुष्मान और बीपीएल कार्ड धारकों का नि:शुल्क डायलिसिस
कुमाऊं के सबसे बड़े सुशीला तिवारी अस्पताल में आठ डायलिसिस मशीनें हैं। यहां दो डॉक्टर, दो तकनीशियन के अलावा स्टाफ नर्स और वार्ड ब्वॉय रखे गए हैं। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अरुण जोशी ने बताया कि अस्पताल में बीपीएल और आयुष्मान कार्डधारक मरीजों का नि:शुल्क इलाज किया जा रहा है। प्रतिदिन 13 से 14 मरीजों को डायलिसिस सुविधा दी जा रही है। बेस अस्पताल में पीपीपी मोड पर डायलिसिस की जाती है। 27 डायलिसिस मशीनें हैं, जिनमें दो को ठीक कराने की व्यवस्था की जा रही है। यहां प्रतिदिन करीब 80-90 मरीजों की डायलिसिस होती है। पीपीपी मोड पर संचालित डायलिसिस केंद्र संचालक महेंद्र सिंह बिष्ट ने बताया कि बीपीएल और आयुष्मान कार्ड धारकों के लिए व्यवस्था नि:शुल्क है जबकि अन्य के लिए 1290 रुपया प्रति डायलिसिस शुल्क लिया जाता है। इस कार्य के लिए तीन डॉक्टर, 16 तकनीशियनों समेत 34 का स्टाफ तैनात है।
बागेश्वर में डायलिसिस की सुविधा नहीं
जिले में डायलिसिस की कोई सुविधा नहीं है। डायलिसिस के लिए लोगों को हल्द्वानी जाना पड़ता है। सीएमओ डॉ. सुनीता टम्टा ने बताया कि डायलिसिस यूनिट स्थापित करने के लिए जिला अस्पताल में पर्याप्त जगह नहीं है। डायलिसिस यूनिट की स्थापना के लिए जगह की तलाश की जा रही है। इस संबंध में जिलाधिकारी से भी जगह उपलब्ध कराने के लिए अनुरोध किया जाएगा। जगह की उपलब्धता होने पर स्वास्थ्य महानिदेशालय को प्रस्ताव भेजा जाएगा।