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देहरादून : दून में हर दिन पांच लोग हो रहे ठगी का शिकार, देश में 5वें नंबर पर शहर

Thu, 17 Jun 2021 02:59 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Thu, 17 Jun 2021 02:59 PM IST
सार

साइबर सेफ पोर्टल ने एक अगस्त 2019 से 31 मई 2021 तक के आंकड़े जारी किए हैं। आंकड़ों के अनुसार देहरादून जिले में इस दरम्यान 3056 लोग साइबर ठगी का शिकार हुए।

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uttarakhand news : five people are being cheated every day in Doon, dehradun number 5 in the country
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दून के लोग साइबर ठगी का ज्यादा शिकार होते हैं। यहां औसतन पांच लोग हर दिन अपनी गाढ़ी कमाई ठगों के चंगुल में फंसा रहे हैं। जिन जिलों में सबसे ज्यादा लोग ठगी का शिकार हुए उनमें दून का पांचवां नंबर है। यह आंकड़ा केंद्रीय गृह मंत्रालय के पोर्टल साइबर सेफ की रिपोर्ट से सामने आया है।

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साइबर सेफ पोर्टल ने एक अगस्त 2019 से 31 मई 2021 तक के आंकड़े जारी किए हैं। आंकड़ों के अनुसार देहरादून जिले में इस दरम्यान 3056 लोग साइबर ठगी का शिकार हुए। ठगों ने इनसे कहीं ज्यादा लोगों को शिकार बनाने का प्रयास किया है। इस लिस्ट में पहला नंबर हैदराबाद का है, जहां 11 हजार से ज्यादा लोग ठगों के जाल में फंसे हैं।
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इस रिपोर्ट के अनुसार यदि पूरे उत्तराखंड में ठगी गई रकम की बात करें तो 22 महीनों में यहां के लोगों ने 1.72 करोड़ रुपये ठगों को दिए हैं। इनमें से बहुत से बड़े मामले पकड़ में भी आए हैं। कई प्रकरणों में एसटीएफ और साइबर पुलिस ने कई ठगों को पकड़ा है। हालांकि इस साल कई बड़े मामलों में एसटीएफ ने करीब 50 लाख रुपये लोगों वापस भी कराए हैं। कार्रवाई की बात करें तो उत्तराखंड पुलिस भी अव्वल राज्यों में शामिल है। यहां की पुलिस विशेष तौर पर एसटीएफ नंबरों और खातों की निगरानी करने में शीर्ष चार राज्यों में शामिल है। 
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साढ़े तीन हजार नंबर निगेटिव सूची में 
उत्तराखंड पुलिस साइबर ठगी के खिलाफ कार्रवाई और निगरानी में भी अव्वल राज्यों में शामिल है। एसटीएफ एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि पुलिस ने संदिग्ध ठगों के 3500 से ज्यादा फोन नंबर और खाते नंबरों को निगेटिव सूची में डालते हुए पोर्टल पर अपलोड किया है। पोर्टल के माध्यम से इन नंबरों और खातों की निगरानी की जाती है।

एक क्लिक पर सामने होगी पेशेवर बदमाशों की कुंडली
प्रदेश के बदमाशों की कुंडली अब एक क्लिक में सामने होगी। सीसीटीएनएस (क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम) पर सभी बदमाशों का 10 साल का डाटा अपलोड किया जा रहा है। इससे अगर बदमाश जमानत लेने की कोशिश करता है तो उसे रद्द भी किया जा सकता है। इसके लिए सभी विवेचना अधिकारियों को भी निर्देशित किया गया है कि वह न्यायालयों में इस डाटा की मदद से जमानत का विरोध करें। 

कोर्ट भी देख सकेंगे डिटेल 
इस पोर्टल पर कोर्ट भी बदमाशों की जानकारी देख सकते हैं। मसलन, यदि कोई बदमाश जमानत की अर्जी लगाता है तो कोर्ट खुद ही उसका विवरण देखकर पुलिस से रिपोर्ट मांग सकती है। ऐसे में उसकी जमानत को तत्काल रद्द किया जा सकता है
। 
जमानत मिलने पर भी होगा विरोध, जमानतियों पर कार्रवाई 
यदि कोई अपराधी जमानत पा लेता है तो विवेचना अधिकारी बाद में भी इसके खिलाफ अपील कर सकते हैं। इसमें यदि विवेचना अधिकारी के तथ्य सही पाए गए तब भी जमानत रद्द कर अपराधी को दोबारा जेल भेजा जा सकता है। ऐसे में उसकी जमानत लेने वाले जमानतियों पर भी कार्रवाई हो सकती है। 


सीसीटीएनएस पर प्रदेश के सभी पेशेवर अपराधियों का 10 साल का डाटा अपलोड किया जा रहा है। इसके संबंध में सभी विवेचना अधिकारियों को भी निर्देशित किया गया है कि वे इसका इस्तेमाल कर कोर्ट में पैरवी करें। ज्यादा से ज्याद बदमाशों की जमानत का विरोध किया जाए। इसके लिए एक अलग से भी पोर्टल बनाया जा रहा है।
- डीआईजी डॉ. निलेश आनंद भरणे, सह प्रवक्ता, उत्तराखंड पुलिस

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