खबर का असर: पांच माह में शिक्षिका की छुट्टी तय न कर पाने वाले मामले में शिक्षा निदेशक ने मांगा जवाब
शिक्षा निदेशक ने अमर उजाला की खबर का संज्ञान लेते हुए मुख्य शिक्षा अधिकारी से मांगा जवाब है।
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पांच माह बाद भी शिक्षिका को छुट्टी दी जाए या नहीं, यह तय न हो पाने के मामले में उत्तराखंड की शिक्षा निदेशक सीमा जौनसारी ने जवाब मांगा है।
शनिवार को अमर उजाला में खबर छपने के बाद शिक्षा निदेशक ने ऊधमसिंह नगर के मुख्य शिक्षा अधिकारी से इस मामले में जवाब तलब किया है। शिक्षा निदेशक ने अमर उजाला की खबर का संज्ञान लेते हुए मांगा जवाब है।
यह है मामला
शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे के गृह जिले में कार्यरत शिक्षिका विजय लक्ष्मी सैनी ने इसी साल जनवरी में बच्चे को गोद लेने के बाद बाल दत्तक ग्रहण अवकाश के लिए आवेदन किया था, लेकिन विभाग पांच महीने बाद भी यह तय नहीं कर पाया है कि शिक्षिका को छुट्टी दी जाए या नहीं।
प्रदेश में महिला सरकारी सेवकों को जिनकी दो से कम जीवित संतानें हों एवं जिनके द्वारा एक वर्ष की आयु तक के शिशु को गोद लिया गया हो, उनको पूरे सेवाकाल में एक बार अधिकतम 180 दिन के बाल दत्तक ग्रहण अवकाश दिए जाने की व्यवस्था है। 10 अक्तूबर 2017 के शासनादेश में इसे स्पष्ट किया गया है।
इसके बावजूद राजकीय इंटर कॉलेज बांसखेडा काशीपुर जिला ऊधमसिंह नगर में भौतिक विज्ञान की लेक्चरर विजय लक्ष्मी सैनी अवकाश के लिए खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय से लेकर शिक्षा निदेशालय के चक्कर काट रही हैं।
पूरी कानूनी प्रक्रिया के तहत 20 दिन के बच्चे को गोद लेने वाली इस शिक्षिका ने 18 जनवरी से 16 जुलाई तक छुट्टी के लिए आवेदन किया। शिक्षिका पांच महीने बाद स्कूल में पदभार ग्रहण कर चुकी हैं, लेकिन विभाग यह तय नहीं कर पाया है कि उसकी छुट्टी मंजूर की जाए या नहीं।