उत्तराखंड: कोरोना महामारी में डेंगू का प्रकोप हुआ कम, इस साल अब तक मिले सात मामले
बरसात के मौसम में जगह-जगह जलभराव होने से डेंगू मच्छर के पनपने का खतरा बढ़ गया है। जिससे डेंगू के मामले सामने आने लगे हैं।
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उत्तराखंड में कोरोना महामारी के बीच डेंगू का प्रकोप बहुत कम रहा। कोरोना संक्रमण रोकने के लिए सैनिटाइजेशन के साथ समय पर रोकथाम के इंतजाम और जागरूकता अभियान के चलते डेंगू से लोग सुरक्षित रहे। गत वर्ष प्रदेश में डेंगू के कुल 76 मामले सामने आए थे। जबकि डेंगू से एक मौत हुई थी। इस साल अब तक डेंगू के सात मरीज मिले हैं।
उत्तराखंड: हरिद्वार में कोरोना के साथ अब डेंगू की दस्तक, सात लोगों में हुई पुष्टि
बरसात के मौसम में जगह-जगह जलभराव होने से डेंगू मच्छर के पनपने का खतरा बढ़ गया है। जिससे डेंगू के मामले सामने आने लगे हैं। वर्ष 2016 और 2019 में राज्य में डेंगू का प्रकोप सबसे ज्यादा रहा। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार 2016 में पूरे प्रदेश में दो हजार से अधिक लोग डेंगू की चपेट में आए थे।
जबकि 2019 में 10 हजार से अधिक लोगों में डेंगू की पुष्टि हुई थी। साथ ही आठ लोगों की मौत डेंगू के कारण हुई। प्रदेश में 15 मार्च 2020 को कोरोना का पहले मामला मिला। कोविड संक्रमण को रोकने के लिए शहरों में सैनिटाइजेशन किया गया है। साथ ही सरकार की ओर से समय पर डेंगू की रोकथाम के लिए उचित कदम उठाए गए थे। जिसके कारण 2020 में डेंगू के मात्र 76 मामले ही सामने आए और एक मौत हुई थी।
राष्ट्रीय वैक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के प्रभारी अधिकारी डॉ. पंकज सिंह का कहना है कि सरकार व विभाग की ओर से अप्रैल में डेंगू की रोकथाम के लिए सभी तैयारी करने के लिए जागरूकता अभियान चलाया गया। जिससे गत वर्ष से डेंगू मामले कम आए हैं। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों की टीम लगातार डेंगू की मानीटरिंग कर रही है। जहां भी डेंगू का मामला सामने आता है, वहां टीम भेजे कर फॉगिंग के साथ रोकथाम के आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
पिछले छह साल की स्थिति
वर्ष डेंगू के मामले
2016 2046
2017 849
2018 591
2019 10622
2020 76
2021 07 (अब तक)
डेंगू के लक्षण
- तेज बुखार, सरदर्द, बदन दर्द।
- जोड़ों, मांसपेशियों और आंखों में दर्द।
- त्वचा पर चकते, लाल निशान।
- मसूडों व नाक से खून बहना।
- जी मिचलाना और उलटी।
डेंगू से बचाव के उपाय
- घर और उसके आसपास पानी एकत्रित न होने दें।
- पानी की टंकी, जल भंडारण की जगह को ढक कर रखें।
- कूलर, गमले का पान सप्ताह में एक बार पूरी तरह से खाली करें।
- मच्छर से बचने के लिए शरीर को पूरी तरह ढकने वाले कपड़े पहनें।