दुखद: पर्यावरणविद सुंदर लाल बहुगुणा का निधन, कोरोना संक्रमण के बाद एम्स ऋषिकेश में थे भर्ती
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश में भर्ती 94 वर्षीय पर्यावरणविद सुंदलाल बहुगुणा कोरोना से संक्रमित थे।
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विस्तार
एम्स ऋषिकेश में भर्ती पर्यावरणविद सुंदर लाल बहुगुणा (94 वर्षीय) का शुक्रवार दोपहर 12 बजे निधन हो गया। सुंदर लाल बहुगुणा कोरोना से संक्रमित थे। चिपको आंदोलन के इस प्रणेता के निधन की खबर सुनकर पूरे राज्य में शोक की लहर है। कोविड नियमों को ध्यान में रखते हुए पूर्णानंद घाट ऋषिकेश पर राजकीय सम्मान के साथ स्व. बहुगुणा का अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान विधासभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल, जिलाधिकारी देहरादून डॉ. आशीष श्रीवास्तव, मेयर अनीता ममगाई, एसएसपी योगेंद्र सिंह, एसपी देहात स्वतंत्र कुमार, पर्यावरणविद अनिल जोशी, मलेथा आंदोलनकारी समीर रतूड़ी, एसडीएम वरुण चौधरी श्रद्धांजलि देने पहुंचे।
पत्नी विमला समेत भरा-पूरा परिवार छोड़ गए बहुगुणा
सुंदर लाल बहुगुणा अपने पीछे पत्नी विमला बहुगुणा, पुत्री मधु बहुगुणा पाठक, पुत्र राजीव नयन बहुगुणा और प्रदीप बहुुगुणा समेत नाती-पोते का भरा-पूरा परिवार छोड़ गए। उनके बड़े पुत्र राजीव नयन बहुगुणा राज्य स्तरीय स्वतंत्र पत्रकार हैं, जबकि छोटे पुत्र प्रदीप बहुुगुणा भी ख्याति प्राप्त पत्रकार हैं। दामाद डा. वीसी पाठक स्वास्थ्य महानिदेशालय में कार्यरत हैं। बहुगुणा के निधन पर विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों से जुड़े लोगों ने गहरा दुख जताया है।
नम आंखों से किया पति सुंदरलाल बहुगुणा को विदा
जीवनभर साथ निभाने की कसम खाने वाली विमला देवी ने शायद कभी नहीं सोचा होगा कि उन्हें इन परिस्थितियों से गुजरना पड़ेगा, लेकिन कहते हैं न कि जो होनी को मंजूर होता है वही होता है। पति के निधन की खबर सुनकर पत्नी बिमला देवी (90) स्तब्ध हो गईं। मुनिकीरेती स्थित पूर्णानंद घाट पर जर्जर शरीर और हाथों की कंपकपाहट के साथ वह एकटक पति के पार्थिव शरीर को निहार रही थीं।
पति के शव को देखकर उनकी आंखों की अश्रुधारा नहीं रुक रही थी। हर कोई उन्हें ढांढस बंधा रहा था, लेकिन विमला देवी ने क्या खोया है ये तो वही समझ सकती हैं। यहां उन्होंने घाट पर राजकीय सम्मान से लेकर अंत्येष्टि तक अपने पति का साथ निभाया। घाट पर नम आंखों से अपने पति के शरीर को पंचतत्व में विलीन होता देख उन्होंने धैर्य नहीं खोया, बल्कि उन्हें एक वीरांगना की तरह विदा किया।
कोरोना के साथ ही निमोनिया भी हो गया था
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश में भर्ती 94 वर्षीय पर्यावरणविद सुंदर लाल बहुगुणा को कोरोना के साथ ही निमोनिया भी हो गया था। उन्हें सिपेप मशीन सपोर्ट पर रखा गया था और उनका ऑक्सीजन सेचूरेशन लेवल 86 फीसदी पर आ गया था। एम्स में चिकित्सक उनके ब्लड शुगर लेवल और ऑक्सीजन लेवल को संतुलित करने में जुट थे लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। वह डायबिटीज के मरीज भी थे। कोविड आईसीयू वार्ड में भर्ती बहुगुणा को अब एनआरबीएम मास्क ( नॉन रिब्रीथर मास्क) के माध्यम से आठ लीटर ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया था। संस्थान के चिकित्सकों की टीम उनके स्वास्थ्य की लगातार निगरानी व उपचार में जुटी थी।
सुंदरलाल बहुगुणा का योगदान अविस्मरणीय : राज्यपाल बेबी रानी मौर्य
राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने विख्यात पर्यावरणविद, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं चिपको आंदोलन के महानायक सुंदरलाल बहुगुणा के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। राज्यपाल ने कहा कि हिमालय के रक्षक सुंदरलाल बहुगुणा के निधन का समाचार सुनकर अत्यंत दुःख हुआ। पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में सुंदरलाल बहुगुणा का योगदान अविस्मरणीय है। उनका निधन संपूर्ण देश तथा विश्व के लिए अपूरणीय क्षति है। चिपको जैसे विश्वविख्यात आंदोलन का नेतृत्व करने वाले वृक्षमित्र सुंदरलाल बहुगुणा जल, जंगल, मिट्टी और बयार को जीवन का आधार मानते थे। पर्यावरण संरक्षण को समर्पित उनका जीवन और सिद्धान्त विश्वभर में पर्यावरण हितैषियों को सदैव प्रेरित करता रहेगा।
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मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने गहरा शोक व्यक्त किया
मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने विश्व प्रसिद्ध पर्यावरणविद् और पद्मविभूषण श्री सुंदरलाल बहुगुणा जी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि चिपको आंदोलन को जन जन का आंदोलन बनाने वाले श्री सुंदरलाल बहुगुणा जी का निधन न केवल उत्तराखण्ड और भारतवर्ष बल्कि समस्त विश्व के लिये अपूरणीय क्षति है। सामाजिक सराकारों व पर्यावरण के क्षेत्र में आई इस रिक्तता को कभी नहीं भरा जा सकेगा। ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें, और शोकाकुल परिजनों को धैर्य व दुख सहने की शक्ति प्रदान करें।
13 साल की उम्र में अमर शहीद श्रीदेव सुमन के संपर्क में आए
पर्यावरणविद पदमविभूषण और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी सुंदरलाल बहुगुणा का जन्म नौ जनवरी 1927 को टिहरी जिले में भागीरथी नदी किनारे बसे मरोड़ा गांव में हुआ। उनके पिता अंबादत्त बहुगुणा टिहरी रियासत में वन अधिकारी थे। 13 साल की उम्र में अमर शहीद श्रीदेव सुमन के संपर्क में आने के बाद उनके जीवन की दिशा ही बदल गई। सुमन से प्रेरित होकर वह बाल्यावस्था में ही आजादी के आंदोलन में कूद गए थे। उन्होंने टिहरी रियासत के खिलाफ भी आंदोलन चलाया।
पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने शोक व्यक्त किया
पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने प्रख्यात पर्यावरणविद् और पद्मविभूषण से सम्मानित सुंदरलाल बहुगुणा के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि चिपको आंदोलन को जन-जन तक पहुंचाकर सुंदरलाल बहुगुणा ने न केवल उत्तराखंड अपितु देश और दुनिया में पर्यावरण के प्रति लोगों को जागरूक किया। उनका निधन देश और दुनिया के लिए अपूरणीय क्षति है। भगवान से दिवंगत आत्मा की शांति और शोक संतप्त परिवार को धैर्य प्रदान करने की कामना करता हूं।
विधानसभा अध्यक्ष ने बताया अपूरणीय क्षति
विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने बहुगुणा के निधन को देश के लिए अपूरणीय क्षति बताया है। विधानसभा अध्यक्ष ने सुंदरलाल बहुगुणा के निधन की खबर सुनते ही एम्स ऋषिकेश पहुंचकर उनके परिजनों को सांत्वना दी। विधानसभा अध्यक्ष ने दिवंगत आत्मा की शांति की प्रार्थना की।
पहाड़ की पीड़ा का स्वर थे सुंदरलाल बहुगुणा : तरुण विजय
प्रसिद्ध पर्यावरणविद और चिपको आंदोलन के प्रणेता सुंदरलाल बहुगुणा के निधन पूर्व सांसद व उत्तराखंड युद्ध स्मारक के अध्यक्ष तरुण विजय ने दुख जताया है। पर्यावरणविद सुंदरलाल बहुगुणा पहाड़ की वेदना और पीड़ा के विश्वभर में स्वर बन गए थे। वे स्वतंत्र विचार के थे, किसी सत्ता के सामने झुके नहीं, किसी से कुछ मांगा नहीं, जो मन में ठीक लगा वही किया। वहीं वरिष्ठ पत्रकार सतीश शर्मा ने पर्यावरणविद सुंदरलाल बहुगुणा के निधन पर शोक जताया है।
पर्यावरणविद् सुंदरलाल बहुगुणा का निधन अपूर्णीय क्षति : महाराज
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने पर्यावरणविद् पद्मविभूषण सुंदरलाल बहुगुणा के निधन पर संवेदना व्यक्त करते हुए इसे प्रदेश और देश के लिए एक अपूर्णीय क्षति बताया है। चिपको आंदोलन के प्रणेता रहे सुंदरलाल बहुगुणा वर्ष 1971 में शराब की दुकानों को खोलने से रोकने के लिए सोलह दिन तक अनशन पर रहे। वह चिपको आंदोलन के कारण वे विश्वभर में वृक्षमित्र के नाम से प्रसिद्ध थे।
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, सर्वोदय आंदोलन के स्तंभ, पद्म विभूषण, पर्यावरण और वृक्ष रक्षा के मंत्र के महान उद्घोषक, गांधीवादी, सत्याग्रह के प्रतीक पुरूष सुंदरलाल बहुगुणा का निधन, देश, उत्तराखंड और मानवता की अपूरणीय क्षति है। क्रूर कोरोना ने उन्हें हमसे छीन लिया। गंगा व नदियों पर, बड़े बांधों पर उनका संघर्ष अद्वितीय रहा। चिपको आंदोलन को बहुगुणा ने एक नई ऊंचाई दी और एक वैज्ञानिक बुद्धि प्रदान की। सादगी, विनम्रता उनके आभूषण थे। मैं, उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। उनके जैविक और कर्तव्य पथ के परिवार के लोगों तक अपनी संवेदनाएं संप्रेषित करता हूं। भगवान, उन्हें अपने श्रीचरणों में स्थान दें।
- हरीश रावत, पूर्व मुख्यमंत्री उत्तराखंड व एआईसीसी के महासचिव
पर्यावरण की रक्षा के लिए अपना समस्त जीवन समर्पित करने वाले महान व्यक्तित्व विश्व प्रसिद्ध पर्यावरणविद् सुंदरलाल बहुगुणा का निधन समस्त समाज के लिए अपूरणीय क्षति है। मैं ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति की कामना करता हूं।
-अनिल बलूनी, सांसद राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी, भाजपा
विश्व प्रसिद्ध पर्यावरणविद् और पद्मविभूषण सुंदरलाल बहुगुणा का निधन उत्तराखंड के लिए ही नहीं पूरे देश और विश्व के लिए अपूरणीय क्षति है। ईश्वर से प्रार्थना है कि वह दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दे, और शोकाकुल परिजनों को धैर्य व दुख सहने की शक्ति प्रदान करें।
-मदन कौशिक, प्रदेश अध्यक्ष भाजपा
सुंदरलाल बहुगुणा अध्येता, पत्रकार, सर्वोदयी, स्वतंत्रता सेनानी, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, प्रकृति प्रेमी, हिमालय और गंगा के बेटे, चिपको को विश्व पटल पर स्थापित करने वाले, पर्यावरणविद और उससे बढ़कर धरती के लाल थे। राष्ट्रों की सीमाएं उनके सामने बौनी पड़ जाती थीं। वे प्रकृतिवादी ही नहीं मानवतावादी थे। विश्व ने 21वीं सदी का अंतिम विनोबा भावे खो दिया।
-किशोर उपाध्याय, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस