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उत्तराखंड : फर्त्याल पर सुलह, महेश नेगी पर इंतजार, विधायकों के विवाद पर भाजपा की नई रणनीति 

Mon, 02 Nov 2020 02:09 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Mon, 02 Nov 2020 02:09 PM IST
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Uttarakhand news: Conciliation over puran fartial, Waiting on Mahesh Negi decision
भाजपा - फोटो : amar ujala

एक महिला को लेकर पुलिस जांच में फंसे द्वाराहाट के भाजपा विधायक महेश नेगी के मामले में पार्टी अपने स्तर पर जांच के झमेले में नहीं फंसना चाहती। लिहाजा पार्टी ने विधायक के मसले को पुलिस जांच पर छोड़ दिया। जब तक पुलिस की जांच पूरी नहीं होती, पार्टी वेट एंड वॉच की मुद्रा में रहेगी।

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भ्रष्टाचार पर अपनी ही सरकार के खिलाफ बयानबाजी करने वाले लोहाघाट के विधायक पूरन फर्त्याल के मामले में भी पार्टी ने सुलह की रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है। अपने दो सांसदों को इस अभियान में लगाकर पार्टी फर्त्याल विवाद को सुलह के जरिये निपटाने की सोच रही है।
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बता दें कि पार्टी विधायकों के मामले में भाजपा खासी असहज है। विधायक पूरन फर्त्याल और महेश नेगी के विवादों को लेकर कांग्रेस व अन्य विपक्षी पार्टियां भाजपा पर लगातार निशाना साध रहे हैं। अनुशासन का संदेश देने के लिए पार्टी पर विधायकों के मामले में कार्रवाई करने का जबर्दस्त दबाव है, लेकिन पार्टी जल्दबाजी में ऐसा कोई फैसला नहीं करना चाहती, जिससे उसकी मुश्किलें खत्म होने के बजाय और अधिक बढ़ जाएं।
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यही वजह है कि पार्टी अध्यक्ष बंशीधर भगत ने पिछले दिनों विधायक महेश नेगी के मामले में किसी वरिष्ठ पदाधिकारी की अध्यक्षता में कमेटी बनाने का जो फैसला किया था, उसे अब बदल लिया है। बकौल भगत, महेश नेगी के मामले में पुलिस जांच चल रही है। पुलिस जांच का जो भी नतीजा होगा, पार्टी उसी आधार पर अपना अगला कदम तय करेगी।

विधायक फर्त्याल के विवाद को फिलहाल पार्टी ने सांसदों की जांच में फंसा दिया है। भाजपा सांसद अजय भट्ट के मुताबिक, जांच कमेटी फर्त्याल से एक दौर की बात कर चुकी है और अभी उनसे दूसरे दौर की बात होनी है।

फर्त्याल का पक्ष सुनने के बाद भट्ट का यह कहना कि विधायक शांत हैं, अनुशासित हैं और उनकी मुख्यमंत्री व सरकार के विरोध में नहीं है, से साफ जाहिर हो रहा है कि कमेटी सुलह की राह पर है। पार्टी की भी यह कोशिश है कि टनकपुर जौलजीवी सड़क के टेंडर विवाद से विधायक और सरकार के बीच में जो संवादहीनता पैदा हुई है, वह खत्म हो जाए। कमेटी के प्रयास भी इसी दिशा में है। 

मंत्रियों के विवादों को भी शांत करने की कोशिश

पार्टी और सरकार के स्तर पर मंत्रियों के विवादों को भी शांत करने की कोशिशें हो रही हैं। महिला कल्याण एवं बाल विकास राज्यमंत्री रेखा आर्य और आईएएस अफसर का विवाद जांच के बाद थमा है। जांच रिपोर्ट अब मुख्यमंत्री के पास पहुंच चुकी है।


इस मामले में भी सरकार के स्तर पर प्रयास हो रहे हैं कि विवाद खत्म हो जाए। सचिव की एसीआर का अधिकार मंत्री को देने की मांग उठाने वाले कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज भी अब शांत हैं। कर्मकार कल्याण बोर्ड के मामले में कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत के तेवर जरूर तल्ख हैं, लेकिन सूत्रों का कहना है कि यह विवाद भी सुलह के बाद शांत हो जाएगा।

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