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Uttarakhand: अक्तूबर से मिल सकती है कैशलेस जांच व दवाइयों की सुविधा, तीन लाख से ज्यादा कर्मियों को मिलेगा लाभ
Tue, 05 Sep 2023 11:02 AM IST
अलका त्यागी
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
Published by: अलका त्यागी
Updated Tue, 05 Sep 2023 11:02 AM IST
सार
ओपीडी इलाज में सभी तरह की पैथोलॉजी जांच और दवाइयों को भी कैशलेस किया जाए। पूर्व में राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण ने 31 मई को शासन को पैथोलॉजी जांच और दवाइयों को कैशलेस करने का प्रस्ताव भेजा था।
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- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
उत्तराखंड के तीन लाख से अधिक कर्मियों और पेंशनरों को गोल्डन कार्ड पर अक्तूबर से कैशलेस पैथोलॉजी जांच और दवाइयों की सुविधा मिल सकती है। शासन ने राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण से जन औषधि केंद्रों के माध्यम से दवाइयां मुहैया कराने के लिए दोबारा से प्रस्ताव मांगा है।
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प्रदेश सरकार ने आयुष्मान के तहत राज्य स्वास्थ्य योजना में गोल्डन कार्ड पर कर्मियों और पेंशनरों को कैशलेस इलाज की सुविधा दी है, लेकिन वर्तमान में भर्ती होने पर असीमित खर्च पर कैशलेस इलाज कराया जा रहा है। कर्मचारी व पेंशनरों की मांग है कि कैशलेस इलाज के लिए प्रति माह वेतन व पेंशन से अंशदान की कटौती की जा रही है।
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ओपीडी इलाज में सभी तरह की पैथोलॉजी जांच और दवाइयों को भी कैशलेस किया जाए। पूर्व में राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण ने 31 मई को शासन को पैथोलॉजी जांच और दवाइयों को कैशलेस करने का प्रस्ताव भेजा था। साथ ही अगस्त माह से इस सुविधा लागू करने की तैयारी थी। इस बीच प्राधिकरण के अध्यक्ष डीके कोटिया ने पद से इस्तीफा दिया।
अपर सचिव अरुणेंद्र सिंह चौहान से सीईओ का पद वापस लेने से प्रस्ताव भी लटक गया। अब शासन ने प्राधिकरण से दोबारा से प्रस्ताव भेजने के लिए कहा है। अक्तूबर माह से कर्मियों और पेंशनरों को इसका लाभ मिल सकता है।
पूर्व में जो प्रस्ताव बनाया गया था और उसमें कुछ संशोधन होना है। शासन स्तर पर दोबारा से प्रस्ताव मांगा गया है। जल्द ही पैथोलॉजी जांच और दवाइयों को कैशलेस किया जाएगा। -आनंद श्रीवास्तव, सीईओ, राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण।
प्रदेश के कर्मचारी लंबे समय से पैथोलॉजी जांच व दवाइयों को भी कैशलेस करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन सहमति बनने के बाद भी मामला शासन और राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण के बीच फंसा हुआ है, जिससे कर्मियों को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हमारी मांग है कि सरकार शीघ्र ही इस सुविधा को लागू करे।
-अरुण पांडे, अध्यक्ष, राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद