{"_id":"677d4b5efea4b6cbe10582fd","slug":"uttarakhand-news-case-of-death-due-to-chinese-manjha-reaches-human-rights-commission-2025-01-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Uttarakhand: मानवाधिकार आयोग पहुंचा चीनी मांझे से मौत का मामला, प्रतिबंध के बावजूद खुलेआम हो रही बिक्री","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Uttarakhand: मानवाधिकार आयोग पहुंचा चीनी मांझे से मौत का मामला, प्रतिबंध के बावजूद खुलेआम हो रही बिक्री
Tue, 07 Jan 2025 09:30 PM IST
अलका त्यागी
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
Published by: अलका त्यागी
Updated Tue, 07 Jan 2025 09:30 PM IST
सार
शिकायत में कहा गया है कि साल 2017 से नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने देशभर में चीनी मांझे की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया हुआ है। लेकिन यह खुलेआम बाजार और मोहल्लों में बिक रहा है।
विज्ञापन
चीनी मांझा
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
चीनी मांझे से मौत और हादसों का मामला उत्तराखंड मानव अधिकार आयोग पहुंच गया है। इस मामले में आयोग से हस्तक्षेप कर कार्रवाई करने का आग्रह किया गया है।
विज्ञापन
शिकायत में कहा गया है कि साल 2017 से नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने देशभर में चीनी मांझे की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया हुआ है। लेकिन यह खुलेआम बाजार और मोहल्लों में बिक रहा है। इसकी वजह से लोगों और पक्षियों को जान गंवानी पड़ रही है। कहा, प्रशासन लगातार हादसों के बावजूद मौन है।
विज्ञापन
यह आम लोगों को संविधान से मिले जीने के मौलिक अधिकार का हनन है। याचिका मेहूंवाला निवासी मोहम्मद आशिक ने दायर की है। उन्होंने बीती दो जनवरी को हरिद्वार में चीनी मांझे की चपेट में आकर हुई मौत का हवाला दिया है।
विज्ञापन
Dehradun: दून की गलियों में भी मिलता है मौत का अदृश्य सामान...पांच रुपये में आसानी से खरीद सकते हैं चीनी मांझे
यह भी बताया है कि चीनी मांझे से लोगों के हाथ कटने व गला कटने की कई घटनाएं अकसर देखने को मिलती हैं। साथ ही इससे काफी संख्या में पशु-पक्षियों की भी मौतें होती हैं। बिजली के तारों में भी चीनी मांझे के कारण फॉल्ट की समस्या बढ़ती जा रही है, परंतु फिर भी यह खुलेआम बेचा जा रहा है।