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उत्तराखंड: इस साल अब तक वन्यजीवों का शिकार बने 30 लोग, अकेले गुलदार ने ली 16 की जान 

Sat, 31 Jul 2021 04:08 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal विनोद मुसान , अमर उजाला, देहरादून
विनोद मुसान , अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sat, 31 Jul 2021 04:08 PM IST
सार

मानव और वन्यजीवों को जीने के लिए संघर्ष की इस कोशिश में दोनों ही लगातार जान गंवा रहे हैं। प्रदेश में सबसे अधिक गुलदार के हमले सामने आ रहे हैं।

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uttarakhand news: 30 people deid in animal attack, guldar alone took 16 life
गुलदार-प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रदेश में मानव-वन्यजीव संघर्ष में इस वर्ष अब तक 30 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। अकेले 16 लोगों की जान गुलदार ने ली है। मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ते टकराव की वजह से नुकसान दोनों को ही हो रहा है। वन महकमा और विशेषज्ञ इस बात को लेकर चिंतित हैं। वन विभाग ने इन घटनाओं को रोकने लिए कुछ प्रयास तो किए हैं, लेकिन वह नाकाफी साबित हो रहे हैं। 

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मानव और वन्यजीवों को जीने के लिए संघर्ष की इस कोशिश में दोनों ही लगातार जान गंवा रहे हैं। प्रदेश में सबसे अधिक गुलदार के हमले सामने आ रहे हैं। जनवरी 2021 से चालू माह जुलाई तक अगर 16 लोगों की गुलदार ने जान ली है तो सात गुलदारों को अपनी जान देकर इसकी कीमत भी चुकानी पड़ी।
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इन्हें मनुष्यों पर हमला करने और जान लेने पर आदमखोर घोषित कर मारा गया। पिछले एक सप्ताह में ही टिहरी और रुद्रप्रयाग में दो गुलदार आदमखोर घोषित कर मारे गए। इन्होंने अलग-अलग घटनाओं में दो लोगों की जान ली थी। 
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वन्यजीवों के हमले में इस वर्ष 30 लोग मारे गए
गुलदार के हमले में मारे गए लोग- 16
हाथी के हमले में मारे गए लोग- 05
टाइगर के हमले में मारे गए लोग- 02
सांप के हमले में मारे गए लोग- 06
जंगली सूअर के हमले में मारे गए लोग- 01
कुल मारे गए लोग - 30 

वन्यजीवों के हमले में घायल हुए 64 लोग
गुलदार के हमले में घायल हुए लोग- 23
हाथी के हमले में घायल हुए लोग- 07
टाइगर के हमले में घायल लोग- 03
सांप के हमले में घायल लोग- 04
जंगली सूअर के हमले में घायल हुए लोग- 05
भालू के हमले में घायल हुए लोग- 22
कुल घायल हुए लोग - 64

2001 से अब तक मारे गए 1467 गुलदार 

वर्ष 2001 से अब तक अलग-अलग कारणों से प्रदेश में 1467 गुलदार की मौत हुई है। इनमें से 72 गुलदार को मनुष्यों पर हमला करने के बाद आदमखोर घोषित कर मारा गया। इस वर्ष चालू माह तक ऐसे सात गुलदारों को मौत के घाट उतारा गया। वर्ष 2021 में अब तक कुल 63 गुलदार की मौत हुई है। इनमें दो गुलदार अज्ञात दुर्घटना में, चार सड़क दुर्घटना में, 14 आपसी संघर्ष में, 17 की स्वभाविक मौत हुई, जबकि 19 गुलदार अज्ञात मौत मरे। 
 
वन विभाग की ओर से मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए बड़े स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन उनका बहुत ज्यादा प्रतिफल सामने नहीं आ रहा है। खासकर गुलदार हमलों लगातार तेजी आई है।

वन मुख्यालय के अफसरों का कहना है कि गुलदारों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए इनकी अधिक आबादी वाले क्षेत्रों में कैमरा ट्रैप लगाने के साथ कुछ गुलदार को डीओ कॉलर भी लगाए गए हैं। देहरादून स्थित वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिक भी मानव-गुलदार के इस संघर्ष को कम करने के उपायों पर काम कर रहे हैं। 

हमने गुलदारों पर पूर्व में किए गए शोध के आंकड़ों को विशेषज्ञों के साथ साझा किया है। हमें उम्मीद है कि उनके व्यवहार की बेहतर समझ हमें संघर्ष कम करने के तरीकों  में मदद कर सकती है। गुलदार जब भी मानव आबादी में प्रवेश करता है, कुत्ते उसका पहला शिकार होते हैं। खासकर मानसून के सीजन में कुत्ते बारिश और बिजली चमकने के कारण दुबक जाते हैं, ऐसे में गुलदार शिकार न मिलने पर मानवों पर हमला कर देता है। अधिकतर ममालों बच्चे र महिलाएं उसके शिकार बनते हैं। 
- जेएस सुहाग, चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन, उत्तराखंड

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