इस 'अशुभ' विभाग को लेने से डर रहे उत्तराखंड सरकार के मंत्री
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जहां एक ओर प्रकाश पंत को विधायी और संसदीय कार्य मंत्रालय का जिम्मा सौंपा गया है। सूत्रों से खबर है कि शिक्षा विभाग को लेने से मंत्री कतरा रहे हैं। वहीं खेल विभाग पर अधिकतर मंत्री अपनी नजर लगाए बैठे हैं।
उत्तराखंड की त्रिवेंद्र सरकार में जहां कई मंत्री खेल विभाग पर नजर टिकाए बैठे हैं तो वहीं 'अशुभ' माना जाने वाला शिक्षा मंत्रालय कोई भी मंत्री नहीं लेना चाहता है। दरअसल शिक्षा मंत्रालय को लेकर एक मिथक बन गया है कि जिसके पास भी यह विभाग रहा उसकी चुनाव में हार हुई। हरीश रावत सरकार में शिक्षा मंत्री रहे मंत्री प्रसाद नैथानी भी देवप्रयाग सीट से चुनाव हार गए।
दूसरी ओर सूत्र यह भी बताते हैं कि शिक्षा विभाग की कमान संभालने को कोई भी मंत्री तैयार नहीं है। कई मंत्री तो शिक्षा विभाग लेने से साफ इंकार कर चुके हैं। इसके पीछे उस मिथक को ही वजह माना जा रहा है जिसमें कोई भी मंत्री शिक्षा मंत्री रहते हुए आज तक उत्तराखंड के विधानसभा चुनाव में जीत नहीं पाया है।
इन मंत्रियों के अशुभ साबित हुआ शिक्षा विभाग
-सबसे पहले उत्तराखंड में जब भाजपा की सरकार बनी थी तो उस समय में शिक्षा मंत्रालय तीरथ सिंह रावत के पास था, जो 2002 में हुए पहले विधानसभा चुनाव हार गए।
-2007 के विधान सभा चुनाव में शिक्षा मंत्रालय एनडी तिवारी सरकार में नरेंद्र भण्डारी के पास था जो 2007 के विधान सभा चुनाव में चुनाव हार गए।
-2012 में शिक्षा मंत्रालय बीजेपी से लगातार चुनाव जीतते आ रहे मातबर सिंह कण्डारी के पास गया और 2012 में मातबर सिंह कण्डारी में चुनाव हार गए। कंडारी लगातार विधायक बनते हुए आ रहे थे।
-2017 के विधान सभा चुनाव में पूरे 5 साल तक शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी संभालने वाले शिक्षा मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी भी इस मिथक को नहीं तोड़ पाए और विधानसभा चुनाव हार गए।
सूत्रों के अनुसार खेल मंत्रालय को लेने के लिए मंत्रियों में होड़ मची हुई है। कारण है 2017 में होने वाले पुलिस नेशनल गेम्स और 2018 में राज्य में होने वाले नेशनल गेम्स। इन दो बड़े इवेंट के कारण खेल मंत्रालय लेने के लिए मंत्री लालायित हैं।