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लॉकडाउन का असर, शून्य वायु प्रदूषण के करीब दिल्ली, आईआईटी रुड़की के वैज्ञानिकों की रिसर्च

Mon, 27 Apr 2020 02:00 AM IST
अलका त्यागी अंकित कुमार गर्ग, अमर उजाला, रुड़की
अंकित कुमार गर्ग, अमर उजाला, रुड़की Published by: अलका त्यागी Updated Mon, 27 Apr 2020 02:00 AM IST
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Uttarakhand Lockdown: IIt Roorkee Scientist study, delhi Air pollution Will zero soon
लॉकडाउन से पहले और बाद का इंडिया गेट - फोटो : पीटीआई

लॉकडाउन के कारण वायुमंडल में प्रदूषण के स्तर में कमी साफ नजर आ रही है। देशभर में प्रदूषण के गिरते स्तर का वास्तविक पता लगाने के लिए आईआईटी रुड़की के वैज्ञानिकों ने अध्ययन शुरू कर दिया है। शोध के शुरुआती नतीजे सकारात्मक आए हैं।

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हाल ही में ली गई सेटेलाइट इमेज के अध्ययन में पता चला है कि 23 मार्च से पहले दिल्ली में पृथ्वी की सतह के समीप वायुमंडल में विभिन्न गैसों का सांद्रण .0002 था, जो अब घटकर शून्य के करीब पहुंच गया है। यह प्रदूषण मुक्त वायुमंडल का संकेत है।
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वहीं, कोलकाता में यह प्रदूषण आधा घटने के बावजूद देश में सबसे अधिक है। कोल बेल्ट के जिन इलाकों में थर्मल पॉवर प्लांट संचालित हो रहे हैं, वहां सेटेलाइट इमेज लाल धब्बों के रूप में तुलनात्मक रूप से बढ़े प्रदूषण को दर्शा रही हैं।

लाल धब्बे के रूप में दिखती हैं सेटेलाइट इमेज...

Uttarakhand Lockdown: IIt Roorkee Scientist study, delhi Air pollution Will zero soon
जलवायु परिवर्तन - फोटो : PTI

आईआईटी रुड़की के अर्थसाइंस डिपार्टमेंट के वैज्ञानिक प्रो. अरुण कुमार सराफ और प्रो. अजंता गोस्वामी ने लॉकडाउन के मद्देनजर 23 मार्च के बाद सेटेलाइट से प्राप्त डाटा का विश्लेषण शुरू किया है। प्रो. सराफ ने बताया कि शोध के लिए यूरोप की सेटेलाइट से प्राप्त इमेज के शुरुआती अध्ययन में पता चला है कि जिन प्रदेशों में थर्मल पावर प्लांट हैं, उन कोल बेल्ट एरिया में वायु प्रदूषण का स्तर अन्य क्षेत्रों से अधिक है। सेटेलाइट इमेज में इन क्षेत्रों को लाल धब्बों के रूप में प्रदर्शित किया गया है।

उन्होंने बताया कि दिल्ली में प्रदूषण की मात्रा में भारी गिरावट आई है। यहां नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड, सल्फर डाई ऑक्साइड और ओजोन गैसों का सांद्रण शून्य के करीब पहुंच गया है, जो लॉकडाउन से पहले .0002 मॉलिक्यूल प्रति वर्ग मीटर था। जबकि देश में सबसे अधिक प्रदूषण (.0001 मॉलिक्यूल प्रति वर्ग मीटर) कोलकाता में देखा जा रहा है।

यहां प्रदूषण के स्तर में अपेक्षाकृत कम गिरावट को लॉकडाउन के सख्ती से पालन नहीं होने के रूप में देखा जा सकता है। वहीं, देश के अन्य हिस्सों में भी प्रदूषण घटा है। इस शोध में वायुमंडल में एरोसोल (सूक्ष्म ठोस कणों अथवा तरल बूंदों के हवा या किसी अन्य गैस के साथ मिश्रण) की मात्रा में कमी पर भी अध्ययन किया जा रहा है।

इन प्रदेशों में भी अब भी प्रदूषण के लाल धब्बे...

Uttarakhand Lockdown: IIt Roorkee Scientist study, delhi Air pollution Will zero soon

कोल बेल्ट में आने वाले पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड के उन इलाकों में सेटेलाइज इमेज लाल धब्बों को दिखा रही हैं, जहां थर्मल पॉवर प्लांट संचालित हो रहे हैं। प्रो. सराफ के मुताबिक, इस समय किया गया अध्ययन अपने आप में आदर्श स्थिति को दर्शाएगा। लॉकडाउन खुलने के बाद यह साफ हो सकेगा कि वाहनों और फैक्टरियों के जरिये प्रदूषण की मात्रा कितनी बढ़ती है।

ऐसे करते हैं सेटेलाइट इमेज से प्रदूषण का आकलन

सेटेलाइट से वायुमंडल के प्रदूषण का स्तर मापने के लिए डिजिटल इमेज प्रोसेस तकनीक का उपयोग किया जाता है। सेटेलाइट से प्राप्त तस्वीरें टू डायमेंशनल मैट्रिक्स फार्म में होती हैं। इसमें हर छोटे सेल की एक वैल्यू होती है। मैथमेटिकल मॉडल के विभिन्न स्टेप्स से इसी वैल्यू के आधार पर प्रदूषण का आंकड़ा जुटाया जाता है। प्रो. एके सराफ ने बताया कि मैथमेटिकल मॉडल के जरिए कई स्टेप्स के तहत गणना होती है। इसके बाद प्रदूषण का स्तर बताया जाता है।

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