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उत्तराखंड में नए साल में बढ़ेंगे जमीन के सर्किल रेट

Sun, 31 Dec 2017 11:09 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 31 Dec 2017 11:09 AM IST
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uttarakhand land circle rate will increase
प्रतीकात्मक तस्वीर

नए साल में पूरे प्रदेश में भूमि के सर्किल रेट बढ़ना तय है। इस संबंध में जिलाधिकारियों ने वित्त विभाग को नई दरों को लेकर जो प्रस्ताव भेजे थे, सरकार ने उन पर मुहर लगा दी है।

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प्रस्ताव के मुताबिक, सरकार सर्किल रेट में औसतन पांच से 25 फीसदी की बढ़ोतरी कर सकती है। जनवरी में होने वाली कैबिनेट की बैठक में नए सर्किल रेट के प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के आसार हैं। वित्त मंत्री प्रकाश पंत ने प्रस्ताव को वित्त विभाग की मंजूरी दिए जाने की पुष्टि की है। जिलाधिकारियों ने उन क्षेत्रों में सर्किल रेट बढ़ाए जाने के प्रस्ताव भेजे हैं, जहां दरें अभी कम हैं।
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पर्वतीय जनपदों की अपेक्षाकृत मैदानी क्षेत्रों में सर्किल रेट अधिक होने की संभावना है। देहरादून, हरिद्वार, हल्द्वानी और ऊधमसिंह नगर जनपदों के उन पॉश इलाकों में सर्किल रेट में सीमित वृद्धि हो सकती है, जहां पहले से ही दरें अधिक हैं। लेकिन शहरों में शामिल हुए नए ग्रामीण क्षेत्रों और अर्द्ध शहरी इलाकों में सर्किल रेट की दरें पांच फीसदी से लेकर 25 फीसदी तक बढ़ाई जा सकती है। प्रदेश में पिछले करीब दो वर्ष से भूमि के सर्किल रेट संशोधित नहीं हुए हैं।
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पिछली सरकार में दरें घोषित करने की तैयारी थी, लेकिन विधानसभा चुनाव के चलते सर्किल रेट घोषित नहीं हुए थे। नई सरकार ने सत्ता संभालने के बाद ही सर्किल रेट निर्धारित करने की कवायद आरंभ कर दी थी। सभी जिलाधिकारियों को नए सिरे से प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए गए थे। जिलाधिकारियों ने शासन को काफी पहले प्रस्ताव भेज दिए थे। प्रस्तावों पर विचार करने के बाद अब वित्त विभाग ने इसमें जस का तस मंजूर कर दिया है। 

प्रमुख बातें
-पहाड़ की तुलना में मैदानी इलाकों में बढ़ेंगी दरें।
-निकायों में शामिल ग्रामीण क्षेत्रों में भी होगी वृद्धि।
-मैदानी इलाकों में 5 से 25 फीसदी तक वृद्धि का प्रस्ताव।
-पहले से अधिक दरों वाले इलाकों में सीमित बढ़ोतरी।
-नए शहरी व अर्द्धशहरी क्षेत्रों में महंगी होगी जमीन।

जिलाधिकारियों के प्रस्ताव आ चुके हैं। अब इन प्रस्तावों को कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा। जिलों से उन इलाकों में सर्किल रेट बढ़ाने के प्रस्ताव हैं, जहां दरें कम हैं।
- सौजन्या, राज्य कर आयुक्त

इनकम बढ़ाने की कोशिश
कठिन आर्थिक हालातों का सामना कर रही प्रदेश सरकार ने आमदनी में बढ़ोतरी करने के लिए अब तक जितने लक्ष्य तय किए हैं, उनमें उसे आशातीत सफलता नहीं मिली है। अब वह जमीन के सर्किल रेट में बढ़ोतरी कर स्टांप व रजिस्ट्रेशन शुल्क के एवज में होने वाली कमाई को बढ़ाना चाहती है। नोटबंदी के चलते उसकी आमदनी में बहुत ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई है। अपने संसाधनों से आय बढ़ाने के लिए उसने स्टांप व रजिस्ट्रेशन शुल्क के तौर पर तय लक्ष्य के सापेक्ष 779 करोड़ रुपये की कमाई की थी जो वर्ष 2015-16 में अर्जित 872 करोड़ रुपये से कम रहा। इस साल लक्ष्य को पार करने के लिए अब वह सर्किल रेट बढाने जा रही है। 

 
जीएसटी और आबकारी का लक्ष्य भी डोला
प्रदेश सरकार को जीएसटी और आबकारी से होने वाली आय का लक्ष्य भी डगमगा रहा है। सरकार ने आबकारी से 2310 करोड़ रुपये के राजस्व का लक्ष्य रखा है, लेकिन दिसंबर तक उसे 1725 करोड़ की ही आमदनी हुई है। खनन के 620 करोड़ के लक्ष्य के सापेक्ष वह 224 करोड़  ही कमा सकी है, जबकि वित्तीय वर्ष समाप्ति के अब तीन महीने शेष रह गए हैं।

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