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सरकारी वेबसाइट पर ना प्रमोशन न रिटायरमेंट

Thu, 25 Aug 2016 03:31 PM IST
संजय त्रिपाठी/ अमर उजाला, देहरादून
संजय त्रिपाठी/ अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 25 Aug 2016 03:31 PM IST
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uttarakhand information department website not update
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उत्तराखंड सरकार की योजनाओं और नीतियों के प्रचार-प्रसार का जिम्मा संभालने वाले सूचना विभाग को प्रदेश के जिलाधिकारियों और सचिवालय के अफसरों की ही जानकारी नहीं है।

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इसका प्रमाण सूचना विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध है, जहां अफसरों के संबंध में तमाम सूचनाएं सालों पुरानी हैं। यह स्थिति तब है, जब सूचना विभाग में दर्जन भर से ज्यादा अफसर तैनात हैं और हर महीने सरकार अच्छा-खासा खर्च विभाग पर करती है।
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सूचना एवं लोक संपर्क विभाग की अधिकृत वेबसाइट uttarainformation.gov.in पर सबसे ऊपर बने सरकार के बारे में दिए गए कॉलम पर क्लिक करते ही उत्तराखंड सरकार के अलावा सचिवालय का ब्यौरा सामने आता है। सचिवालय के नीचे तमाम लिंक दिए हैं। इसमें अपर मुख्य सचिव पर क्लिक किया जाए तो एस. राजू का नाम लिखा है, जो कई माह पूर्व सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
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इसके बाद प्रमुख सचिव वाले कॉलम में जिनके नाम दर्ज हैं, उनमें जयदेव सिंह के अलावा राम सिंह सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जबकि एस. रामास्वामी और डॉ. रणवीर सिंह काफी पहले अपर मुख्य सचिव बन चुके हैं।

वहीं सचिव वाले कॉलम में आरके सुधांशु और एमसी जोशी का नाम अभी भी चला आ रहा है, जबकि दोनों अधिकारी सेवा में नहीं हैं। इसी में एक नाम भारतीय विदेश सेवा से जुड़े विनोद फोनिया का है, जो करीब तीन साल पहले वापस अपने मूल कैडर में जा चुके हैं।

खबर यह भी है कि उन्होंने वहां से भी इस्तीफा दे दिया है। अपर सचिव के कॉलम में जिन अफसरों के नाम है, उनमें पीयूष सिंह यहां से अपने मूल कैडर महाराष्ट्र में सालों पहले वापस जा चुके हैं। इसी तरह सौजन्या प्रतिनियुक्ति पर कर्नाटक गई हैं, जबकि दमयंती दोहरे का नाम सचिव और अपर सचिव दोनों में दर्ज है।

सचिवालय में कार्यरत आईएएस अधिकारी डॉ. रंजीत सिन्हा, डॉ. पंकज पांडेय और बीके संत, ज्योति नीरज खैरवार, नीरज खैरवार के नाम कहीं हैं ही नहीं। अपर सचिव एससी बडोनी और विनोद रावत के सेवानिवृत्त होने के बाद भी उनका नाम वेबसाइट पर बदस्तूर दर्ज है।

हैरानी इस बात की भी है कि सभी अफसरों से संपर्क करने के लिए उनके टेलीफोन नंबर के बजाए फैक्स के नंबर दिए गए हैं। कुछ इसी तरह की विसंगतियां संयुक्त सचिवों की सूची में भी है। इसमें आरके तोमर, संतोष बडोनी, अतर सिंह, सुमन वल्दिया, देवेंद्र पालीवाल, धीरेंद्र दताल समेत अन्य अफसरों के नाम ही नहीं हैं, जबकि ये सभी लंबे समय से संयुक्त सचिव बन चुके हैं।

कुमाऊं के कमिश्नर अभी भी अवनेंद्र
वेबसाइट पर जानकारियों का हाल यह है कि कुमाऊं के कमिश्नर पद से सेवानिवृत्त होकर पुनर्नियुक्ति पा चुके अवनेंद्र नयाल को अभी भी कुमाऊं का कमिश्नर दर्शाया गया है। इसी तरह टिहरी गढ़वाल जिले से दो महीने पहले हटाई जा चुकीं ज्योति नीरज खैरवाल और उत्तरकाशी से छह माह पूर्व शासन में आए विनय शंकर पांडेय को उत्तरकाशी का डीएम बताया गया है। चंपावत के डीएम भी बदल चुके हैं, मगर वेबसाइट पर पूर्व जिलाधिकारी दीपेंद्र चौधरी का ही नाम चल रहा है।

एक महीने पुराने शासनादेश
कुछ यही हाल सरकार की उस वेबसाइट का भी है, जिसमें उत्तराखंड सरकार द्वारा जारी शासनादेश प्रसारित किए जाते हैं। इस वेबसाइट पर बीती 28 जुलाई तक के शासनादेश अपडेट किए गए हैं, जो करीब महीने भर पुराने हैं। वहीं यूपी में शासनादेश डॉट कॉम नाम की वेबसाइट पर लेटेस्ट अपडेट मिल जाता है।


इस संबंध में कई बार आला अधिकारियों को सूचित किए जाने के बाद भी कोई असर नहीं पड़ा। गौरतलब है कि शासन के ताजा फैसलों के अपडेट मिलने से उनका प्रचार-प्रसार होता है। साथ ही आम लोगों तक सरकारी फैसलों की जानकारी पहुंचती है।

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