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उत्तराखंड: आईएएस वी षणमुगम दो दिन से गायब, राज्यमंत्री रेखा आर्य ने जताई अपहरण की आशंका

Tue, 22 Sep 2020 08:56 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Tue, 22 Sep 2020 08:56 PM IST
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Uttarakhand IAS Officer V Shanmugam Missing From Two Days, State Minister Rekha Arya Doubt for Kidnapping
राज्यमंत्री रेखा आर्य - फोटो : फाइल फोटो

उत्तराखंड के आईएएस अधिकारी और महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग के निदेशक वी षणमुगम दो दिन से गायब हैं। विभागीय मंत्री रेखा आर्य ने देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अरुण मोहन जोशी को पत्र लिखकर उनके अपहरण की आशंका जताई है।

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राज्यमंत्री रेखा आर्य ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को लिखे पत्र में बताया कि वी षणमुगम वर्तमान में उनके विभाग में अपर सचिव एवं निदेशक के पद पर कार्यरत हैं। जो 20 सितंबर से गायब हैं, उनका फोन भी बंद है।
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कई बार संपर्क करने के बाद भी उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। आर्य के अनुसार या तो किसी ने उनका अपहरण कर लिया है या फिर वे खुद ही भूमिगत हो गए हैं। उनका कहना है कि विभाग में मानव संसाधन आपूर्ति के लिए टेंडर की प्रक्रिया चल रही थी, जिसमें घोर अनियमितता एवं धांधली सामने आ रही हैं।
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उन्होंने कहा कि इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि ऐसी स्थिति से बचने के लिए वो खुद ही भूमिगत हो गए हों। उन्होंने पुलिस से आईएएस की तलाश करने को कहा है।
 

आउटसोर्सिंग एजेंसी के चयन में गड़बड़ी पर निदेशक तलब

महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग में आउटसोर्सिंग एजेंसी के चयन में गड़बड़ी की शिकायत पर विभाग की राज्यमंत्री ने निदेशक से जवाब तलब किया है। विभाग की राज्यमंत्री रेखा आर्य ने विभाग के निदेशक वी षणमुगम को लिखे पत्र में कहा कि मानव संसाधन आपूर्ति के लिए टेंडर प्रक्रिया में कुछ फर्मों ने गड़बड़ी की शिकायत की है। जिस पर रविवार और सोमवार को पूरे दिन आपसे संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन फोन नहीं उठा।

इस संबंध में जब सचिव को फोन किया गया तो उन्होंने भी फोन नहीं उठाया। सोमवार को सुबह विभाग की सचिव ने फोन किया तो मंत्री ने निर्देश दिया कि टेंडर प्रक्रिया स्थगित कर दी जाए। मंत्री ने कहा कि उन्हें यह बताया जाए कि ऐसी उनकी कौनसी मजबूरी रही है कि पूरे कार्य दिवस में फोन बंद कर गायब रहे। मंत्री ने कहा कि आपने 19 सितंबर को देर रात टेंडर खोला और उसी दिन चयनित एजेंसी को वर्क ऑर्डर कर दिया।

जबकि वर्क ऑर्डर की सूचना आपने संबंधित एजेंसी को 21 सितंबर को दी। विभाग की राज्य मंत्री ने कहा कि टेंडर प्रक्रिया में आपकी कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। पूर्व में भी आपने इस टेंडर प्रक्रिया को निरस्त करने के बाद निदेशालय स्तर पर नोडल अधिकारी नामित कर प्रकरण की जांच कराई थी। जिसमें चार कर्मचारी दोषी पाए गए, लेकिन चारों कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई न कर आपने केवल दो कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की।

कहा कि टेंडर प्रक्रिया की शर्तों में स्पष्ट लिखा गया था कि कंपनी श्रम कानून 1971 के अधीन रजिस्टर्ड होनी आवश्यक है, इसके बाद भी प्रकरण में अनियमितता हुई है, जिससे लगता है कि आपने व्यक्ति विशेष को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया है। मंत्री ने कहा कि कैंप कार्यालय में पत्रावली सहित उपस्थित होकर अपना पक्ष रखें। उधर इस मामले में निदेशक से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन संपर्क नहीं हो पाया, अगर उनका पक्ष आएगा तो वो भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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