पंचायती राज एक्ट में संशोधन के खिलाफ दायर याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई, याचिकाकर्ताओं से कही ये बात
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से पंचायतीराज अधिनियम में किए गए संशोधन के खिलाफ दायर याचिका पर गुरुवार को सुनवाई की। सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा है कि जिन लोगों ने याचिका दायर की है, वे शुक्रवार नौ अगस्त तक अपने बच्चों की जानकारी कोर्ट में शपथपत्र के माध्यम से दें। इस मामले में सुनवाई शुक्रवार को भी जारी रहेगी।
मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार नया गांव कोटाबाग निवासी मनोहर लाल आर्या, उत्तराखंड ग्राम प्रधान संगठन और अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि राज्य सरकार द्वारा 2019 में पंचायती राज अधिनियम में संशोधन किया गया है जिसमें दो से अधिक बच्चे वालों को चुनाव लड़ने से रोका जा रहा है, जो कि गलत है।
याचिका में कहा कि सरकार द्वारा एक्ट में किए गए बदलाव को बैक डेट से लागू कराया जा रहा है। याचिकाकर्ता का कहना था कि इस अधिनियम को लागू करने से पूर्व 300 दिन का समय दिया जाना चहिए था, लेकिन राज्य सरकार की ओर से इसे बैक डेट से लागू किया गया है।
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि सरकार के दो बच्चों से अधिक के चुनाव लड़ने वाले बदलाव के बाद पहाड़ी क्षेत्रों में प्रधान के उम्मीदवार मिलना मुश्किल हो जाएगा। याचिका में हाई स्कूल पास होने की बाध्यता को भी चुनौती दी गई है।
अधिनियम के संशोधन में यह भी कहा गया है कि कोऑपरेटिव सोसायटी के सदस्य भी दो से अधिक बच्चे होने के कारण चुनाव नहीं लड़ सकते हैं, लेकिन गांवों में प्रत्येक सदस्य किसी न किसी कोऑपरेटिव सोसायटी का सदस्य होता है इस तरह से तो ग्राम प्रधान मिलना मुश्किल हो जाएगा। इस मामले में सुनवाई जारी है।