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बदरीनाथ-केदारनाथ हेली सेवा को चुनौती देने वाली याचिका खारिज, सभी 24 हेलीपेड के लिए होंगे टेंडर

Thu, 09 May 2019 06:54 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल Published by: अलका त्यागी Updated Thu, 09 May 2019 06:54 AM IST
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Uttarakhand high court reject petition against badrinath kedarnath heli service

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने बदरीनाथ-केदारनाथ क्षेत्र में हेली सेवा के लिए टेंडर प्रक्रिया को चुनौती देने वाली आरडी ग्रुप देहरादून की याचिका को खारिज कर दिया है। इसके बाद मंदाकिनी घाटी में बने सभी 24 हेलीपैड के टेंडर किए जाने का रास्ता साफ हो गया है।

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28 मार्च को कोर्ट ने टेंडर प्रक्रिया पर रोक लगाई थी। न्यायमूर्ति आलोक सिंह की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई।  याचिका में कहा गया था कि सरकार ने 2015 में बदरीनाथ, केदारनाथ में  14 हेली कंपनियों को हेलीपैड बनाने की अनुमति दी थी।
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जिसके बाद 14 हेलीपैड बनाए गए। चार हेलीपैड सरकार की ओर से भी बनाए गए। सरकार ने 2016 में एक शासनादेश जारी कर कहा था कि सुरक्षा की दृष्टि से मंदाकिनी घाटी में एक बार में छह से अधिक हेलीकाप्टर उड़ान नहीं भर सकते।
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सरकार ने कहा था कि भविष्य में इनके अलावा नए हेलीपैड बनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। सरकार के आदेश के बावजूद इन 14 कंपनियों के अलावा चार अन्य हेली कंपनियों ने मंदाकिनी वैली में चार नए हेलीपैड बना दिए।

डीएम रुद्रप्रयाग ने इसकी शिकायत सरकार से की लेकिन सरकार ने इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। 5 फरवरी 2019 को सरकार ने बदरीनाथ, केदारनाथ में हेली सेवा के लिए इन 14 हेली कंपनियों से टेंडर प्रक्रिया आमंत्रित किए, लेकिन राज्य के सचिव उड्डयन ने इस निविदा को 16 फरवरी 2019 को संशोधित करके उन चार कंपनियों को भी निविदा प्रक्रिया में शामिल कर लिया, जिन्होंने सरकार के पूर्व आदेश के विरुद्ध चार अन्य हेलीपैड बना दिए थे।

याचिकाकर्ता ने इस टेंडर प्रक्रिया को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। याचिकाकर्ता ने मामले में यूनियन ऑफ इंडिया,उत्तराखंड सिविल एविएशन डेवलपमेंट अथॉरिटी(उकाडा), डीएम रुद्रप्रयाग, एसडीएम ऊखीमठ सहित हेली कंपनियों देवदर्शन, सोना, पंचकेदार व तूरिया हेली को भी पक्षकार बनाया था।

सरकार की ओर से कहा गया कि आल वेदर रोड निर्माण के चलते अनेक हेलीपैड प्रभावित हुए हैं इसलिए क्षेत्र में अन्य हेलीपैड भी आवश्यक हैं। उकाडा की ओर से  कहा गया कि निविदा प्रक्रिया नॉन शेड्यूल ऑपरेटर परमिट होल्डर के लिए थी तथा याची अधिकृत नहीं है । सुनवाई के बाद कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।

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