कोर्ट ने एम्स से कहा रोगियों को बढ़ा हुआ शुल्क वापस करें, क्या है पूरा मामला जानें यहां...
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नैनीताल हाईकोर्ट ने एम्स (ऋषिकेश) को रोगियों की आर्थिक स्थिति को देखते हुए ही उपचार शुल्क वसूलने का निर्देश दिया है।
इसी के साथ कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति मनोज तिवारी की खंडपीठ ने एम्स को बढ़ा हुआ शुल्क प्रभावित रोगियों को वापस करने का भी आदेश दिया।
एम्स ऋषिकेश ने अक्तूबर 2017 में केंद्रीय स्वास्थ्य योजना (सीजेएचएस) से संबंधित उपचार शुल्क लागू किया था। यह शुल्क दिल्ली एम्स की तुलना में कई गुना अधिक था।
दिल्ली एम्स की तर्ज पर ही शुल्क वसूला जाना चाहिए
लोगों का कहना था कि दिल्ली एम्स की तर्ज पर ही शुल्क वसूला जाना चाहिए। बायोप्सी का शुल्क एम्स ऋषिकेश में करीब पांच हजार रुपये हो गया है, जबकि एम्स दिल्ली में यह मात्र 250 रुपये हैं। लोगों के विरोध के बाद यह शुल्क वृद्धि वापस ले ली गई थी।
फिर भी लोगों को आशंका थी कि भविष्य में एम्स फिर से उपचार शुल्क में इजाफा कर सकता है। इसी आशंका के चलते वाराणसी निवासी प्रवीण कुमार सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी।
याची प्रवीण सिंह ने शुल्क वृद्धि के विरोध में नवंबर में एम्स ऋषिकेश में आमरण अनशन भी किया था। याची का कहना था कि एम्स में पर्वतीय क्षेत्रों से प्रतिदिन कई लोग उपचार के लिए आते हैं। शुल्क बढ़ाए जाने से इनको परेशानी का सामना करना पड़ेगा।