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उत्तराखंड हाईकोर्ट: 20 मार्च को डिलीवर की गई आईएफएस संजीव चतुर्वेदी की पोस्ट  

Sun, 05 Sep 2021 11:53 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल Published by: अलका त्यागी Updated Sun, 05 Sep 2021 11:53 PM IST
सार

डाक विभाग का यह शपथपत्र डीओपीटी की ओर से कोर्ट में पूर्व में दिए गए उस दावे से बिल्कुल ही अलग है जिसमें दावा किया गया था कि चतुर्वेदी का आवेदन नियत तारीख के बाद प्राप्त हुआ था।

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Uttarakhand High Court: IFS Sanjeev Chaturvedi post delivered on 20th March
नैनीताल हाईकोर्ट - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

कर्मचारी चयन आयोग( एसएससी) में सदस्य पद के लिए भारतीय वन सेवा के वरिष्ठ अधिकारी संजीव चतुर्वेदी की पोस्ट दिल्ली में कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) को 20 मार्च 2020 को दी गई थी। डाक विभाग ने इस आशय का शपथपत्र हाईकोर्ट में हाल में दिया है। 

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मामले में केंद्र सरकार के दो विभागों की ओर से कोर्ट में इस संबंध में जो शपथपत्र दिए गए हैं, वे एक दूसरे से बिल्कुल अलग और परस्पर विरोधी हैं। डाक विभाग का यह शपथपत्र डीओपीटी की ओर से कोर्ट में पूर्व में दिए गए उस दावे से बिल्कुल ही अलग है जिसमें दावा किया गया था कि चतुर्वेदी का आवेदन नियत तारीख के बाद प्राप्त हुआ था।
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इस वर्ष जनवरी में आईएफएस संजीव चतुर्वेदी ने एसएससी में सदस्य के पद के लिए चयन प्रक्रिया में अनियमितताओं का दावा करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इस पर कोर्ट की ओर से जारी नोटिस के जवाब में डाक विभाग ने यह शपथपत्र दिया है। मामले में केंद्र सरकार की ओर से आवेदन मांगे गए थे और पद के लिए आवेदन प्राप्त करने की अंतिम तिथि 23 मार्च, 2020 थी। 
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वर्तमान में हल्द्वानी में मुख्य वन संरक्षक, अनुसंधान विंग के रूप में तैनात चतुर्वेदी उन 16 उम्मीदवारों में शामिल थे, जिन्होंने इस पद के लिए आवेदन किया था। पूर्व में डीओपीटी ने मामले में अपने शपथपत्र में कहा था कि इस पद के लिए याचिकाकर्ता का उत्तराखंड सरकार की ओर से विधिवत अग्रेषित किया गया। आवेदन इस कार्यालय की केंद्रीय रजिस्ट्री में 29 मई 2020 को आवेदन की अंतिम तिथि के बाद प्राप्त हुआ था।

चतुर्वेदी की ओर से पूर्व में आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी के जवाब में बताया गया था कि चयन समिति की बैठक के कार्यवृत्त के अनुसार, उनका आवेदन डीओपीटी को निर्धारित तिथि के बाद 29 मई, 2020 को प्राप्त हुआ था और इस आधार पर इसे खारिज कर दिया गया। जबकि चतुर्वेदी ने स्पीड पोस्ट ट्रैकिंग रिपोर्ट की एक प्रति का हवाला देते हुए कोर्ट में दावा किया था कि उनका आवेदन डीओपीटी कार्यालय में 20 मार्च, 2020 को 23 मार्च, 2020 की अंतिम तिथि से काफी पहले प्राप्त हुआ था।


खास बात यह भी है कि मामले में उत्तराखंड सरकार ने कोर्ट को दिए शपथपत्र में कहा था कि इस पद के लिए याचिकाकर्ता के आवेदन पर राज्य सरकार द्वारा विज्ञापन में निर्धारित समय के भीतर स्वीकृति दी गई थी। चयन प्रक्रिया में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए चतुर्वेदी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर  भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह से योग्यता के आधार पर निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से आयोजित करने और सीबीआई को गड़बड़ी की जांच के लिए निर्देशित करने की मांग की थी।

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