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नैनीताल: पैसा जमा न करने पर तीन पूर्व सीएम और प्रमुख सचिव के खिलाफ हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर

Thu, 13 Aug 2020 11:32 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल Published by: अलका त्यागी Updated Thu, 13 Aug 2020 11:32 PM IST
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Uttarakhand High Court : Contempt petition filed against three former CMs and Principal Secretary for not depositing money
- फोटो : फाइल फोटो

उत्तराखंड में पूर्व मुख्यमंत्रियों के कोर्ट के आदेशनुसार किराया व अन्य सुविधाओं का पैसा जमा नहीं करने पर रुलक संस्था ने तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों व प्रमुख सचिव के खिलाफ हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की है। मामले में आज (शुक्रवार) सुनवाई होगी।

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संस्था ने पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, रमेश पोखरियाल निशंक, भुवन चन्द्र खंडूरी व प्रमुख सचिव ओम प्रकाश के खिलाफ अवमानना याचिका दायर कर दी है। मामले में सुनवाई 14 अगस्त को होगी।
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संस्था ने पूर्व मुख्यमंत्री व महाराष्ट्र के राज्यपल भगत सिंह कोश्यारी को इस संबंध में संविधान के अनुछेद 361 में नोटिस भेजा है, क्योंकि उनके खिलाफ अवमानना याचिका दायर करने से पहले दो माह पहले सूचना देनी आवश्यक होती है।
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अभी उनके खिलाफ अवमानना याचिका दायर नहीं की गई है। कोर्ट ने मई 2019 में सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों से सरकारी आवासों का किराया व अन्य सुविधाओं का भुगतान 6 माह के भीतर करने को कहा था, लेकिन अभी तक उन्होंने भुगतान नहीं किया गया है।

डीईओ पर चार्ज फ्रेम, सरकार ने शपथपत्र देकर हाईकोर्ट को बताया 

हाईकोर्ट में हरिद्वार के जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) के पद के दुरुपयोग मामले में दायर जनहित याचिका पर बृहस्पतिवार को हुई। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने शपथपत्र पेश कर कोर्ट को अवगत कराया गया कि डीईओ पर चार्ज फ्रेम कर दिए गए हैं। सरकार ने बताया कि जांच में वह 18 मामलों में दोषी पाए गए हैं। जिसके बाद सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया है।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवि कुमार मलिमथ एवं न्यायमूर्ति एनएस धानिक की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार हरिद्वार निवासी पदम कुमार ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि जिला शिक्षा अधिकारी ब्रह्मपाल सैनी ने अपने पद का दुरुपयोग कर कई शिक्षकों को नियम विरुद्ध तरीके से लाभ पहुंचाया है। याचिकाकर्ता का कहना था कि वे नियमावली के विरुद्ध अपने गृह जनपद में कार्यरत हैं।

इसकी शिकायत उन्होंने राज्य सरकार तथा जिलाधिकारी से की थी, जिसकी जांच भी हुई। जांच में उनके ऊपर लगाए गए आरोप सिद्ध हुए, लेकिन अभी तक उनके खिलाफ कोई विभागीय कार्यवाही नहीं की गई। मामले में राज्य सरकार ने शपथपत्र पेश कर कोर्ट को अवगत कराया कि डीईओ के खिलाफ चार्ज फ्रेम कर दिए गए हैं। सरकार ने इनको निलंबित कर दिया है।

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