उत्तराखंड: औद्योगिक निवेशक के लिए मैदान में भी हटेगी भूमि पर सीलिंग, विधेयक लाएगी सरकार
उत्तराखंड में औद्योगिक निवेशक के लिए अब प्रदेश सरकार मैदानी जनपदों में भी भूमि की सीलिंग हटाने की तैयारी में है। सरकार ने पर्वतीय क्षेत्रों में उद्योगों को चढ़ाने के लिए वहां भूमि की सीलिंग को पहले ही खत्म कर दिया है। इसके लिए सरकार ने उत्तराखंड (उत्तरप्रदेश जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम 1950)(अनुकूलन एवं उपांतरण आदेश, 2001) में संशोधन हो चुका है। अब सरकार मैदानी जनपदों के लिए भी ऐसा ही कानूनी संशोधन करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। इसके लिए वो आगामी विधानसभा सत्र में विधेयक भी ला सकती है। सूत्रों की मानें तो इंवेस्टर्स समिट के बाद निवेशकों ने प्रदेश सरकार से 1.24 लाख करोड़ रुपये के एमओयू साइन किए थे। लेकिन निवेश की राह में सबसे बड़ी अड़चन प्रदेश में भूमि की उपलब्धता है।
आदर्श चुनाव आचार संहिता के बाद हो सकता है निर्णय
प्रदेश सरकार आदर्श चुनाव आचार संहिता समाप्त हो जाने के बाद भूमि पर लगी सिलिंग हटाने का फैसला ले सकती है। सरकार निवेश की राह में भूमि की उपलब्धता की राह में सभी तरह की रुकावटों को जल्द से जल्द समाप्त कर देना चाहती है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का भी इस बात पर पूरा जोर है कि निवेश के लिए हुए एमओयू को शीघ्रता से जमीन पर उतारा जा सके।
पहाड़ नहीं चढ़ना चाहते निवेशक
प्रदेश सरकार ने निवेशकों को पहाड़ चढ़ाने के लिए बेशक भूमि पर लगी सीलिंग हटाने का फैसला लिया। लेकिन ज्यादातर निवेशकों की रुचि पहाड़ के बजाय राज्य के देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और नैनीताल की तराई में उद्योग स्थापित करने की है। उद्योग विभाग में निवेश के ऐसे कई प्रस्ताव लंबित हैं, जो मैदानी जनपदों में स्थापित होने हैं, लेकिन उनकी स्थापना के लिए 12.50 एकड़ से अधिक की भूमि की आवश्यकता है।
इन सेक्टरों में भूमि चाहते हैं निवेशक
निवेशक प्रदेश के देहरादून, हरिद्वार, यूएस नगर, नैनीताल की तराई में पर्यटन, चिकित्सा, चिकित्सा शिक्षा, सोलर इनर्जी व एग्रो इंडस्ट्री में निवेश के लिए12.50 एकड़ से अधिक भूमि चाहते हैं।
प्रदेश में भूमि की स्थिति
भूमि का प्रकार भूमि(हैक्टेयर में)
वन 3799953
शुद्ध बोया गया क्षेत्र 701030
ऊसर 228016
गैर खेती भूमि 222173
कृषि योग्य बेकार भूमि 316898
वृक्ष, बाग बगीचे 389183
कुल परती भूमि 142921
चारगाह, झाड़ियां 192098
अधिनियम में हो चुके हैं ये संशोधन
प्रदेश के मैदानी और तराई इलाकों में भूमि के संबंध में प्रदेश सरकारों ने समय पर भी उत्तराखंड(उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम 1950)(अनुकूलन एवं उपांतरण आदेश, 2001) में पूर्व मुख्यमंत्री बीसी खंडूड़ी ने प्रदेश के मैदानी और तराई क्षेत्र में आवास के लिए भूमि खरीद की सीमा को 500 वर्ग मीटर से घटाकर 250 वर्ग मीटर कर दिया था। इसके बाद मौजूदा सरकार ने औद्योगिक निवेश के लिए पर्वतीय क्षेत्रों में भूमि सीलिंग को हटाया।