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सरकार मुफ्त नहीं देगी एमडीडीए को जमीन
अनिल चन्दोला/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 04 Sep 2016 10:59 AM IST
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हरीश रावत
- फोटो : Self
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रिवर फ्रंट डेवलपमेंट योजना के तहत नदियों के किनारे की जमीन एमडीडीए को मुफ्त में नहीं मिलेगी। प्राधिकरण केवल इन जमीनों के केयर टेकर के तौर पर ही काम कर सकेगा। किसी भी तरह के निर्माण के बाद उसे बेचते समय ओनरशिप ट्रांसफर होने की दशा में प्राधिकरण को जमीन की पूरी कीमत सरकार को अदा करनी पड़ेगी।
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नदियों के सुंदरीकरण और किनारों से अतिक्रमण हटाने को लेकर सरकार रिवर फ्रंट डेवलपमेंट योजना चला रही है। इसके तहत रिस्पना और बिंदाल समेत अन्य नदियों को चैनलाइज कर उसके किनारे की जमीन को समतल किया जाएगा। बाद में इस जमीन पर आवासीय परियोजनाएं, व्यावसायिक कांप्लेक्स व अन्य निर्माण किए जाएंगे।
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राजधानी में एमडीडीए ने योजना के तहत नदियों को चैनलाइज करने का काम भी शुरू कर दिया है। जिसके तहत प्राधिकरण को करीब 1200 बीघा जमीन मिली है। इसमें पटेलनगर क्षेत्र की नगर निगम के स्वामित्व में रही करीब 140 बीघा जमीन भी शामिल है। यह भूमि बिना सूचित किए एमडीडीए को देने पर निगम ने विरोध भी जताया था।
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सरकार ने यह जमीन एमडीडीए को दी भले ही हो लेकिन केवल देख-रेख करने भर के लिए। यहां किसी भी तरह का निर्माण करने के बाद प्राधिकरण अगर उसे बेचता है तो मैनेजमेंट ट्रांसफर करना होगा। जिसके लिए एमडीडीए को ओनरशिप ट्रांसफर भी करना पड़ेगा। ऐसी दशा में प्राधिकरण को जमीन की पूरी कीमत सरकार को अदा करनी होगी। अभी तक यही माना जा रहा था कि प्राधिकरण को रिवर फ्रंट डेवलपमेंट योजना की जमीन मुफ्त दी जा रही है।
इंदिरा मार्केट की जमीन भी मुफ्त नहीं
एमडीडीए को इंदिरा मार्केट रिडवलपमेंट के लिए मिलने वाली जमीन की पूरी कीमत भी सरकार को अदा करनी होगी। सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं में शामिल रहे इस रिडवलपमेंट प्लान के क्रियान्वन में करोड़ों रुपये का खर्च आना है। प्राधिकरण को जमीन अपने पक्ष में फ्री होल्ड कराने के लिए उसका शुल्क देना होगा। प्लान के लिए लगभग 20 हजार वर्ग मीटर भूमि की जरूरत है।
एमडीडीए के प्रबंधन में जमीन होने से जनहित की तमाम सरकारी योजनाओं के लिए भूमि की कमी नहीं होगी। हमें केवल जमीनों के प्रबंधन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। भविष्य में सरकार जो भी निर्णय लेगी, उसके अनुसार ही कार्रवाई की जाएगी।
- पीसी दुमका, सचिव, एमडीडीए