Uttarakhand: प्रदेश की 14 जल विद्युत परियोजनाओं के लिए सुप्रीम कोर्ट जाएगी सरकार, पढ़ें क्या है पूरा मामला
सोमनाथन समिति की रिपोर्ट आने के बाद अब सरकार भी पांच के बजाय 14 परियोजनाओं के निर्माण की मंजूरी के लिए सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखने जा रही है।
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गंगा व सहायक नदियों पर प्रस्तावित 14 जल विद्युत परियोजनाओं को निर्विवाद मानते हुए मंजूरी की मांग को लेकर सरकार सुप्रीम कोर्ट जाएगी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गठित कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन की समिति ने अपनी रिपोर्ट में पांच परियोजनाओं को ही लाभकारी करार दिया है। अब सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर सबकी निगाहें टिकी हैं। यूजेवीएनएल के एमडी डॉ. संदीप सिंघल ने बताया कि सोमनाथन समिति की रिपोर्ट आने के बाद अब सरकार भी पांच के बजाय 14 परियोजनाओं के निर्माण की मंजूरी के लिए सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखने जा रही है।
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समितियां बनती गईं, परियोजनाओं पर ठोस परिणाम का इंतजार
- पर्यावरणविद् रवि चोपड़ा की पहली समिति ने 2014 में हाइड्रो प्रोजेक्ट से आपदा बढ़ने की आशंका जताते हुए 24 परियोजनाओं को आगे न बढ़ाने की सिफारिश की।
- छह परियोजनाओं पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने 2015 में आईआईटी-कानपुर के विनोद तारे की अध्यक्षता में दूसरी समिति बनाई। इसने पाया कि जिन परियोजनाओं को मंजूरी मिली है उनसे गंभीर पर्यावरणीय प्रभाव पड़ेंगे।
- 2020 में इंजीनियर बीपी दास की अध्यक्षता में गठित तीसरी समिति ने 28 परियोजनाओं को मंजूरी की सिफारिश की। हालांकि केंद्र ने 2021 में 28 में से सिर्फ सात को ही मंजूरी दी।
- इस साल आठ अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ सात परियोजनाओं को ही मंजूरी देने पर केंद्र से जवाब मांगा था। साथ ही बीपी दास समिति की रिपोर्ट पर दोबारा विचार करने के लिए कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समिति का गठन किया था। इस समिति ने आठ नवंबर को सुप्रीम कोर्ट को अपनी रिपोर्ट सौंपते हुए पांच परियोजनाओं को आगे बढ़ाया है। समिति ने माना कि इन परियोजनाओं और भूस्खलन के बीच स्पष्ट सबूत नहीं है। वैसे तो इन परियोजनाओं के प्रतिकूल प्रभाव हो सकते हैं लेकिन समिति ने इन्हें लाभकारी मानते हुए मंजूरी को राष्ट्रहित में जरूरी करार दिया है।