उत्तराखंड: जमरानी बांध के लिए अब एआईआईबी से धनराशि जुटाएगी सरकार, खर्च होंगे 2584 करोड़ रुपये
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जमरानी बहुउद्देशीय बांध निर्माण के लिए धनराशि जुटाने की कोशिश में प्रदेश सरकार ने अब एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर एंड इंवेस्टमेंट बैंक (एआईआईबी) से बाह्य सहायता के रुप में फंड जारी कराने की मांग केंद्रीय वित्त मंत्रालय से की है। कुमाऊं में जमरानी बांध के साथ ही देहरादून में साैंग बांध के निर्माण में पुनर्वास मामलों के लिए अलग-अलग कमेटी का गठन भी कर दिया गया है।
प्रदेश सरकार जमरानी बांध को राष्ट्रीय परियोजना घोषित कराने की कोशिश कर रही है। यह तय किया जा चुका है कि केंद्र सरकार के सामने इस मांग को उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश संयुक्त रूप से उठाएंगे। केंद्रीय जल आयोग इस बांध की लागत को करीब 2584 करोड़ रुपये बता चुका है। प्रदेश सरकार को उम्मीद है कि राष्ट्रीय परियोजना घोषित होने पर प्रदेश सरकार को निर्माण लागत में राहत मिल जाएगी।
केंद्र सरकार से अभी तक कोई ठोस आश्वासन न मिलने पर अब प्रदेश सरकार ने बाह्य सहायता से फंड जुटाने की कोशिश की है। इसके लिए सिंचाई विभाग ने फरवरी माह से ही कोशिश शुरू कर दी थी और जल शक्ति मंत्रालय की सलाहकार समिति के हुई बैठक में इस पर सहमति भी ले ली थी।
सोमवार को सचिव सिंचाई भूपेंदर कौर औलख ने नीति आयोग के सलाहकार अविनाश मिश्रा को पत्र लिखकर इस परियोजना को बाह्य सहायता के लिए केंद्रीय वित्त मंत्रालय को भेजने का आग्रह किया है। सचिव का कहना है कि बाह्य सहायता एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर एंड इंवेस्टमेंट बैंक से ली जा सकती है।
वित्त मंत्रालय के अधीन आर्थिक मामलों के विभाग की वेबसाइट पर प्रस्ताव और जल शक्ति मंत्रालय के साथ हुई बैठक का कार्यवृत्त भी अपलोड कर दिया गया है। इसी के साथ जमरानी और देहरादून में सौंग बांध के निर्माण के कारण होने वाले पुनर्वास से संबंधित मामलों को निपटाने के लिए अलग-अलग विशेषज्ञ समितियों का गठन भी कर दिया गया है।
जमरानी बांध के लिए 47 करोड़ भी जारी
शासन ने जमरानी बांध परियोजना के पर्यावरणीय अध्ययन में हुए व्यय, डूब क्षेत्र में सर्वे कार्य, परामर्शदात्री कंपनी के पर्यावरणीय अध्ययन, जल संग्रहण क्षेत्र में उपचार आदि के लिए 47.2928 करोड़ रुपये सिंचाई विभाग को जारी कर दिए हैं। सचिव सिंचाई ने सोमवार को जमरानी बांध और सौंग बांध के निर्माण कार्य की समीक्षा के बाद यह आदेश जारी किया।
जमरानी बहुउद्देशीय बांध परियोजना उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की पेयजल एवं सिंचाई समस्या को सुलझाने के हिसाब से महत्वपूर्ण है। इस परियोजना से उत्तराखंड में 9458 हेक्टेयर और उत्तर प्रदेश में 47607 हेक्टेयर क्षेत्र की सिंचाई हो पाएगी। इस बांध से बिजली भी बनेगी और हल्द्वानी को 117 एमएलडी पानी मिलेगा। बाह्य सहायता के लिए केंद्र को पत्र भेज दिया गया है।
- भूपेंदर कौर औलख, सचिव सिंचाई