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सैन्य कर्मियों की भलाई, लेकिन अर्द्ध सैनिकों को नहीं मिला कुछ
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 09 Jun 2015 11:36 AM IST
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अर्द्ध सैनिकों को सैन्य कर्मियों के समान लाभ देने के उत्तराखंड सरकार के दावे की पोल एक बार फिर खुल गई है।
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पिछले साल शिक्षामंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी ने फैसला लिया था कि सैन्य और अर्द्ध सैनिक बलों की शिक्षक पत्नियों को सुगम में तबादले की सुविध मिलेगी। लेकिन, शासनादेश में अर्द्ध सैनिक बलों का जिक्र ही नहीं है। हाल है देश के पहले ऐसे राज्य का है जहां सेना की भांति अर्द्धसैनिक बलों के परिवार के कल्याण के लिए अलग परिषद का गठन कर सरकार वाहवाही लूटी रही है।
जम्मू-कश्मीर में तैनात बीएसएफ के इंस्पेक्टर दिनेश सती की पत्नी अंबा सती शिक्षा विभाग में अध्यापिका हैं। अंबा दस वर्षों से कालसी में नागथात क्षेत्र के दुर्गम स्कूल में तैनात हैं। दिनेश सती परिवार की समस्याओं का हवाला देकर कई वर्षों से पत्नी की सुगम में तैनाती के लिए पत्राचार करते रहे हैं।
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बीते वर्ष जब शिक्षामंत्री ने सेना और अर्द्धसैनिक बलों में तैनात कर्मियों की शिक्षक पत्नियों को सुगम तैनाती देने का फैसला लिया तो उन्हें आस बंधी।
अब तबादला सीजन शुरू होते ही सती बड़ी मुश्किल से छुट्टी लेकर कश्मीर से दून पहुंचे तो उन्हें पता चला कि इसमें अर्द्धसैनिक बलों को शामिल नहीं किया गया है। शिक्षा विभाग की स्थानांतरण नियमावली में बीते वर्ष हुए संशोधन में सुगम में तबादले की सुविधा सिर्फ सैनिकों की शिक्षक पत्नियों को दी गई है।
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सेना और पैरामिलिट्री फोर्सेस के कार्मिकों की शिक्षा विभाग में तैनात शिक्षक पत्नियों को सुगम में तैनाती का लाभ देने का आदेश विभाग को बीते वर्ष कर दिया था। इसके आदेश शासन से जारी किए जा चुके हैं, अगर पैरामिलिट्री कार्मिकों को शामिल नहीं किया गया है तो उन्हें तुरंत कराया जाएगा।
- मंत्री प्रसाद नैथानी, शिक्षामंत्री
प्रदेश सरकार अर्द्धसैनिक बलों और पूर्व अर्द्धसैनिक बलों की अनदेखी कर रही है। अर्द्धसैनिक बलों को सेना के भांति लाभ देने के फैसले के बावजूद सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की। परिषद का गठन करने भर से अर्द्धसैनिक बलों का कल्याण नहीं हो सकता।
- एसएस कोठियाल, पूर्व आईजी बीएसएफ, प्रदेश अध्यक्ष, पूर्व केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल कार्मिक संगठन