उत्तराखंड सरकार ने दायित्वधारियों के ठाठबाट बढ़ाए, मानदेय हुआ दुगने से अधिक
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प्रदेश सरकार ने 75 से अधिक दायित्वधारियों के ठाटबाट बढ़ा दिए हैं। उनके मानदेय में दुगने से अधिक बढ़ोतरी कर दी गई है। साथ ही उनके आवास व टैक्सी किराये में भी वृद्धि की है। मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह के निर्देश पर संयुक्त सचिव गोपन ओमकार सिंह ने मंगलवार को इस संबंध में शासनादेश जारी किया।
प्रदेश सरकार ने विभिन्न निगमों, बोर्डों, आयोगों और समितियों में कैबिनेट मंत्री स्तर के आठ, राज्यमंत्री के स्तर 23 व अन्य दायित्वधारियों की अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पदों पर नियुक्ति की थी। नियुक्ति के बाद से ही महानुभावों का सरकार पर मानदेय और अन्य भत्तों में बढ़ोतरी का जबर्दस्त दबाव था। शासनादेश में प्रावधान न होने के कारण कई महानुभाव अपना कार्यालय तक नहीं खोल पाए थे।
रविवार को मुख्यमंत्री के आवास पर दायित्वधारियों की एक बैठक में भी भत्तों में बढ़ोतरी का मुद्दा उठा था। मंगलवार को मुख्यमंत्री का अनुमोदन प्राप्त होने के बाद शासन ने सभी दायित्वधारियों के मानदेय में दोगुने से अधिक वृद्धि कर दी।
हर महीने अब इतना मिलेगा मानदेय
स्तर मिल रहा है जो मिलेगा
मंत्री 20,000 45,000
राज्य मंत्री 15,000 40,000
अन्य दायित्वधारी 13,000 35,000
अब प्रतिमाह 60 हजार मिलेगा टैक्सी किराया
मंत्री, राज्यमंत्री व अन्य दायित्वधारी महानुभावों को सरकार प्रतिमाह वाहन, वाहन चालक, गाड़ी की मेंटेनेंस और ईंधन के खर्च के रूप में 60 हजार रुपये देगी। अभी तक 50 हजार रुपये महीना दे रही थी। यदि महानुभाव खुद का वाहन इस्तेमाल करेंगे तो उन्हें 40 हजार रुपये प्रतिमाह धनराशि दी जाएगी।
65 फीसदी बढ़ाया आवास व कार्यालय भत्ता
सरकार ने महानुभावों के आवास और कार्यालय भत्ते को एक करके उसमें 65 फीसदी की बढ़ोतरी की है। सरकारी आवास न मिलने पर अभी मंत्री स्तर के महानुभाव को सरकार हर महीने 15 हजार और राज्यमंत्री अन्य दायित्वधारियों को 10 हजार रुपये दे रही है। अब सभी महानुभावों के लिए इसे बढ़ाकर प्रतिमाह 25 हजार रुपये कर दिया गया है। उन्हें ये भत्ता कार्यालय सह आवास के एवज में दिया जाएगा।
दफ्तर है आवास नहीं तो मिलेंगे 15 हजार महीना
सरकार ने महानुभावों को यह सुविधा भी प्रदान की है कि यदि उनके पास सरकारी कार्यालय है लेकिन आवास नहीं है तो उन्हें आवास के लिए हर महीने 15 हजार रुपये भत्ते के रूप में मिलेंगे। यदि महानुभाव को सरकारी आवास मिला है और दफ्तर नहीं है तो कार्यालय भत्ते के रूप में उन्हें 10 हजार रुपये महीना दिया जाएगा।