भूल सुधारेगी सरकार, शिल्पकार उपजातियों की अधिसूचना रद्द करने की तैयारी
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प्रदेश सरकार शिल्पकार जाति में शामिल की गईं 47 उपजातियों को लेकर जारी अधिसूचनाओं को निरस्त कर सकती है। पूर्व सरकार में ये अधिसूचनाएं जारी हुई थीं। मगर अधिसूचनाओं को लेकर हुई शिकायतों के बाबत न्याय विभाग ने सरकार को जो परामर्श दिया है, उससे खलबली मची है।
न्याय विभाग के परामर्श के मुताबिक, प्रदेश सरकार को अनुसूचित जाति की सूची में उपजातियों को शामिल करने का संवैधानिक अधिकार नहीं था। न्याय विभाग ने अधिसूचनाओं को निरस्त करने का परामर्श दिया है। विभाग असमंजस में है और प्रकरण की फाइल अपर मुख्य सचिव, समाज कल्याण डॉ. रणवीर सिंह के पास पहुंची है। उनके मुताबिक, पूरे प्रकरण के अध्ययन के उपरांत ही निर्णय लिया जाएगा।
कायदे से अनुसूचित जाति का दर्जा देने का अधिकार केंद्र सरकार को है। इसके लिए देश की संसद में बाकायदा प्रस्ताव पारित होता है। राज्य सरकार को इसका एक प्रस्ताव केंद्र को भेजना था। मगर वर्ष 2013 में पूर्व सरकार में तत्कालीन प्रमुख सचिव, समाज कल्याण एस. राजू ने 16 दिसंबर 2013 को पहली अधिसूचना जारी की, जिसमें 38 उपजातियों को शिल्पकार जाति में शामिल किया गया। उसके बाद 30 जनवरी 2014 को नौ उपजातियों को सूची में शामिल करने की दूसरी अधिसूचना जारी की। मजेदार बात यह है कि इनमें से कई जातियां अनुसूचित जाति की श्रेणी में पहले से शामिल थीं। ऐसे में कतिपय उपजातियों को लेकर अधिसूचनाएं जारी करने के औचित्य पर सवाल उठ रहे हैं।
क्या है गोलमाल, जानिए...
- उत्तराखंड में शिल्पकार नाम की अलग से कोई जाति न होकर शिल्पकार एक समूह है।
- लोहार ,सोनार, दर्जी, गद्दी केवट, धुनार, ताम्रकार, मिस्त्री को शिल्पकार की सूची में शामिल होने चाहिए।
- शिल्पकार जाति के इन लोगों को अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र प्राप्त करने में प्रशासनिक कठिनाई से बचाना है।
शिल्पकार की सूची में दर्ज उपजातियां
आगरी या अगरी, औजी या बाजगी या ढोली, दास, दर्जी, अटपहरिया, बादी या बेड़ा बेरी या बैरी, बखरिया, बढ़ई, बोरा, भाट, भूल, तेली, चनेला या चन्याल, चुनेरा, चुनियारा, डालिया, धलोटी, धनिक, धोनी, धुनिया, ढौड़ी या ढोंडिया, कोल्टा, होबियारा, हुड़किया, मिरासी, जागरी या जगरिया, जमारिया, कोली, कुम्हार, लोहार, ल्वार, राज, ओड, मिस्त्री, नाई, नाथ या जोगी, पहरी या प्रहरी, पातर, रौन्सल, रुडिया या रिंगालिया, सिरडालिया, सुनार या सोनार, टम्टा, तमोटा, ताम्रकार, तिरुवा, तूरी, आर्य-शिल्पकार, पार्की, सांगडी, धुनार, केवल, डोम, मौर, पोरी, पम्मी व दमाई।
एससी हैं, मगर प्रक्रिया गलत
केंद्र सरकार की अनुसूचित जाति की सूची में 65 जातियों का उल्लेख है। 64वें स्थान पर शिल्पकार जाति है। लेकिन उत्तराखंड में शिल्पकार नाम की अलग से कोई जाति नहीं है। शिल्पकार जातियों का एक समूह है, जिसमें विभिन्न जातियां आती हैं। सूत्रों की मानें तो राज्य सरकार गलती सुधारने के लिए अधिसूचना निरस्त कर सकती है और फिर उपजातियों को एससी शिल्पकार की श्रेणी में शामिल करने के लिए प्रस्ताव को केंद्र सरकार को भेज सकती है।
मामले में समाज कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव डा. रणवीर सिंह का कहना है कि प्रकरण मेरे संज्ञान में हैं। न्याय विभाग ने अधिसूचना निरस्त करने का परामर्श दिया है। मगर में पूरे प्रकरण का अध्ययन करने के बाद ही निर्णय लूंगा। यह प्रश्न भी है कि जिन जातियों के लोगों को प्रमाण पत्र जारी हो रहा था, उन्हें किन कारणों से उपजातियों की सूची में शामिल करने की आवश्यकता पड़ी?