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बजट पारित होते ही हरकत में आई उत्तराखंड सरकार

Sun, 24 Jul 2016 10:29 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 24 Jul 2016 10:29 AM IST
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uttarakhand government active after budget passed in assembly
- फोटो : पीटीआई

आखिरकार विनियोग विधेयक पारित होने के साथ ही उत्तराखंड सरकार और नौकरशाही हरकत में आ गई है। केंद्र से बजट की मंजूरी मिलने के बाद विकास योजनाओं को गति दी जा सके, इसके लिए मुख्यमंत्री हरीश रावत ने शनिवार को अवकाश होने के बावजूद मुख्य सचिव समेत आला अधिकारियों के साथ बैठक कर बजट खर्च करने को लेकर रणनीति तय की।

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बैठक में निर्णय लिया गया कि 31 जुलाई तक तमाम विभागों को बजट से जुड़ी गाइड लाइन उपलब्ध करा दी जाए। सभी विभाग सात अगस्त तक विभिन्न विकास योजनाओं पर होने वाले खर्च का ब्यौरा वित्त विभाग को मुहैया करा दें। इसके बाद वित्त विभाग 15 अगस्त तक सभी विभागों को बजट जारी कर देगा।
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मुख्यमंत्री ने अफसरों से कहा कि चूंकि बजट बहुत देरी से आवंटित हो रहा है और तमाम विकास योजनाएं पहले भी कई माह पीछे छूट गई हैं, ऐसे में प्रस्तावों को तैयार करने और बजट आवंटित करने में किसी भी प्रकार की कोताही न बरती जाए। कहा कि प्रमुख सचिव, सचिव अपने विभागों से संबंधित कार्यों के लिए केंद्र सरकार के विभागों से सीधे बात करें, ताकि बिना समय गंवाए वहां से मिलने वाला धन मिल सके।
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इतना ही सरकार को चुनावी आचार संहिता का भी डर सता रहा है। मुख्यमंत्री रावत ने साफ शब्दों में अफसरों से कहा कि संभावित आचार संहिता को देखते हुए तमाम कार्यों को तेजी से पूरा किया जाए। खुद को ‘चीफ मिनिस्टर इन हरी’ बताते हुए कहा कि वक्त कीमती है, ऐसे में बजट से जुडे़ किसी भी प्रकरण का त्वरित निस्तारण किया जाए।

सीएम ने नौकरशाहों, विभागाध्यक्षों से कहा कि केंद्र सहायतित योजनाओं की मानीटरिंग वह खुद करेंगे। जहां तक राज्यांश का सवाल है तो उसकी कतई चिंता न करें। राज्यांश किसी भी सूरत में मुहैया कराया जाएगा। बजट के इस्तेमाल में किसी भी प्रकार देरी न हो, इसके लिए मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को भी मानीटरिंग की जिम्मेदारी सौंप दी है।

मुख्य सचिव प्रतिदिन अपने स्तर पर मानीटरिंग करेंगे। इसके लिए यदि किसी भी विभाग को बजट आवंटित होने पर कोई दिक्कत है तो मुख्य सचिव को सीधे शिकायत दर्ज कराई जा सकेगी। इसके अलावा मुख्य सचिव सोमवार, बुधवार को अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे।

दूसरी ओर बीजापुर गेस्ट हाउस में मीडिया कर्मियों से रूबरू मुख्यमंत्री ने कहा कि विधानसभा सत्र राज्य के लिए काफी उपयोगी रहा है। विनियोग विधेयक के माध्यम से हम राज्य का खोया बजट वापस लाने में सफल रहे हैं। बजट की मंजूरी के लिए राज्यपाल डॉ. कृष्णकांत पाल का भी आभार जताया। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली का आभार जताते हुए कहा कि वित्तीय मामलों को लेकर अब हमारी चिंताएं खत्म हो गई हैं।

वित्त मंत्री जेटली ने भी उनकी वित्तीय दिक्कतों को लेकर सहमति जताई थी। एक सवाल के जवाब में कहा कि उन्होंने अपनी विनम्रता से केंद्र के साथ रिश्ते सुधारे। कहा कि वित्तीय उपयोग की रिपोर्ट केंद्र सरकार को समय पर उपलब्ध हो इसकेे लिए मुख्य सचिव को निर्देशित किया गया है। मुख्य सचिव सोमवार, बुधवार को अंतर मंत्रालयी मामलों को भी सुलझाएंगे। यह पूछे जाने पर कि चुनावी साल होने के कारण अधिकारी विकास कार्यों को लंबित रख आचार संहिता का इंतजार करते रहते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पर उनकी पैनी नजर रहेगी।


उल्लेखनीय है कि विनियोग विधेयक को लेकर विवाद की स्थिति होने की वजह से राज्य में गंभीर वित्तीय संकट खड़ा हो गया था। विनियोग विधेयक पारित कराने को लेकर सरकार को विधानसभा का दो दिवसीय विशेष सत्र बुलाना पड़ा। सत्र के दौरान विपक्षी भाजपा की गैरमौजूदगी में सत्ता पक्ष ने विधेयक को पारित कर राज्यपाल के पास भेजा था। आखिरकार राज्यपाल ने बजट को अपनी मंजूरी देने के साथ ही केंद्र के पास भेज दिया है।

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