उत्तराखंडः राज्यपाल ने नेता प्रतिपक्ष को दिखाया 'आईना'
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राजधानी देहरादून में उत्तराखंड के राज्यपाल डा. अजीज कुरैशी ने नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट की राजभवन की निष्पक्षता पर उंगली उठाने के बयान को गलत और निराधार बताया है।
दरअसल कृषि मंत्री हरक सिंह रावत के दोहरे लाभ के पद पर आसीन होने संबंधी प्रकरण पर अजय भट्ट ने राजभवन की कार्यप्रणाली पर मीडिया में बयान दिया है।
राज्यपाल ने नेता प्रतिपक्ष के सवालों के उत्तर में उन्हें तमाम पुरानी घटनाएं भी याद दिलाई हैं जिस पर भट्ट ने गुहार लगाई थी।
राज्यपाल ने कहा है कि अप्रैल 2013 को भारतीय जनता पार्टी के प्रतिनिधि मंडल, मई 2013 को पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक और फिर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष तीरथ सिंह रावत ने कृषि मंत्री हरक सिंह रावत के दोहरे लाभ के पद पर आसीन होने संबंधी ज्ञापनों को राजभवन ने तुरंत ही अग्रिम कार्यवाही के लिए दिया था।
भट्ट की मांग पर जांच करने की हिदायत
राज्यपाल ने भट्ट को याद दिलाते हुए कहा कि दो वर्षों में जो भी मुद्दे आए, उन पर त्वरित कार्यवाही के आदेश दिए गए हैं।
दो प्रमुख घटनाएं उन्हीं से ही संबंधित हैं। एक बार भाजपा विधायक की गिरफ्तारी आदेश के प्रकरण पर आधी रात में भट्ट ने दिल्ली पहुंचकर इस संबंध में हस्तक्षेप का निवेदन किया तो तत्काल भट्ट के प्रत्यावेदन पर त्वरित कार्यवाही कर विधायक की गिरफ्तारी रोकने के निर्देश तत्कालीन मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा को दिए थे। भट्ट की मांग पर पूरे प्रकरण को सीबीसीआईडी को स्थानातरित कर जांच करने की हिदायत दी।
दूसरी घटना हाल ही पंचायत चुनावों के दौरान चंपावत में भाजपा की एक महिला प्रत्याशी के साथ दुर्व्यवहार की है।
दिल्ली प्रवास के दौरान भट्ट ने मध्यरात्रि में दूरभाष पर शिकायत का गंभीर संज्ञान लेते हुए उनके द्वारा रात को ही 15 मिनट के अंदर उत्तराखंड शासन के मुख्य सचिव एवं पुलिस महानिदेशक को इस संबंध में कड़ी कार्यवाही करने के निर्देश दिए थे। यह अलग बात है कि वह शिकायत निराधार साबित हुई।
त्वरित कार्यवाही करने के दिए थे निर्देश
इसके अतिरिक्त जब भी किसी भी प्रकार की शिकायत की, चाहे विधायक के अपहरण के बारे में हो चाहे एक विधायक के परिवार के सदस्यों की जान का खतरा बताकर उनके संरक्षण के बारे में हो।
अविलम्ब अधिकारियों को त्वरित कार्यवाही करने को निर्देशित किया। तत्कालीन सीएम की आपत्ति के बावजूद भी राज्यपाल ने अपने आदेशों पर कभी कोई संशोधन नहीं किया।
उल्लेखनीय है कि कृषि मंत्री हरक सिंह रावत के दोहरे लाभ के पद पर आसीन होने के प्रकरण पर राज्यपाल के निर्णय को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।
कोर्ट की एकल पीठ के नामंजूर किए जाने के बाद भट्ट ने उच्च न्यायालय की डबल बैंच में की गई अपील को भी उच्च न्यायालय ने नामंजूर करते हुए राज्यपाल के निर्णय पर अपनी मुहर लगाई थी।
वहीं इससे पहले भी दोहरे लाभ के पद के संबंध में इसी प्रकार के अध्यादेश तीन बार उत्तराखंड के पूर्व राज्यपालों द्वारा उत्तराखंड शासन ने जारी करवाये थे जिनमें से एक मरतबा कांग्रेस का शासन था और दो मरतबा भाजपा का शासनकाल था।