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उत्तराखंड: राज्यपाल के पास था वो गुर, जिससे बन गए हर किसी के मीत, अध्यात्म से आधुनिकता तक रहा पूरा जोर

Tue, 13 Oct 2026 05:00 AM IST
Alka Tyagi आफताब अजमत, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
आफताब अजमत, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: Alka Tyagi Updated Tue, 13 Oct 2026 05:00 AM IST
सार

लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत ने 15 सितंबर 2021 को पद संभाला था। इस साल जुलाई में उन्होंने उत्तराखंड के इतिहास में सबसे अधिक समय तक राज्यपाल रहने का रिकॉर्ड बनाया था।

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Uttarakhand Former Governor Gurmeet singh focus spanning everything from spirituality to modernity
राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि.) - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

उत्तराखंड के राज्यपाल के रूप में लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि.) ने अपने पांच वर्षों के कार्यकाल के दौरान देवभूमि की जनता के दिलों पर एक अमिट छाप छोड़ी। एक अनुशासित सैन्य कमांडर की कर्तव्यनिष्ठा और एक संवेदनशील अभिभावक के वात्सल्य का अनूठा संगम उनके व्यक्तित्व में झलकता था। यही वह खास गुर था, जिसने लोकभवन की औपचारिक सीमाओं को लांघकर उन्हें हर उत्तराखंडी का मीत बना दिया।

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उन्होंने 15 सितंबर 2021 को पद संभाला था। इस साल जुलाई में उन्होंने उत्तराखंड के इतिहास में सबसे अधिक समय तक राज्यपाल रहने का रिकॉर्ड बनाया था। 15 सितंबर को उनके कार्यकाल के पांच वर्ष पूरे हो गए थे। उन्होंने पांच मिशन रिवर्स पलायन, हॉर्टिकल्चर व ऑर्गेनिक फार्मिंग, महिला सशक्तीकरण, एआई व तकनीकी के साथ ही क्रांति (मौन पालन, अरोमा, होम स्टे, स्वयं सहायता समूह, मिलेट्स, स्टार्टअप) पर फोकस किया।
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सीमांत से सीधा संवाद और आमजन से जुड़ाव
लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि.) देश के प्रथम गांव माणा में रात्रि प्रवास करने वाले पहले राज्यपाल बने। वाइब्रेंट विलेज अभियान को धरातल पर उतारते हुए उन्होंने सीमांत गांवों में रहने वाले प्रहरियों के सुख-दुख को बेहद करीब से साझा किया। 57 में से 32 वाइब्रेंट विलेज में वे खुद भ्रमण करके आए। युवाओं का भविष्य संवारना हो, मातृशक्ति को आत्मनिर्भर बनाना हो या पूर्व सैनिकों के कल्याण की बात, वे हर वर्ग के लिए सदैव तत्पर रहे। उनके कार्यकाल में लोकभवन के द्वार आम जनता के लिए सहजता से खुले, जिससे लोकभवन सही मायनों में जन-आकांक्षाओं का केंद्र बना।
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उच्च शिक्षा में शोध और तकनीक का नया दौर
शिक्षा के क्षेत्र में उनकी दूरदर्शिता ने राज्य के विश्वविद्यालयों की दिशा बदल दी। उन्होंने वन यूनिवर्सिटी-वन रिसर्च की अभिनव पहल शुरू कराई, जिससे हर संस्थान किसी विशिष्ट क्षेत्रीय व वैश्विक समस्या के समाधान पर केंद्रित हुआ। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), उभरती तकनीकों और नवाचार को बढ़ावा देने के साथ-साथ उन्होंने देवभूमि को नशामुक्त बनाने के लिए प्रदेशव्यापी जन-जागरूकता अभियान को अपना मुख्य मिशन बनाया।

आधुनिक सोच, आध्यात्मिक अंतर्मन और संयुक्त प्रयास
वे जितने आधुनिक और तकनीक-समर्थक रहे, उतने ही गहरे आध्यात्मिक स्वभाव के धनी भी। हिमालय की सांस्कृतिक विरासत और देवभूमि की आस्था के प्रति उनका अनुराग सर्वविदित था। इस प्रेरणादायी यात्रा में उनकी धर्मपत्नी व प्रथम महिला गुरमीत कौर का योगदान भी उल्लेखनीय रहा। उन्होंने प्रदेशभर के स्वयं सहायता समूहों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सामाजिक मंचों पर उपस्थित होकर महिलाओं के हौसले और आत्मविश्वास को एक नई उड़ान दी। शिव के उपासक राज्यपाल ने लोकभवन में शिव का मंदिर भी बनवाया।

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