उत्तराखंड: सालभर रहेगा फायर सीजन, वनाग्नि बुझाने को होगी विशेष तैयारी, वन मंत्री ने जारी किया आदेश
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उत्तराखंड में अब फायर सीजन पूरे साल रहेगा। मतलब यह कि जंगलों की आग बुझाने के लिए सालभर फायर सीजन जैसी तैयारी और चौकसी रहेगी। वन मंत्री हरक सिंह रावत ने इसका प्रस्ताव बनाने को कहा है। वर्तमान में प्रदेश में 15 फरवरी से फायर सीजन शुरू होता है और 15 जून तक जारी रहता है।
प्रदेश में जंगल की आग की घटनाएं अधिकतर मानसून से पहले ही देखने को मिलती हैं। मानसून में बारिश के कारण चीड़ के जंगलों तक में आग के मामले सामने नहीं आते और सर्दियों में भी आग की घटनाएं कम हो जाती हैं। इसी के आधार पर जंगल की आग पर काबू पाने के लिए वन विभाग 15 फरवरी से 15 जून तक फायर सीजन मानता है।
वन मंत्री हरक सिंह के मुताबिक अब यह स्थिति नहीं रह गई है। सितंबर में भी जंगल में आग के मामले सामने आ रहे हैं। सर्दियों मेें जंगल की आग के बारे में कोई सोचता तक नहीं था और अब सर्दियों में भी जंगल धधक रहे हैं। यही देखते हुए वन विभाग को अब साल भर फायर सीजन के तहत काम करने को कहा गया है।
214 हेक्टेयर जंगल जला, 6.50 लाख रुपये का नुकसान
वन विभाग के मुताबिक फायर सीजन खत्म होने के बाद भी इस बार जंगलों मे आग की घटनाएं सामने आ रही हैं। कुल मिलाकर 175 घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इनमें से 125 मामले तो आरक्षित वन क्षेत्र के हैं। इन घटनाओं में 214 हेक्टेयर जंगल जलने और 6.50 लाख रुपये की संपदा के नुकसान का आकलन है।
संसाधन जुटाने का रहेगा संकट
वन विभाग चार माह के फायर सीजन में ही करीब 24 करोड़ रुपये का बजट खर्च करता है। छह हजार से ज्यादा फायर वाचर तैनात किए जाते हैं। इसके अलावा फायर लाइन बनाने, पेट्रोलिंग आदि पर भी खर्च होता है। वन अधिकारियों के मुताबिक साल भर के फायर सीजन में यह खर्च कई गुना बढ़ सकता है। साल भर के फायर सीजन में सबसे अधिक दबाव संसाधन जुटाने का ही रहेगा।
कैंपा से हो रही है व्यवस्था
संसाधनों के सवाल पर वन मंत्री हरक सिंह का कहना है कि फायर सीजन सिर्फ एक व्यवस्था है। फायर सीजन खत्म होने पर आग लग रही है तो विभाग के कर्मी उसे बुुझाते ही हैैं। कैंपा के तहत 10 हजार वन प्रहरियों की तैनाती की जा रही है। यह प्रस्ताव केंद्र को भेजा जा चुका है। इस पर सहमति मिलते ही वन कर्मियों की तैनाती की समस्या नहीं रह जाएगी।