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रेल बजटः ‘प्रभु’ से आशा, अब तो दूर करो निराशा

Thu, 25 Feb 2016 09:18 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 25 Feb 2016 09:18 AM IST
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uttarakhand expectation from rail budget 2016.

रेल बजट से दूनवासियों को काफी उम्मीदें हैं और इन उम्मीदों के पूरे होने की आशा भी। इसकी वजह उत्तराखंड से लोकसभा में पांच और राज्य सभा में एक सांसद केंद्र की सत्ताधारी पार्टी भाजपा से हैं। ऐसे में रेल मंत्री सुरेश प्रभु से लोगों की उम्मीदें लाजमी हैं।

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इन उम्मीदों में लंबे समय से पेंडिंग योजनाओं पर उचित कार्रवाई। इसके अलावा लोगों को रेल मंत्री सुरेश प्रभु के पिटारे से देहरादून के लिए कुछ और गाड़ियां निकलने की उम्मीद है। इसमें दून से जाने वाली जनता एक्सप्रेस का पूर्वांचल में रूट बढ़ने, गोरखपुर एक्सप्रेस का संचालन रोजाना करने, कुमाऊं के लिए दून से अतिरिक्त ट्रेन बढ़ने की उम्मीद है। इसी तरह हल्द्वानी, लखनऊ, इलाहाबाद, कानपुर, दिल्ली, पंजाब और दक्षिण भारत की तरफ गाड़ियों का रूट बढ़ने की उम्मीद लगाए हैं।
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दून स्टेशन के प्लेटफार्म की क्षमता बढ़े
दून स्टेशन का विस्तार न होने प्लेटफार्म की क्षमता अब भी कम हैं। इसके चलते दून तक 13 कोच से अधिक की ट्रेन सामान्यत: नहीं आ पाती। यात्रियों की संख्या अधिक होने के बावजूद कोच नहीं बढ़ाए जा सकते। उम्मीद है कि प्लेटफार्म की क्षमता बढ़ने की दिशा में रेल मंत्री के पिटारे से कुछ निकले।
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रेलवे रूट विकासनगर वाया सहारनपुर
देहरादून से वाया विकासनगर सहारनपुर रेल लाइन का प्रस्ताव कई साल से अधूरा पड़ा है। शिलान्यास से आगे इस पर बात नहीं बढ़ पाई है। अभी दून से हरिद्वार लक्सर होते हुए लंबी दूरी तय कर सहारनपुर जाना पड़ता है। विकासनगर से दूरी घटेगी और किराया भी कम पड़ेगा।

हिमाचल से सीधी रेल से जुड़ने की उम्मीद
रेल के जरिए उत्तराखंड और हिमाचल को सीधा जोड़ने की महत्वाकांक्षी योजना पर भी काम कागजी खानापूर्ति से आगे नहीं बढ़ पा रहा है। सामरिक महत्व के अलावा दोनों राज्यों में उद्यानिकी और कृषि आदि क्षेत्रों में व्यापार के लिहाज से भी यह महत्वपूर्ण है।

हरिद्वार-दून ट्रैक डबल होने की उम्मीद
रेल यात्रियों को उम्मीद है कि इस बार रेल मंत्री देहरादून से हरिद्वार रेल मार्ग को डबल लाइन करने की घोषणा भी कर देंगे। अभी सिंगल लाइन होने से हरिद्वार पहुंचने में दो घंटे से अधिक का वक्त लग जाता है।

दून-ऋषिकेश सीधी रेल लाइन पर भी उम्मीद
लोगों को उम्मीद है कि दून को सीधी रेल सेवा से तीर्थनगरी ऋषिकेश को जोड़ने के प्रस्ताव पर कुछ बात आगे बढ़ेगी। ताकि दून, सेलाकुई, मसूरी, विकासनगर के अलावा ऋषिकेश और उससे सटे क्षेत्रों के लोगों का सफर आसान हो सकेगा।

सामरिक लिहाज से सीमांत क्षेत्रों तक रेल लाइन जरूरी

uttarakhand expectation from rail budget 2016.

देश के हिमालयी राज्यों का 3500 किलोमीटर क्षेत्र चीन सीमा से सटा है। इसमें हिमाचल और उत्तराखंड का लगभग 500 किलोमीटर क्षेत्र भी शामिल है। उत्तराखंड में रेल सेवा अब भी चीन बार्डर से करीब 125 किलोमीटर पीछे है। कई तरफ तो यह दूरी और भी अधिक है। जबकि चीन अपनी सीमा से 11 किलोमीटर पहले तक रेल पहुंचा चुका है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, सीमावर्ती राज्यों में रेल सेवाओं के विस्तार के साथ ही हिमालयी राज्यों की आपस में कनेक्टिविटी भी सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। लोगों की भी मांग है कि पड़ोसी हिमालयी राज्य को सीधी रेल लाइन से जोड़ना आज के समय की सख्त जरूरत है। इसलिए लोग अबकी बजट से उम्मीद लगाए हैं।

देहरादून से विकासनगर, कालसी रेल मार्ग की मांग लंबे समय से होती रही है। यहां तक रेल मार्ग पहुंचने के बाद हिमाचल को भी राज्य से सीधी रेल सेवा से जुड़ने की दिशा में बात आगे बढ़ सकेगी। जानकारों के मुताबिक, इसी तरह पुरोला, नौगांव, मोरी बड़कोट, गंगोत्री लाइन पर काम होता है तो यहां से भी हिमाचल के लिए रेल पहुंचाई जा सकती है। रेलवे के पूर्व अफसर एनडी मिश्रा के मुताबिक, चाइना बार्डर तक रेल पहुंचानी तो सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है ही। चीन बार्डर से लगे पड़ोसी हिमालयी राज्यों की रेल कनेक्टिविटी भी बहुत जरूरी है।

रेल परियोजनाओं पर हो फोकस
लेफ्टिनेंट जनरल एमसी भंडारी (रि) ने बताया कि उत्तराखंड सीमा सामरिक लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। सीमांत क्षेत्रों तक रेल और सड़कों की पहुंच न केवल सामरिक बल्कि सीमांत क्षेत्रों के विकास के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। सीमा के दूसरी तरफ चीन बार्डर तक न केवल मल्टी लेन हाईवे बल्कि रेलवे ट्रैक तक पहुंचा चुका है। केंद्र को इस बजट में सीमांत रेलवे परियोजनाओं पर फोकस करना चाहिए।   

काश्तकारों को भी होगा फायदा
नवक्रांति स्वराज मोर्चा के आदित्य कोठारी के अनुसार, हिमाचल रेल मार्ग से पर्यटन, बागवानी आदि का व्यवसाय भी बढ़ेगा। इससे रोजगार के साधन बढ़ेंगे। पुरोला, उत्तरकाशी, जौनसार बावर क्षेत्र के सेब, टमाटर आदि बागवानी के काश्तकारों को अपने उत्पाद बाजार में पहुंचाने में आसानी होगी और उनके अच्छे दाम मिलेंगे।

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