चुनावी साल: उत्तराखंड के आठ बड़ी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को फंड का इंतजार
कुछ प्रोजेक्टों पर वित्तीय एजेंसियों की पूर्व में ही सैद्धांतिक मंजूरी तक मिल चुकी है। अभी तक आठ में से एक भी परियोजना के लिए वित्तीय एजेंसी से फंडिंग की अंतिम मंजूरी नहीं मिल सकी है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
उत्तराखंड में आठ बड़ी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को फंडिंग का इंतजार है। वाह्य सहायतित योजनाओं के तहत 9499 करोड़ की लागत की इन परियोजनाओं के लिए सरकार अंतरराष्ट्रीय वित्तीय एजेंसियों से फंड जुटाने की कोशिश कर रही है। लेकिन राज्य में बार-बार नेतृत्व परिवर्तन और कोविड-19 महामारी के चलते फंड जुटाने की कोशिशों की रफ्तार धीमी पड़ी है।
कुछ प्रोजेक्टों पर वित्तीय एजेंसियों की पूर्व में ही सैद्धांतिक मंजूरी तक मिल चुकी है। अभी तक आठ में से एक भी परियोजना के लिए वित्तीय एजेंसी से फंडिंग की अंतिम मंजूरी नहीं मिल सकी है। अब चुनावी साल मे राज्य सरकार ने परियोजनाओं की फंडिंग के लिए कसरत तेज कर दी है। केंद्रीय वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग से प्रोजेक्टों की पैरवी के लिए राज्य सरकार की ओर से लगातार पत्र भेजे जा रहे हैं।
प्रदेश में त्रिवेंद्र सरकार ने राज्य के विकास के लिए जमरानी बांध परियोजना, देहरादून और मसूरी बीच परिवहन अवस्थापना विकास, बागवानी विकास, राज्य के 16 आबादी बहुल नगरों में अवस्थापना विकास, टिहरी बांध और उसके जलागम क्षेत्र में विकास कार्यों समेत कुल आठ महत्वाकांक्षी परियोजनाओं के प्रस्ताव केंद्र सरकार की वाह्य सहायतित योजना के तहत भेजे थे।
राज्य सरकार की ओर से इन प्रोजेक्टों के लिए विदेशी वित्तीय एजेंसियों से फंड जुटाने का प्रयास हो रहा था। इनमें से कुछ परियोजनाओं के लिए सैद्धांतिक सहमति प्राप्त भी हो गई। लेकिन कोविड-19 महामारी के चलते केंद्र से लेकर राज्य तक सरकारी कामकाज प्रभावित हुआ। रही-सही कसर राज्य में हुए नेतृत्व परिवर्तन ने पूरी कर दी। मुख्यमंत्री बदलने का असर सरकार की प्राथमिकताओं पर पड़ा।
कोविड संक्रमण के चरम दौर में मुख्यमंत्री बने तीरथ सरकार का पूरा ध्यान कोविड से निपटने और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर रहा। अब पुष्कर सिंह धामी मुख्यमंत्री हैं और उन पर छह महीने के भीतर परफारमेंस का दबाव है। ऐसे में वाह्य सहायितत योजनाओं के लिए फंडिंग जुटाने को सरकार ने फिर से कोशिशें तेज कर दी हैं। लेकिन यदि कुछ परियोजनाओं के लिए फंडिंग जुटा भी ली गई तो उनकी वर्तमान सरकार में उनकी नींव ही रखी जा सकेगी।
चीन का कनेक्शन भी लेटलतीफी का कारण
वाह्य सहायतित योजनाओं वाले प्रोजेक्टों के लिए फंडिंग में देरी की एक वजह पड़ोसी देश चीन के साथ आर्थिक मामलों की नीति में नए बदलाव भी माना जा रहा है। राज्य सरकार ने एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक(एआईआईबी) से तीन बड़े प्रोजेक्टों के लिए फंडिंग के प्रस्ताव भेजे।
इस अंतरराष्ट्रीय वित्तीय एजेंसी का मुख्यालय बीजिंग में है। केंद्र सरकार ने राज्य सरकार को एआईआईबी से इतर दूसरी वित्तीय एजेंसी के लिए प्रस्ताव भेजने को कहा। राज्य सरकार ने फिर से नई एजेंसियों के प्रस्ताव भेजे। इसमें काफी समय जाया हुआ।
मंजूरी मिलती तो माहौल बनता
सियासी जानकारों का मानना है कि आठों प्रोजेक्ट के लिए प्रदेश सरकार यदि फंडिंग जुटा लेती तो विधानसभा चुनाव से पहले अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए उसके पास अच्छा मुद्दा होता।
ये हैं प्रोजेक्ट
प्रोजेक्ट - लागत - वित्तीय एजेंसी
जमरानी बहुउद्देश्यी पेयजल - 2584 - एडीबी
देहरादून-मसूरी परिवहन अवस्थापना - 1461 - एआईआईबी
एकीकृत बागवानी विकास - 251 - जीका
16 नगरों में अवस्थापना विकास - 1300 - एआईआईबी
टिहरी और जलागम क्षेत्र का विकास - 1200 - एनडीबी
हरित विकास प्रबंधन में नवाचार - 950 - एनडीबी
उत्तराखंड शहरी जल आपूर्ति - 1000 - एआईआईबी
ऊर्जा पारेषण सुदृढ़ीकरण एवं वितरण सुधार कार्यक्रम -753 -एडीबी
कुल - लागत - 9499
नोट: प्रोजेक्टों की लागत (करोड़ में)
कुछ परियोजनाओं पर वित्तीय एजेंसियों की सैद्धांतिक सहमति मिली है। आर्थिक मामलों के विभाग से पत्राचार चल रहा है। केंद्र सरकार ने कहा था कि वैकल्पिक एजेंसी के लिए प्रस्ताव भेजें। डीईए को लगातार लिखा जा रहा है।
- मनीषा पंवार, अपर मुख्य सचिव (नियोजन)