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उत्तराखंड में शिक्षा मंत्री के आदेश हवा-हवाई
अनिल चन्दोला/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 21 Jul 2017 10:38 AM IST
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arvind pandey
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अपनी तेजतर्रार कार्यप्रणाली और बेबाक बयानों को लेकर अक्सर सुर्खियों में रहने वाले शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय एक बार फिर चर्चाओं में हैं।
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इस बार चर्चा उनके हवा-हवाई ऐलानों को लेकर हो रही है। शिक्षा मंत्री ने पिछले एक पखवाड़े के दौरान दो बड़े ऐलान किए। लेकिन दोनों के आदेश आज तक जारी नहीं हो पाए हैं। इसके चलते शिक्षकों के साथ ही विभागीय कर्मियों में भी भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
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शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने छह जुलाई को विधानसभा स्थित अपने कक्ष में पत्रकारों से बातचीत करते हुए अशासकीय विद्यालयों की नियुक्ति प्रक्रिया पर रोक लगाने और मेरिट के आधार पर दोबारा नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा की थी। तब उन्होंने बताया कि अशासकीय विद्यालयों में नियुक्ति के नाम पर 25-25 लाख रुपये लिए जाने की जानकारी दी।
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करीब 15 दिन बीतने के बावजूद अभी तक इसका विधिवत आदेश नहीं हो पाया है। वहीं, 16 जुलाई को उन्होंने यमुना कॉलोनी स्थित अपने आवास में पत्रकारों से बातचीत करते हुए अनुरोध के आधार पर तबादलों की प्रक्रिया पर रोक लगाने की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि तबादलों के लिए बड़े स्तर पर शिक्षकों ने फर्जी प्रमाण पत्र बनाए हैं।
हालांकि ऐसे कितने मामले हैं या दोषियों के खिलाफ क्या एक्शन होगा, इसकी उन्होंने कोई जानकारी नहीं दी। चार दिन बीतने के बावजूद प्रक्रिया पर रोक संबंधी आदेश भी जारी नहीं हुआ है। आदेश जारी न होने के चलते शिक्षकों और विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
बैकडोर से न हों तबादले
तबादला प्रक्रिया पर का ऐलान होने के बावजूद आदेश जारी न किए जाने पर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। शिक्षक संगठन इस मामले में गुपचुप ढंग से विभागीय मंत्री पर भी उंगली उठाने लगे हैं। शिक्षकों के बीच चर्चा है कि रोक की बात केवल सामान्य शिक्षकों के लिए है। चहेते और पहुंच वाले शिक्षकों के लिए प्रक्रिया खुली है। यही कारण है कि इसका विधिवत आदेश जारी नहीं किया जा रहा है।
सचिव विद्यालयी शिक्षा पिछले काफी समय से गेस्ट टीचर्स वाले मामले में नैनीताल में व्यस्त रहे हैं। कोर्ट से हमारे पक्ष में फैसला आया है। अब सभी घोषणाओं के शासनादेश जारी किए जाएंगे।
-अरविंद पांडेय, शिक्षा मंत्री