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IT कंपनी बंद कर 'खेती' में जुटी उत्तराखंड की बेटी

Tue, 19 May 2015 08:30 AM IST
बिशन सिंह बोरा/ अमर उजाला, देहरादून
बिशन सिंह बोरा/ अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 19 May 2015 08:30 AM IST
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uttarakhand daughter left it company and choose farming.

उत्तराखंड में कई किसान खेती को घाटे का सौदा बताते हुए छोड़ रहे हैं तो युवा नौकरी के लिए पलायन कर रहे हैं। ऐसे में यहां की बेटी ने नजीर पेश की है।

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एक दशक से भी अधिक समय तक आईटी कंपनी चलाने वाली शिमला बाईपास रोड निवासी हिरेशा वर्मा ने मशरूम उत्पादन को करियर बनाया है। मेहनत, लगन के बूते हर माह करीब 9 लाख रुपए कमाई के साथ 25 युवाओं को रोजगार भी दे रखा है।
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प्रदेश में खासकर पहाड़ों से किसान खेती छोड़कर पलायन करते जा रहे हैं। गांव के गांव खाली हो गए हैं तो पुश्तैनी भवन खंडहर में तब्दील हो चुके हैं। ऐसे में दून की हिरेशा उनके लिए तरक्की की मिसाल हैं, जो खेती को घाटे का सौदा बताते हुए मुंह फेर रहे हैं।
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12 साल तक आईटी कंपनी चलाने वाली हिरेशा ने शौकिया तौर पर वर्ष 2010 में दून के सर्वेंट क्वार्टर में 25 बैग कंपोस्ट से मशरूम उत्पादन शुरू किया। आज उनका अपर छरबा (देहरादून) में एक करोड़ रुपए का प्लांट है। इसे रोजाना 300 किलोग्राम मशरूम निकलता है।

हिसार से मिली प्रेरणा

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इस प्लांट से हर महीने करीब नौ लाख रुपए कमाई होती है। हिरेशा ने बताया कि एक बार वह हिसार गई थीं। वहां एक किसान को मशरूम की खेती करते देखकर प्रेरणा मिली, फिर खुद मशरूम उत्पादन का निर्णय लिया। वर्तमान में अपर छरबा में उनका दस बीघा में मशरूम प्लांट चल रहा है।

उत्तराखंड में भरपूर मांग
हिरेशा ने बताया, मेरे यहां तैयार मशरूम की आपूर्ति सब्जी मंडी, होटलों, रिटेल स्टोर और विश्वविद्यालयों में होती है। इसके अलावा अन्य लोग भी इसे खरीदते हैं।

टूटे मशरूमों से बनता है अचार
हिरेशा बताती हैं, जो मशरूम टूट कर बिखर जाता है, उसका वे अचार बना देती हैं। बाजार में अचार खूब बिक रहा है। जल्द वह इसे ब्रांड के तौर पर बाजार में उतारेंगी।

1-5 हजार रुपए प्रति किलो है कीमत
हिरेशा के मुताबिक सूखी मशरूम की कीमत एक हजार रुपए प्रति किलो है। जबकि सिटाजे पांच हजार रुपए प्रति किलोग्राम बिकती है।

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