सीएम राहत कोष: कांग्रेस के विधायक आगे, भाजपा के पीछे, इंदिरा हृदयेश टॉप पर
- सत्ताधारी दल के कई विधायकों ने जमा नहीं कराए पैसे
- अधिकतर भाजपा विधायकों ने मूल वेतन कटवाकर चलाया काम
- कांग्रेसी विधायकों ने दिल खोलकर दिए वेतन से पैसे
विस्तार
उत्तराखंड में सीएम राहत कोष में पैसे देने के मामले में सत्ताधारी दल के विधायक ही कंजूस साबित हुए हैं। भाजपा के अधिकांश विधायकों ने मूल वेतन कटवाकर प्रदेश सरकार की अपील किनारे की। दूसरी तरफ, कांग्रेस विधायकों ने मूल वेतन के साथ ही भत्तों में भी कटौती कराई।
कांग्रेस के केदारनाथ विधायक मनोज रावत को आरटीआई के तहत विधानसभा ने जो जानकारी दी उससे जाहिर हो रहा है कि सत्ता पक्ष के अधिकतर विधायकों ने सीएम राहत कोष से दूरी बनाकर रखी है। मंत्रियों को हटा दिया जाए तो एक अतिरिक्त विधायक सहित 62 में से 42 विधायकों ने ही सीएम राहत कोष में वेतन दिया। जिसमें सत्ता पक्ष के बीस विधायक हैं जिन्होंने पैसे नहीं दिए।
इंदिरा हृदयेश टॉप पर
सीएम राहत कोष में पैसे देने वाले विधायकों में नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश टॉप पर हैं। उन्होंने राहत कोष में वेतन के साथ ही निर्वाचन क्षेत्र भत्ता और सचिव भत्ते का तीस प्रतिशत दिया। इस तरह उनके वेतन से 75600 रुपये दो बार राहत कोष में जमा हुए। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने भी नेता प्रतिपक्ष का अनुसरण किया।
उनके वेतन से 57600 रुपये कटे। एक को छोड़कर बाकी सभी कांग्रेस विधायकों के वेतन से इतने ही पैसे कटे। सूची में ऐसे कुल 21 विधायक हैं। बाकी में से किसी ने मूल वेतन (30 हजार रुपये) तो किसी ने मूल वेतन का तीस प्रतिशत देकर काम चलाया।
कांग्रेस को मिला पलटवार का मौका
कांग्रेसी पहले से ही कह रहे हैं कि कोविड को देखते हुए वे प्रदेश सरकार का सहयोग कर रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष ने भी कहा था कि सरकार पूरा ब्योरा सामने रखे।
मुन्ना सिंह चौहान ने दिया मूल वेतन
सत्ताधारी दल के विकासनगर विधायक मुन्ना सिंह चौहान ने सीएम राहत कोष में मूल वेतन दिया। उनके दो बार के वेतन से 30-30 हजार रुपये कटे। मुन्ना सिंह चौहान ने प्रेस कांफ्रेस कर कांग्रेस पर राहत कोष में पैसे जमा न करने का आरोप जड़ा था, इसलिए वे कांग्रेस के निशाने पर भी है।
सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत विधानसभा से यह जानकारी मिली। सबसे ज्यादा हल्ला मचाने वाले मुन्ना सिंह चौहान का सहयोग ही कम नजर आ रहा है। प्रदेश सरकार क्या विपक्ष के विधायकों के बल पर ही राहत कोष को भरना चाह रही है।
- मनोज रावत, केदारनाथ विधायक और आरटीआई कार्यकर्ता