अरे ये क्या, उत्तराखंड में पैसे की मोहताज हुई कांग्रेस
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उत्तराखंड में सत्ताधारी पार्टी कांग्रेस पैसे-पैसे के लिए मोहताज हो गई है। सूत्रों के अनुसार, पार्टी के खाते में इस समय चुनाव लड़ने के लिए निर्वाचन आयोग की ओर से घोषित न्यूनतम धनराशि का एक प्रतिशत पैसा भी नहीं है।
इसकी वजह पार्टी के मंत्रियों, विधायकों, दायित्वधारियों और कार्यकर्ताओं का पार्टी फंड में योगदान न करना है। पार्टी इन सभी से मानकों के हिसाब से पार्टी फंड में योगदान करने का आग्रह कर चुकी है, लेकिन इसका कोई असर नहीं हुआ। अब पार्टी पदाधिकारियों को चिंता रही है कि बिना फंड के 2017 में कैसे चुनाव लड़ा जाएगा।
कांग्रेस के नियमों के मुताबिक, इस समय प्रत्येक सांसद, मंत्रियों और विधायक को साल में एक बार एक माह का वेतन पार्टी फंड में देना होता है। ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) सदस्य को 600 रुपए और प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) सदस्य को 300 रुपए प्रति वर्ष पार्टी फंड में देना होता है। लेकिन नियम होते हुए भी पार्टी फंड में पैसा नहीं पहुंच रहा है।
चुनाव तैयारी के लिए भी फंड की जरूरत होगी। जुलूस, सभा और अन्य कार्यक्रम कराने के लिए भी पैसे चाहिए। हाल ही में पार्टी के कोषाध्यक्ष ने सभी कांग्रेस सांसदों, विधायकों और अन्य प्रतिनिधियों को पत्र लिखकर एक माह का वेतन पार्टी फंड में देने का आग्रह किया था। लेकिन इस पर पार्टी को कोई रिस्पांस नहीं मिला है।
खाते में पांच लाख भी नहीं
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय इसकी पुष्टि कर रहे हैं। किशोर के मुताबिक पार्टी फंड में पैसा नहीं है। कांग्रेस अब प्रत्येक पार्टी कार्यकर्ता से साल में 250 रुपए भी लेने की तैयारी में हैं। एआईसीसी की यह नई योजना सदस्यता अभियान के समाप्त होने पर ही लागू हो पाएगी।
एक अनुमान के मुताबिक विधानसभा चुनाव के एक उम्मीदवार पर करीब आठ लाख रुपए का खर्च माना गया है। इस हिसाब प्रदेश में 70 विधानसभा क्षेत्रों में उम्मीदवारों का खर्च पांच करोड़ साठ लाख रुपए बैठता है। लेकिन इस समय प्रदेश कांग्रेस के खाते में इस धनराशि का एक फीसदी यानी पांच लाख साठ हजार रुपए भी नहीं है।
क्या पार्टी फंड में भी वेतन देंगे मुख्यमंत्री और मंत्री?
पार्टी पदाधिकारी अंदरखाने मुख्यमंत्री हरीश रावत और मंत्रियों से एक माह का वेतन पार्टी फंड में देने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री राहत कोष में वेतन का एक चौथाई दे रहे हैं, यह अच्छी बात है लेकिन पार्टी के नियमों का भी पालन होना चाहिए।