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जनता को कौन सी धुन सुनाएंगे सीएम रावत के ये रिकॉर्ड
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 02 Jan 2017 10:55 AM IST
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सीएम हरीश रावत
- फोटो : AmarUjala
सीबीआई जांच का सामना कर रहे उत्तराखंड मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अपने ढाई साल के कार्यकाल में कई रिकॉर्ड बना डाले हैं।
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घोषणाएं करने, लालबत्तियां बांटने और कैबिनेट बैठकें करने के मामले में दूसरा कोई पूर्व मुख्यमंत्री उनके आसपास तक नहीं है।सत्ता से जुड़े विधायकों और पार्टी नेताओं को सरकारी सुख-सुविधाएं बांटने के मामले में उन्होंने एनडी तिवारी राज की याद दिला दी। विधानसभा में सबसे ज्यादा विधेयक पास कराने के मामले में भी उनका कार्यकाल याद किया जाएगा। मगर इन रिकॉर्ड कारनामों के बीच सियासी हवाओं में यह सवाल तैर रहा है कि आने वाले दिनों में जब चुनाव होंगे तो जनता की अदालत में वह अव्वल नंबर रह पाएंगे कि नहीं।
फरवरी 2014 को सत्ता की बागडोर थामने के बाद हरीश रावत ने जिस अंदाज में अपनी पारी का आगाज किया, उससे यही संदेश गया कि मंत्रियों और नौकरशाहों की मनमानी पर अंकुश लगेगा। अब जबकि सरकार विधानसभा चुनाव के बेहद नजदीक है, जनता की अदालत में तय होना है कि उनका नेतृत्व जनाकांक्षाओं की पूर्ति कर पाया है कि नहीं।
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मगर अपने करीब तीन साल के कार्यकाल में हरीश रावत अपने कुछ रिकॉर्ड के लिए जरूर याद किये जाएंगे। जिस तरह एनडी तिवारी का राजकाज थोक में लालबत्तियां बांटने के लिये जाना जाता है, हरीश रावत रिकॉर्ड घोषणाओं के लिए याद रखे जाएंगे। मुख्यमंत्री ने सिर्फ पौने तीन साल के कार्यकाल में 3,997 की घोषणाएं कर चुके हैं। इनमें कितनी पूरी हुई, कितनी पर काम शुरू हुआ और कितनी अधूरी हैं, ये रहस्य है।
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बकौल सीएम, 65 फीसदी घोषणाएं पूरी हो चुकी हैं और 20 फीसदी पर काम शुरू हो गया है। उनके इस हिसाब से घोषणाओं पर अमल का प्रतिशत 200 से अधिक है, जो पूर्व मुख्यमंत्री से 170 प्रतिशत अधिक है। सिर्फ घोषणाओं में नहीं लालबत्ती के प्रतीक दायित्व बांटने में भी सीएम का कोई सानी नहीं है।
सियासी संकट से पहले तक उनकी सरकार में दायित्वधारियों का आंकड़ा 223 तक पहुंच चुका था। सत्ता में वापसी के बाद दर्जे बांटने का सिलसिला अब तक जारी है। चूंकि कैबिनेट रैंक के ओहदे अब विभागीय स्तरों पर बांटे जा रहे हैं, इसलिये इनकी गिनती भी करना मुश्किल हो गया है। इतना ही नहीं उनके कार्यकाल में सबसे ज्यादा 107 विधेयक विधानसभा में पेश हुए।
इनमें वे निजी विवि के विधेयक भी शामिल हैं, जिन्हें लेकर सरकार और राजभवन में असहमतियां तक दिखीं। कैबिनेट बैठकों के मामले में भी उनका कार्यकाल दो वजहों से याद रखा जाएगा। पहला देर रात तक बैठकें करने के लिये और दूसरे सबसे ज्यादा बैठके करने के लिए। करीब तीन साल के दौरान वे 80 से ज्यादा बैठकें कर चुके हैं। प्रति बैठक औसतन 25 फैसलों के हिसाब से अब तक कैबिनेट 2000 निर्णय ले चुकी है।
इन रिकॉर्ड कारनामों के बाद अब सियासी हलकों में एक ही सवाल है कि हरीश रावत और कांग्रेस को इसका कितना राजनीतिक फायदा मिलने जा रहा है। वह भी ऐसे वक्त में जब उन पर थोक में लालबत्तियां बांटने, अंधाधुंध घोषणाएं करने के आरोप लग रहे हैं स्टिंग ऑपरेशन को लेकर सीबीआई जांच चल रही है।
मुख्यमंत्री घोषणाएं: 3997
कैबिनेट बैठकें: 80
कैबिनेट बैठकों में फैसले: करीब 2000
विधानसभा में विधेयक: 107
दर्जे बांटे: 223