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जलवायु बजट : जीडीपी की तरह पर्यावरणीय योगदान का भी होगा आर्थिक मूल्यांकन, पद्मभूषण अनिल जोशी का संघर्ष लाया रंग

राकेश खंडूड़ी, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sun, 06 Jun 2021 01:46 PM IST

सार

राज्य में सकल पर्यावरणीय उत्पाद (जीईपी) प्रणाली लागू करने का फैसला करने वाला उत्तराखंड देश का पहला राज्य हो गया है।
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अनिल प्रकाश जोशी
अनिल प्रकाश जोशी - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
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विस्तार

पर्यावरण दिवस पर उत्तराखंड सरकार ने पर्यावरणीय सरोकार की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश सरकार ने सकल घरेलू उत्पाद की तर्ज पर अब वन एवं पर्यावरण के ईको सिस्टम का भी आर्थिक मूल्यांकन कराने का निर्णय लिया है।
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राज्य में सकल पर्यावरणीय उत्पाद (जीईपी) प्रणाली लागू करने का फैसला करने वाला उत्तराखंड देश का पहला राज्य हो गया है। इसका श्रेय हैस्को के संस्थापक व पद्मभूषण अनिल प्रकाश जोशी को जाता है, जिन्होंने जीईपी के लिए अदालत तक का दरवाजा खटखटाया।

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जोशी कहते हैं, उत्तराखंड दुनिया के सामने जीईपी को स्वीकारने वाला पहला राज्य है। इसके लागू होने से ईको सिस्टम ग्रोथ का आर्थिक मूल्यांकन हो सकेगा। इससे राज्य सरकारें यह बता सकेंगी कि हर साल जंगल में कितना सुधार आया। कितना पानी संचित किया गया। पानी की गुणवत्ता में क्या सुधार रहा। प्राणवायु कितनी बेहतर हो सकी। मिट्टी बहने से कितनी रोकी गई। जीईपी पर्यावरण को लेकर उठने वाले सवालों का जवाब भी होगा और सरकारों को यह बताने में आसानी होगी कि वास्तव में ईको सिस्टम की वास्तविक स्थिति क्या है?

जोशी को जनहित याचिका लगानी पड़ी थी
पर्यावरणविद अनिल प्रकाश जोशी को राज्य में जीईपी लागू करने के लिए हाईकोर्ट में जनहित याचिका तक लगानी पड़ी। बकौल जोशी, न्यायालय ने सरकार से जीईपी के बारे में पूछा। सरकार ने 2018 में जीईपी को लेकर न्यायालय में हलफनामा दिया और हामी भरी। तत्कालीन प्रमुख सचिव वन आनंद वर्धन की अध्यक्षता में एक कमेटी बनी, जिसने राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान को जीईपी का फार्मूला बनाने का जिम्मा सौंपा।

जीईपी को लेकर हम लंबे समय से कोशिश कर रहे हैं। इसके मानक तैयार करने के लिए कुछ विशेषज्ञ संस्थानों से हमने बात भी की। अब पर्यावरण विभाग को यह जिम्मेदारी दी जाएगी।
- आनंद वर्धन, अपर मुख्य सचिव (वन एवं पर्यावरण
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