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उत्तराखंड: पट्टाधारक बनेंगे जमीन मालिक, कैबिनेट ने लगाई मुहर

Sun, 21 Feb 2016 09:09 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 21 Feb 2016 09:09 AM IST
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uttarakhand cabinet take many decision.

शनिवार को हुई कैबिनेट की बैठक में सरकार ने चुनावी एजेंडे पर भी होमवर्क किया। वर्ग तीन के पट्टेधारकों (असामी) को भूमि का अधिकार देने के अलावा अर्धसैनिक कल्याण निदेशालय के गठन को मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी। साथ ही अर्द्धसैनिक बलों को भी अब कैंटीन से सस्ती शराब मिल सकेगी।

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कैबिनेट के एक अन्य फैसले की मार सस्ते मकान की चाहत पर भी पड़ी है। मार्बल और टाइल्स पर प्रदेश में अब 13.5 प्रतिशत टैक्स होगा। सरकार के लिए आंख की किरकिरी बनी आबकारी नीति में 2016-17 के लिए भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। केएमवीएन-जीएमवीएन से काम छीनकर मंडी परिषद को सौंपा दिया गया है।
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सचिवालय में करीब ढाई घंटे तक चली बजट बैठक में सरकार ने चुनावी एजेंडे पर होमवर्क का संकेत दिया। वर्ग तीन के पट्टेधारकों को भूमि का अधिकार देने के फैसले से प्रदेश में करीब 12 हजार परिवारों को फायदा होने की उम्मीद है। देहरादून के अलावा हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर में इस तरह के कई पट्टाधारक हैं। हालांकि यह मामला इतना आसान नहीं है।

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अद्धसैनिक कल्याण निदेशालय के गठन को दी मंजूरी

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सूत्रों के मुताबिक वर्ग तीन के कई परिवार सार्वजनिक उपयोग की भूमि पर कब्जा किए हुए हैं। ऐसे में इन परिवारों को भूमिधरी का अधिकार देना आसान नहीं होगा। मंत्रिमंडल ने इसके लिए जमींदारी भूमि विनाश अधिनियम में संशोधन को भी मंजूरी दी। वर्ग तीन के पट्टाधारकों को सरकार की ओर से जीवनयापन को कुछ समय के लिए भूमि पट्टे पर दी जाती है। कैबिनेट के फैसले के बाद इस श्रेणी के पट्टाधारकों को मालिकाना हक मिल जाएगा।

प्रदेश में पूर्व सैनिकों और सेना के अलावा अर्द्ध सैनिक बलों के परिवारों की भी खासी संख्या है। अर्द्धसैनिक बलों को कैंटीन से मिलने वाली शराब पर आबकारी शुल्क माफ कर दिया गया है। अर्द्धसैनिक बलों में अभी यह सुविधा सिर्फ आईटीबीपी और एसएसबी को मिल रही थी। इसके अलावा कैबिनेट ने अर्द्धसैनिक कल्याण निदेशालय के गठन को भी मंजूरी दी है। इसका ढांचा स्वीकृत कर दिया गया है।

मंत्रिमंडल ने मार्बल और टाइल्स को अधिसूचित करने को भी मंजूरी दी। मंत्रिमंडल का मानना था कि वैट अधिनियम के तहत अधिसूचित न होने से इस वर्ग में टैक्स चोरी हो रही है। अब इस पर 13.5 प्रतिशत का कर लगेगा। इस वर्ग में पहले ही सात वस्तुओं को अधिसूचित किया जा चुका है।

आबकारी नीति में हुआ बदलाव

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सरकार के लिए परेशानी का सबब बनी आबकारी नीति में भी 2016-17 के लिए कई बदलाव किए हैं। आबकारी नीति 2016-17 के लिए 2100 करोड़ रुपये का लक्ष्य गया है। इसके तहत 1249 करोड़ दुकानों के आवंटन, 400 करोड़ रुपये आबकारी शुल्क और 451 अन्य मदों से हासिल किये जाएंगे।

एफएल-2 का काम केवल अब मंडी परिषद ही करेगा। गढ़वाल मंडल और कुमाऊं मंडल विकास निगम से यह काम छीन लिया गया। शराब की दुकानों में 75 प्रतिशत विक्रेता उत्तराखंड राज्य के निवासी होंगे।

विधानसभा सत्र आहूत होने की अधिसूचना के चलते कैबिनेट की ब्रीफिंग नहीं हुई। सूत्रों के मुताबिक कैबिनेट की बैठक में वन मंत्री दिनेश अग्रवाल और पंचायत मंत्री प्रीतम सिंह शामिल नहीं हुए। तय किया गया कि कैबिनेट की अगली बैठक 25 फरवरी को होगी।

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