उत्तराखंड में घर बनाने का सपना अब भूल जाओ
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सोमवार को हुई कैबिनेट की बैठक ने प्राइवेट बिल्डरों सहित घर की चाहत रखने वालों को झटका दिया है।
उपखनिजों की वैट दरों में सीधे आठ प्रतिशत का इजाफा कर उत्तराखंड सरकार ने राजस्व में इजाफा भी तय लिया है। जनवरी 2013 में ही उपखनिजों की रायल्टी दरों को संशोधित कर करीब-करीब दोगुना किया गया था। अब वैट 13.5 प्रतिशत हो जाने पर बिल्डिंग मैटीरियल का महंगा हो जाना भी तय है।
उपखनिज से सरकार को खास आय नहीं हो पा रही है। इस सेक्टर से करीब आठ सौ करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय का अनुमान है। प्रदेश में इस समय करीब 22 स्टोन क्रेशर और 150 खनन पट्टे हैं। इसके बावजूद भी सरकार को कुल 150 करोड़ रुपए की आय हो पाई।
इस स्थिति को देखते हुए खनन पर वैट बढ़ाने की भी मजबूरी सरकार के सामने रही। दूसरी ओर उपखनिज (बालू, बजरी, रेता, पत्थर) की दरों अब वैट अधिनियम की किसी सूची में शामिल नहीं है।
वेट में साफ तौर पर यह व्यवस्था है कि जिसके लिए कोई दर निर्धारित नहीं है वह वस्तु 13.5 प्रतिशत की दर में शामिल होगी। ऐसे में उपखनिज पर अब 13.5 प्रतिशत का वैट है और यह सीधा आठ प्रतिशत का फर्क है।
बिल्डरों केमुताबिक वैट की दर में इजाफा होने से एक गाड़ी बजरी पर करीब चार हजार रुपये का इजाफा हो जाएगा। इसका फर्क आखिरकार अपने घर की चाहत रखने वाले उपभोक्ता पर पड़ेगा।
प्राइवेट बिल्डर को इसमें नुकसान उठाना पड़ सकता है। दूसरी ओर खुद अपना घर बनाने वालों को भी अब बालू, बजरी, रेत, पत्थर आदि की अधिक कीमत देनी होगी।
स्वास्थ्य जुड़े कुछ अहम फैसले
कुमाऊं और गढ़वाल मंडल में कैंसर की जांच व उपचार के लिए एक-एक केंद्र स्थापित किया जाएगा। आबकारी, तम्बाकू व खनन उत्पादों (राज्य से बाहर जाने वाले) पर 1 से 2 प्रतिशत सेस लगेगा।
जिसपे प्राप्त राशि को व्याधि निधि में जमा कराया जाएगा ताकी गंभीर रोगों से ग्रस्त लोगों को सहायता दी जा सके। सरोगेसी के माध्यम से मां बनने वाली महिलाओं को भी मातृत्व अवकाश मिलेगा।
राज्य आंदोलनकारियों की कुछ मांगें पूरी
कैबिनेट ने 60 वर्ष से अधिक आयु के राज्य आंदोलनकारियों को पेंशन देने का फैसला लिया है। शहीद राज्य आंदोलनकारियों के फोटो विधानसभा में इसी सत्र में लगाए जाएंगे और शहीद राज्य आंदोलनकारियों के गांवों को आदर्श गांव बनाने के लिए ग्राम्य विकास विभाग को नोडल एजेंसी बनाया जाएगा।
शिक्षण संस्थाओं के नाम शहीदों के नाम पर रखे जाएंगे। राज्य आंदोलनकारी कल्याण कोष के लिए 10 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है।
राज्य आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण के लिए जिलाधिकारियों की अध्यक्षता में बनी समितियों को भंग कर अब नई समिति बनाई जाएगी जो छूट गए व अन्य मामलों की जांच करेगी।
सचिवालय में अब छह दिन काम
कैबिनेट ने सचिवालय में अब सप्ताह में 6 दिन कामकाज करने का फैसला लिया है। हालांकि दूसरे शनिवार को अवकाश रहेगा। सचिवालय कर्मचारियों पर लगाम कसने के लिए बायोमैट्रिक सिस्टम से उनकी हाजिरी लगाने का फैसला भी लिया गया है।
कैबिनेट ने यह भी दिशा निर्देश दिए हैं कि सचिवालय में निर्णय लेने के स्तर में कमी लाई जाएगी जिससे फाइलों का निस्तारण तेजी से हो सके। शनिवार को सचिवालय में कोई बैठक नहीं होगी। इस दिन न तो जनता से जुड़े कामकाज होंगे और उनका प्रवेश भी बंद रहेगा। केवल फाइल संबधी कार्य होगा।
अन्य फैसले
-बिजली की लाइन शिफ्टिंग के लिए खर्च का 40 प्रतिशत पावर कॉरपोरेशन, 30 प्रतिशत राज्य सरकार व 30 प्रतिशत विधायक निधि से वहन किया जा सकेगा।
- राजस्व व वन विभाग की ओर से लगने वाले जुर्मानों में एकरूपता लाई जाएगी।
- प्राइवेट बिल्डर द्वारा बनाए जाने वाले अपार्टमेंट्स में 15 प्रतिशत आवास कमजोर आय वर्ग के लिए होंगे। यदि ऐसा नहीं होता है तो बिल्डर को अपने प्रोजेक्ट कोष का 15 प्रतिशत सरकार या संबंधित प्राधिकरण को जमा कराना होगा।
- सचिवालय में नए अनुभाग सृजित करने का मामला सचिव समिति को सौंप दिया गया है।
- विधाई एवं संसदीय कार्य विभाग में 8 पदों की संस्तुति दी गई है।
- खाद्य विभाग में राज्य कर्मचारी कल्याण निगम की स्थापना को मंजूरी।
- गंधर्व जाति के कौशल संवर्धन विकास के लिए संस्तुति की गई।