उत्तराखंड बजट सत्र का दूसरा दिन: लाठीचार्ज और महंगाई के मुद्दे पर विपक्ष का सदन से वॉकआउट
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विधानसभा में काम रोको प्रस्ताव के तहत महंगाई के मुद्दे पर विपक्ष ने सरकार के जवाब से अंसतुष्ट होकर सदन से वॉकआउट कर दिया। विपक्ष का आरोप था कि सरकार के पास महंगाई कम करने को लेकर कोई योजना नहीं है। वह सदन को गुमराह करने का प्रयास कर रही है। इस बीच पाकिस्तान में भारत से सस्ते पेट्रोल के जिक्र पर संसदीय कार्यमंत्री मदन कौशिक और विपक्षी सदस्यों के बीच तीखी नोक-झोंक भी हुई। कौशिक ने पेट्रोल, डीजल व खाद्य वस्तुओं की कीमतों के तुलनात्मक आंकड़ों के जरिये दावा किया कि दूसरे राज्यों की तुलना में उत्तराखंड में महंगाई कम है।
इससे पूर्व मंगलवार को सुबह जब सदन की कार्यवाही शुरू हुई तो नेता प्रतिपक्ष ने नियम 310 में मंहगाई पर चर्चा कराने की मांग की। स्पीकर ने नियम 310 की सूचना को नियम 58 में सुनने का आश्वासन दिया। शून्यकाल के दौरान विपक्ष ने महंगाई के मुद्दे पर सरकार को घेरने का प्रयास किया। कांग्रेस विधायक करन माहरा ने जब कहा कि पाकिस्तान जैसे देश में भी 51 रुपये लीटर पेट्रोल मिल रहा है तो इसके जवाब में संसदीय कार्यमंत्री ने तंज किया कि विपक्ष पाकिस्तान से तुलना करता है। इस नेता प्रतिपक्ष ने एतराज किया कि उन्होंने 10 अन्य देशों के भी नाम लिए हैं।
करन माहरा ने कहा कि मैंने किसी मंत्री को इस तरह चिढ़ते हुए नहीं देखा। इस बीच कौशिक और विपक्षी सदस्यों के बीच बहस शुरू हो गई। दो-तीन बार स्पीकर प्रेमचंद अग्रवाल को दखल देना पड़ा। कौशिक ने छत्तीसगढ़, राजस्थान, पंजाब, महाराष्ट्र व अन्य राज्यों में पेट्रोल, डीजल व दालों का जिक्र किया तो नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार महंगाई पर सही जवाब देने को तैयार नहीं है। यह कहते हुए उन्होंने 1.50 मिनट पर सदन से वॉकआउट कर दिया। करीब 2.10 बजे कांग्रेस के कुछ सदस्य सदन में लौट आए। कौशिक ने जवाब जारी रखा। उन्होंने बताया कि राज्य के 23 लाख परिवारों की चिंता करना सरकार की जिम्मेदारी है।
इससे पूर्व प्रस्ताव पर चर्चा की मांग करते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि बढ़ती महंगाई से गरीब जनता कराह रही है। पेट्रोल-डीजल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। रसोई गैस इतनी महंगी हो गई है कि उज्ज्वला योजना में लोग सिलेंडर नहीं भरा पा रहे हैं। गैस पर सब्सिडी 139 से 18 रुपये हो गई है। कांग्रेस विधायक प्रीतम सिंह ने यूपीए सरकार में मंहगाई के मुद्दे तत्कालीन पीएम को दिखाई जाने वाली चूड़ियां अब कहां चली गई? उन्होंने कहा कि पेट्रोल व डीजल के दाम बढ़ने से महंगाई बढ़ती है उस गरीब वर्ग पर पड़ रही है जो कोरोना महामारी से जंग लड़ रहा है। कांग्रेस विधायक गोविंद सिंह कुंजवाल, करन माहरा, ममता राकेश और आदेश चौहान ने भी महंगाई के मुद्दे पर केंद्र और राज्य सरकार की आलोचना की। महंगाई के बहाने उन्होंने कर्मचारियों के वेतन लटकाने, गन्ना व धान की फसल का भुगतान में देरी, आलू, प्याज, तेल, दालें और चावल व गेहूं की कीमतों में बढ़ोतरी का मुद्दा उठाया।
अब तो पकौड़े भी नहीं तल सकते बेरोजगार
कांग्रेस विधायक आदेश चौहान ने व्यंग्य किया कि अब तो बेरोजगार पकौड़े भी नहीं तल सकते। प्याज महंगी हो गई। खाद्य तेल 150 रुपये लीटर से ऊपर पहुंच गया है। रसोई गैस की कीमतें आम लोगों की हद से बाहर हैं।
गैस सिलेंडर देकर बीपीएल की सूची से बाहर कर दिया
कांग्रेस विधायक करन माहरा ने कहा कि उज्ज्वला योजना में सरकार ने गरीब परिवारों को रसोई गैस सिलेंडर तो उपलब्ध करा दिए, लेकिन इससे उनके बीपीएल की सूची से बाहर होने का खतरा पैदा हो गया। मानकों के अनुसार, जिनके पास एलपीजी सिलेंडर हैं, वे बीपीएल की सूची में शामिल नहीं हो सकते। हालांकि संसदीय कार्यमंत्री ने कहा कि ऐसा कुछ भी नहीं हैं।
कई संगठनों ने किया प्रदर्शन
लाठीचार्ज के विरोध में गैरसैंण से लेकर देहरादून और कुमाऊं में भी उबाल बना हुआ है। कई संगठनों ने मंगलवार को जगह-जगह प्रदर्शन किए। कई जगह सरकार का पुतला दहन किया गया।
देहरादून में एनएसयूआई छात्र संगठन के सदस्यों ने डीएवी कॉलेज के गेट के सामने राज्य सरकार का पुतला दहन किया। वहीं, उत्तराखंड महिला मंच के सदस्यों ने डीएम कार्यालय में प्रदर्शन कर जोरदार नारेबाजी की।
उधर, हल्द्वानी के बुद्ध पार्क में में भी यूकेडी कार्यकर्ताओं ने लाठीचार्ज का विरोध किया और सरकार का पुतला दहन किया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी सभी जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन किया।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे आंदोलनकारियों पर लाठीचार्ज से यह साफ हो गया है कि प्रदेश सरकार दमन की नीति पर विश्वास करती है। कांग्रेस इस मामले को सदन में भी उठाएगी और सदन के बाहर भी इसका पुरजोर विरोध करेगी।
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नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश ने कहा कि आंदोलनकारियों पर लाठीचार्ज करवा कर सरकार ने अपना जनविरोधी रुख सामने रख दिया है। कांग्रेस नेताओं के मुताबिक इस मुद्दे को सड़क से लेकर सदन तक उठाया जाएगा। सड़क पर विरोध जताया जाएगा और लोगों के सामने सही स्थिति रखी जाएगी।
वहीं, मालकोट-सेरा-तेवाखर्क सड़क निर्माण संघर्ष समिति के करीब 50 लोगों ने प्रमुख लोनिवि के अभियंता से मुलाकात की। वहां जब उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ तो उसके बाद उन्होंने भराड़ीसैंण के लिए कूच किया, लेकिन दुखथमा बैरियर पर पुलिस ने उन्हें रोक दिया। कुछ देर बाद नारेबाजी करने के बाद वे वापस चले गए।
नंदप्रयाग-घाट मोटर मार्ग के चौड़ीकरण की मांग को लेकर प्रदर्शनकारियों पर सोमवार को हुए लाठीचार्ज के विरोध में कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने दिवालीखाल तिराहे पर धरना-प्रदर्शन किया। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने भी राज्य कर्मचारी घोषित करने, 21 हजा रुपये मानदेय देने समेत अन्य मांगों को लेकर कालीमाटी के पास दुखथमा बैरियर पर धरना दिया और सरकार के खिलाफ में नारेबाजी की।
कांग्रेस ने सूझबूझ से सरकार को सदन में घेरा, बदली रणनीति
ग्रीष्मकालीन राजधानी में बजट सत्र के दूसरे दिन विपक्ष ने सूझबूझ से सरकार की घेराबंदी की। सत्ता पक्ष आंदोलनकारियों पर लाठीचार्ज के मामले में जवाब देने की तैयारी करता रह गया और विपक्ष ने महंगाई के मुद्दे पर सरकार को उलझा दिया। इस मुद्दे पर सरकार को घेरने के बाद ही विपक्ष ने लाठीचार्ज के मुद्दे को उठाया।
सोमवार को दिवालीखाल में घाट-नंदप्रयाग सड़क निर्माण की मांग कर रहे आंदोलनकारियों पर पुलिस ने लाठियां भांजीं थीं। शाम होते-होते मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इस मामले में मजिस्ट्रेट जांच के आदेश भी जारी कर दिए थे। ट्रेजरी बैंच को उम्मीद थी कि इस मुद्दे पर सदन में मंगलवार को विपक्ष का रुख आक्रामक रहेगा। इसी को देखते हुए संसदीय कार्य मंत्री मदन कौशिक की ओर से जवाब भी तैयार किया गया था।
कांग्रेस ने इसे भांपते हुए सदन में महंगाई के मुद्दे को काम रोको प्रस्ताव के तहत उठाया। विपक्ष ने रणनीतिक सूझ बूझ के तहत प्रश्नकाल और शून्यकाल चलने दिया और इसके बाद महंगाई के मुद्दे पर सरकार को घेर लिया। इस पर सरकार का जवाब आता, इससे पहले ही विपक्ष सदन से बहिर्गमन कर गया। इसके बाद ही सदन में कांग्रेस ने लाठीचार्ज का मुद्दा उठाया और सरकार पर तीखा हमला बोला। इसमें भी खासे हंगामे के बाद सदन से विपक्ष ने बहिर्गमन किया।
संसदीय कार्यमंत्री ने भी दिखाई सूझबूझ
संसदीय कार्यमंत्री मदन कौशिक शुुरू में विपक्ष की रणनीति को भांपने में चूक गए, लेकिन बाद में उन्होंने भी मामले को संभाल लिया। मदन कौशिक की सफलता रही कि काम रोको प्रस्ताव और दो बड़े मुद्दे होने के बाद भी सदन में राज्यपाल के अभिभाषण पर समय से चर्चा शुरू हुई और प्रश्नकाल भी सुचारू रूप से चला। वहीं, विपक्ष की ओर से नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश ने साफ कहा कि प्रश्नकाल और शून्यकाल को चलने देना विपक्ष ने तय किया था। लिहाजा सरकार इसमें अपनी पीठ न थपथपाए।