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उत्तराखंड बजट सत्र 2021 : सदन में रखे गए दो विधेयक, महिलाओं को सहखातेदार का अधिकार

Wed, 03 Mar 2021 10:33 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोपेश्वर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोपेश्वर Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Wed, 03 Mar 2021 10:33 PM IST
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Uttarakhand Budget Session 2021: drone vigil in budget session in gairsain assembly
गैरसैंण में बजट सत्र - फोटो : अमर उजाला

पर्वतीय क्षेत्र में महिलाओं को सहखातेदार बनाने के लिए प्रदेश सरकार ने अब एक कदम और आगे बढ़ा लिया है। बुधवार को प्रदेश सरकार ने इससे संबंधित विधेयक सदन में पेश किया। 

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कुछ समय पहले ही मंत्रिमंडल ने इस मामले को लेकर विचार किया था। मंत्रिमंडल से अनुमोदित प्रस्ताव के आधार पर जमींदारी भूमि विनाश अधिनियम में संशोधन के लिए सरकार बुधवार को सदन में विधेयक लेकर आई। इसके तहत पर्वतीय क्षेत्रों में भूमिधरी अधिकार वाले पुरुष की पत्नी को भूमि में अंशधारक बनाया बनाने का संशोधन लाया गया। सरकार के मुताबिक पर्वतीय क्षेत्रों में पलायन अधिक है और इस वजह से अधिकतर पुरुष रोजगार की तलाश में अपने क्षेत्रों में नहीं है।
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इस वजह से खेती किसानी से लेकर आजीविका तक का काम महिलाओं को देखना होता है। भूमि पर अधिकार न होने के कारण महिलाओं को बैंक लोन नहीं मिल पाता। इस समस्या के समाधान के लिए ही महिलाओं को सशर्त अंशधारक बनाया गया है। यह तभी तक है जब तक महिला दूसरा विवाह नहीं करती। इसके साथ ही बेटी को अधिकार देने और अन्य संशोधनों को भी विधेयक के रूप में सदन के पटल पर रखा गया है। 
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पंचायत प्रतिनिधियों को भी नहीं गंवानी होगी कुर्सी
प्रदेश सरकार ने बुधवार को सदन में पंचायत संशोधन विधेयक पेश कर शहरी क्षेत्र में शामिल हो जाने वाले ग्रामीण क्षेत्रों के प्रतिनिधियों को राहत देने के लिए भी कदम उठाया। शहरीकरण के बढ़ते दबाव के कारण प्रदेश सरकार की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों को शहरी क्षेत्रों में भी शामिल किया जा रहा है।

मंगलवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में भी तीन ग्राम पंचायतों को नगर पंचायत बनाने का फैसला किया गया। मुसीबत यह है कि शहरी क्षेत्र में शामिल होते ही संबंधित ग्राम पंचायत के जन प्रतिनिधि को कुर्सी भी गंवानी पड़ती है। इसी को देखते हुए प्रदेश सरकार ने मंत्रिमंडल की बैठक में ऐसे पंचायत कर्मियों का कार्यकाल पूरे पांच साल रहने देने का फैसला किया गया था। इसी के लिए पंचायतीराज अधिनियम में संशोधन का प्रस्ताव सदन के पटल पर रखा गया।

राज्यपाल अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव ध्वनिमत से पारित

विधानसभा में दो दिन की चर्चा के बाद बुधवार शाम को राज्यपाल का अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव ध्वनिमत से पारित हो गया। चर्चा के दौरान सत्तापक्ष के विधायकों ने जहां बजट भाषण के समर्थन में सरकार की पीठ थपथपाई तो वहीं विपक्षी सदस्यों ने इसकी कई खामियां गिना डाली।  इस बीच सरकार ने अभिभाषण में दो त्रुटियों को स्वीकार की। इनमें टूल किट के मामले में 40 हजार के स्थान पर चार लाख अंकित हो गया था। इसके अलावा एक योजना के विवरण में ढाई करोड़ की राशि अंकित हो गई थी, जो ढाई लाख है।

बृहस्पतिवार को भोजनावकाश के बाद सदन में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा हुई। नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश ने अभिभाषण में संशोधन का प्रस्ताव रखा। संसदीय कार्य मंत्री मदन कौशिक ने विपक्ष की ओर उठाई गई खामियों का विस्तार से सदन को जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा बिना किसी भेदभाव के पूरे प्रदेश में समान रूप से विकास करने की है। पूर्व कांग्रेस सरकार ने चुनाव के ऐन वक्त पर 13648 सड़कों के निर्माण की घोषणा कर दी। लेकिन हमारी सरकार ने इन घोषणाओं को भी पूरा करने का काम किया है।

19 हजार किलोमीटर सड़कों व 1329 पुलों के निर्माण पर 5443 करोड़ की राशि खर्च की गई। महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए सरकार ने स्वयं सहायता समूह को पांच लाख का ब्याज मुक्त ऋण दिया जा रहा है। इसके साथ महिलाओं के कंधों से घास का बोझ कम करने  के लिए घसियारी योजना शुरू की गई। 23 लाख परिवारों को दो किलो दाल सब्सिडी पर दी जा रही है। नौ करोड़ से भराड़ीसैंण से दिवालीखाल तक सड़क को डबल लेन और दिवाली खाल से कर्णप्रयाग तक 35 करोड़ से सड़क को डबल लेन किया जाएगा। इसकी मंजूरी दी गई है। एडीबी के वित्तीय सहायता से प्रदेश में 24 हेलीपैड बनाए जा रहे हैं। उड़ान योजना के तहत प्रदेश में एयर कनेक्टिविटी बढ़ी है। 

दीदी के राज्यपाल बनने की चर्चा
धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान संसदीय कार्य मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि दीदी इंदिरा हृदयेश के राज्यपाल बनाने की चर्चा थी। विपक्ष के कुछ लोगों ने दीदी को फोन कर यह तक कह दिया कि पाडुचेरी व गोवा का राज्यपाल मत बनना। दीदी के नाम आते ही विपक्ष के लोगों को परेशानी होने लगती है। 

...सरे शाम सूरज को ढलना पड़ेगा

अभिभाषण पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्य शायरना मूड में भी नजर आए। मंगलौर के विधायक काजी निजामुद्दीन ने ... सरे शाम सूरज को ढ़लना पड़ेगा.. शेर से इसकी शुरुआत की। इसके बाद  भाजपा विधायक संजय गुप्ता और देशराज कर्णवाल भी खुद को नहीं रोक पाए और तीनों सदस्यों के बीच शायरना अंदाज में बहस शुरू हो गई। अभिभाषण पर चर्चा के दौरान लक्सर से भाजपा विधायक संजय गुप्ता, मंगलौर से कांग्रेस विधायक काजी निजामुद्दीन, झबरेड़ा से भाजपा विधायक देश राज कर्णवाल की खूब शेरो शायरी चली। 

काम होने पर सरकार को धन्यवाद तो कह दो
संसदीय कार्य मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि सरकार ने बिना किसी भेदभाव के हर क्षेत्र में विकास कार्य कराए हैं। इसके लिए विपक्ष को सरकार का धन्यवाद करना चाहिए। धन्यवाद कहने से कोई पैसे नहीं लगते हैं। 

चर्चा में इन सदस्यों ने लिया भाग
भाजपा विधायक मीना गंगोला, चंदन राम दास, संजय गुप्ता, विनोद कंडारी, खजानदास, आदेश चौहान ने अभिभाषण को सराहा और सरकार की उपलब्धियां गिनाई। जबकि नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश, कांग्रेस विधायक हरीश धामी, ममता राकेश, काजी निजामुद्दीन, राजकुमार, गोविंद सिंह कुंजवाल ने कई खामियां निकाली।

सदन में गूंजा 22 हजार उपनल कर्मचारियों का मुद्दा

प्रदेश सरकार ने कहा कि उपनल कर्मचारियों के मामले में फैसला लेना संभव नहीं है, क्योंकि उनसे जुड़े वाद सर्वोच्च न्यायालय में लंबित हैं। बुधवार को शून्यकाल के दौरान विभिन्न विभागों व उपक्रमों में तैनात करीब 22 हजार उपनल कर्मचारियों के नियमितीकरण का मुद्दा गूंजा। निर्दलीयविधायक प्रीतम पंवार ने कार्यस्थगन प्रस्ताव के तहत यह मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश भर में उपनल कर्मचारी तैनात हैं। कई सालों से नौकरी कर रहे हैं। वे सरकार से नियमित करने की मांग कर रहे हैं।

वे हड़ताल पर हैं, लेकिन सरकार उनसे बात नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार हठधर्मिता छोड़े और उनकी मांग पूरी की जाए। संसदीय कार्यमंत्री मदन कौशिक ने कहा कि पहली बार इस सरकार में उपनल कर्मचारियों का एक साथ 20 प्रतिशत वेतन बढ़ाया गया है। चूंकि नियमितीकरण का मामला सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है, इसलिए इस संबंध में नीतिगत निर्णय करना उचित नहीं है। इस पर प्रीतम पंवार ने कहा कि हाईकोर्ट ने उपनल कर्मचारियों के पक्ष में निर्णय दिया है। सरकार फैसले के विरोध में सर्वोच्च न्यायालय में गई है, सरकार सर्वोच्च न्यायालय से वाद वापस ले ले। संसदीय कार्यमंत्री और विधायक पंवार को सुनने के बाद विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया।

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