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Uttarakhand Budget Session: विपक्ष ने बजट को बताया निराशाजनक, कहा- पांच साल में इतना कर्ज, जो 17 साल में नहीं हुआ

Wed, 15 Jun 2022 10:40 PM IST
अनुराग सक्सेना अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून।
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून। Published by: अनुराग सक्सेना Updated Wed, 15 Jun 2022 10:40 PM IST
सार

बुधवार को बजट सत्र में दूसरे दिन प्रात: 11 बजे सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने नियम 310 के तहत चारधाम यात्रा के मुद्दे पर चर्चा की मांग की। इसे पीठ ने भोजनावकाश के बाद नियम 58 में सुने जाने का आश्वासन दिया।

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Uttarakhand Budget assembly Session news update second day
उत्तराखंड विधानसभा सत्र - फोटो : अमर उजाला- फाइल फोटो

विस्तार

बजट सत्र के दूसरे दिन प्रश्नकाल में कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल और चंदन रामदास विपक्ष के सवालों से घिरते नजर आए। दोनों ही मंत्रियों ने विपक्ष के अनुपूरक सवालों के जवाब दिए, लेकिन विपक्ष इससे संतुष्ट नजर नहीं आया। विपक्षी सदस्यों का आरोप था कि मंत्री सवालों के जवाब देने के बजाय तर्क-वितर्क करके सदन का समय खराब कर रहे हैं। सीधे जवाब देने के बजाय बातों को घुमाया जा रहा है। सदन गुरुवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया है।

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बुधवार को बजट सत्र में दूसरे दिन प्रात: 11 बजे सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने नियम 310 के तहत चारधाम यात्रा के मुद्दे पर चर्चा की मांग की। इसे पीठ ने भोजनावकाश के बाद नियम 58 में सुने जाने का आश्वासन दिया। इसके बाद प्रश्नकाल के दौरान विधायक प्रीतम सिंह के एक अल्प सूचित प्रश्न का वित्त एवं पुनर्गठन मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने जवाब दिया, लेकिन विपक्ष उनके जवाब से संतुष्ट नजर नहीं आया।
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विधायक प्रीतम ने जानना चाहा था कि राज्य निर्माण के समय कितनी परिसंपत्तियों का बंटवारा हुआ था, उसके बाद हर पंचवर्षीय योजना में कितनी संपत्तियों का बंटवारा हुआ। जवाब में अग्रवाल ने उत्तर प्रदेश से परिसंपत्तियों के बंटवारे का वर्ष 2017 के बाद का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों के मध्य परिसंपत्तियों के बंटवारे के अधिकांश मामले निपटा लिए गए हैं। शेष मामलों में दोनों राज्यों के मध्य बनी सहमति के अनुसार बंटवारे की कार्यवाही अंतिम चरण में है।

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इस पर प्रीतम सिंह ने आपत्ति जताई। उन्होंने इस संबंध में पीठ से भी आग्रह किया कि उन्हें उनके सवालों का सही जवाब मंत्री की ओर दिलवाया जाए। इस बीच कई बार नोक-झोंक की स्थिति तक बन गई। आखिर में मंत्री ने पुन: जवाब देकर अपनी बात समाप्त करनी चाही, लेकिन विपक्ष इससे संतुष्ट नजर नहीं आया।

विपक्ष के सवालों से घिरने की दूसरी बारी समाज कल्याण एवं परिवहन मंत्री चंदन रामदास की थी। मंत्री एक सवाल के अपने ही दिए जवाब में उलझते नजर आए। विधायक अनुपमा रावत ने पति-पत्नी दोनों को वृद्धावस्था पेंशन की पात्रता संबंधी सवाल में पूछा था कि क्या मानकों के कारण बड़ी संख्या में महिलाएं वृद्धावस्था पेंशन पाने से वंचित हो रही हैं?

इसके लिखित जवाब में मंत्री ने हां में उत्तर दिया था। तब कि उन्होंने सदन में कहा कि पति-पत्नी दोनों को पेंशन दी जा रही है। इस पर विपक्षी सदस्यों ने उन्हें जमकर घेरा। हालांकि आखिर में उन्होंने माना कि नए शासनादेश के बाद आय की शर्त जुड़ जाने के कारण बहुत से लोग इस पात्रता से बाहर हो गए हैं।

इसके बाद मंत्री चंदन रामदास परिवहन निगम के राजस्व हानि के विधायक प्रीतम के सवाल पर भी घिरते नजर आए। मंत्री इस सवाल का संतोषजनक उत्तर नहीं दे पाए कि सीएनजी में बदली गई बसों से कितनी आय हो रही है और घाटा कितना है।

प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों को दिया जाएगा बढ़ावा

प्रदेश में पर्यावरण की दृष्टि से इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए राज्य सरकार की ओर से विस्तृत नीति तैयार की जा रही है। बजट सत्र के दौरान एक सवाल के जवाब में परिवहन मंत्री चंदन रामदास ने यह जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2018 में औद्योगिक विकास विभाग की ओर से इलेक्ट्रिक वाहनों के संबंध में एक अधिसूचना जारी की गई है। इसके तहत इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्माण और अन्य संरचनाओं के विकास के लिए प्रस्ताव भी तैयार है, जिसे शीघ्र ही कैबिनेट में रखा जाएगा। विधायक डॉ. मोहन सिंह बिष्ट ने इस संबंध में जानना चाहा था कि ईंधन की कीमतों में वृद्धि और पर्यावरण प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सरकार की क्या योजना है। इसके जवाब में मंत्री चंदन रामदास ने बताया कि इसके लिए विस्तृत नीति तैयार की जा रही है।

एक अन्य प्रश्न के उत्तर में मंत्री रामदास ने बताया कि हल्द्वानी में पिछली सरकार में स्वीकृत अंतर राज्यीय बस अड्डे का निर्माण पूरा किया जाएगा। इसके लिए वर्ष 2018 में पूर्व प्रक्रियाओं को निरस्त कर उत्तराखंड मुक्त विवि हल्द्वानी के निकट वन विभाग की 10 हेक्टेयर भूमि पर आईएसबीटी की स्थापना किए जाने का निर्णय लिया गया है। वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया जारी है। हालांकि वर्तमान में यह प्रकरण उच्च न्यायालय में विचाराधीन है।

विपक्ष का आरोप, पांच साल में इतना कर्ज, जो 17 साल में नहीं हुआ

विधानसभा सत्र के दौरान बजट पर चर्चा में विपक्ष ने प्रदेश में लगातार बढ़ रहे कर्ज और देनदारियों का मुद्दा उठाया। विपक्ष ने आरोप लगाया कि बीते पांच साल में ही सरकार ने इतना कर्ज कर दिया है, जितना उससे पहले के 17 साल में नहीं लिया गया। विपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि ऐसे तो प्रदेश के हालात श्रीलंका जैसे हो जाएंगे।

भोजनावकाश के बाद बजट पर चर्चा शुरू हुई। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने तेजी से बढ़ रहे कर्ज का मुद्दा उठाते हुए इसे गंभीर विषय बताया। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री ने इस बजट में बड़ी चतुराई से सरकार की कमियों को आंकड़ों के माध्यम से छिपाने की कोशिश की। कहा कि उत्तराखंड भी श्रीलंका की दिशा में आगे बढ़ रहा है। राज्य गठन से 2016-17 तक राज्य पर कुल देयता 35 हजार करोड़ थी। 17 साल में कुल 35 हजार करोड़ का कर्ज हुआ था। 2017 से 2022 तक में सरकार ने 57,152 करोड़ की उधारी ली है। इस बार 12,850 की अनुमानित धनराशि को छोड़ दें तो पांच साल में 70 हजार करोड़ की देनदारी है। यह स्थिति बहुत चिंताजनक है।

नेता प्रतिपक्ष आर्य ने कहा कि वर्तमान में उत्तराखंड राज्य पर कुल एक लाख पांच हजार करोड़ की देनदारी और उधारी है। 2011 की जनसंख्या के हिसाब से देखें तो प्रति व्यक्ति 95 हजार का कर्ज है। सरकार को बजट में यह स्वीकार करना चाहिए था। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार ने कितना कर्ज लिया, किन शर्तों पर लिया। बजट में इसका जिक्र नहीं है। कब तक हम उधार लेंगे। देनदारी भी है। ब्याज की अदायगी भी है। पुराने कर्ज पर ब्याज अदायगी के 6017 करोड़ और पांच हजार करोड़ को जोड़ दें तो यह 11 हजार 575 करोड़ का पुराना कर्ज, ब्याज देना पड़ेगा। जब इतना पैसा ब्याज व देनदारियों में चला जाएगा तो विकास कार्य कैसे होंगे।

उन्होंने प्रदेश में अघोषित बिजली कटौती, जल जीवन मिशन के तहत केवल नल लगाने, कृषि, सिंचाई में कोई प्रावधान न करने का भी आरोप लगाया। कहा कि यह बजट बहुत निराशाजनक है। आंकड़ों का मायाजाल है। इसमें पेट्रोल, डीजल की महंगाई से राहत देने की बात नहीं है। निवेश बढ़ाने, प्रति व्यक्ति आय बढ़ाने की कोई पहल नहीं की गई। कहा कि राज्य आंदोलनकारियों का चिन्हीकरण नहीं हो पा रहा है। जिन्हें नौकरी दी थी, वह भी खतरे में है। कांग्रेस विधायक विक्रम सिंह नेगी, सुमित ह्दयेश ने भी बजट को निराशाजनक करार दिया।

जवाब में सत्ता पक्ष की ओर से विधायक मुन्ना सिंह चौहान ने कहा कि पुष्कर धामी की सरकार ने बजट से पूर्व सभी हितधारकों से संवाद किया। पहले 57 हजार करोड़ का बजट अब बढ़कर 65 हजार करोड़ पर पहुंच गया। उत्तराखंड में पिछले पांच साल में 40 हजार से ज्यादा महिलाओं के सेल्फ ग्रुप बनाकर उन्हें सरकार की योजनाओं का लाभ दिया गया। एक लाख से तीन लाख तक का ऋण दिया गया। पांच लाख का भी ऋण दिया गया। बांग्लादेश के नोबेल विजेता प्रोफेसर मुहम्मद यूनुस के माइक्रो फाइनेंस को समझना होगा।

उन्होंने कहा कि हमारी सरकार समाज के हर वर्ग को इसी पैटर्न में जोड़कर चल रही है। ईएपी में हम देश में सबसे अच्छे हैं। हमें 90 प्रतिशत अनुदान मिलता है और 10 प्रतिशत ही राज्य को देना पड़ता है। 14,387 करोड़ के बाह्य सहायतित प्रोजेक्ट उत्तराखंड को मिले हैं, जो सौभाग्य की बात है। 894 करोड़ की राशि केंद्र सरकार ने विशेष योजना के तहत दिया है।

विधायक मुन्ना चौहान ने कहा कि सिक्किम जैसा छोटा राज्य 100 फीसदी ऑर्गेनिक राज्य बना। उत्तराखंड में हमारी कुल कृषि भूमि का 34% ऑर्गेनिक फार्मिंग में कन्वर्ट हो चुका है। यह उत्तराखंड के लिए गेम चेंजर होगा। पशुपालन विभाग गायों की रेड सिन्दी ब्रीड पूरे देश में कालसी में संरक्षित है। तमाम सेक्टर को हम ट्रांसफॉर्म कर रहे हैं। इस बजट में यह साफ दिखता है। हमने आज तक जितना भी कर्ज लिया, कभी ऐसा नहीं हुआ कि उसका भुगतान न किया हो।

उन्होंने कहा कि यह सबसे अलग बजट है, जो कि विकास के नए आयाम स्थापित करेगा। उनके समर्थन में भाजपा विधायक राम सिंह कैड़ा, विनोद कंडारी, बृजभूषण गैरोला, मदन बिष्ट ने भी इसे जनभावनाओं के अनुरूप बजट करार दिया।

सरकार ने भंग की बजट की गोपनीयता

नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने बजट की गोपनीयता भंग करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बजट जारी होने से पहले ही मीडिया के माध्यम से इसकी खबरें प्रसारित करा दी गई जो कि सदन की परंपराओं के खिलाफ है। 

अब बजट आया तो विकास कार्य कब शुरू होंगे

बजट पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि पहले सरकार चार माह का लेखानुदान लाई। उसका कोई औचित्य नहीं था। अब जून माह में बजट आया है। कब यह विभागों में जाएगा। कब यह धरातल पर उतरेगा। विकास कार्य कब होंगे, यह बड़ा सवाल है।

44 फीसदी बजट खर्च क्यों नहीं हुआ

नेता प्रतिपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि पिछले वित्तीय वर्ष में जो बजट लाया गया था, उसमें सिंचाई सहित कई विभागों का बजट सरकार खर्च ही नहीं कर पाई। जो कि सरकार की कार्यप्रणाली को दर्शाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सिंचाई, बाढ़ नियंत्रण मों 1354 करोड़ के बजट का प्रावधान किया गया था, जिसके सापेक्ष सरकार 754 करोड़ ही खर्च कर पाई। शहरी विकास, परिवहन, कृषि का भी ऐसा ही हाल है।

जीएसटी प्रतिपूर्ति और राजकोषीय घाटे पर चिंता

नेता प्रतिपक्ष ने बजट पर चर्चा के दौरान राजकोषीय घाटे और जीएसटी प्रतिपूर्ति की समयसीमा खत्म होने पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि करीब 5500 करोड़ रुपये जीएसटी प्रतिपूर्ति बंद होने जा रही है लेकिन राज्य सरकार ने बजट में इसकी भरपाई को लेकर कोई रास्ता नहीं सुझाया। सरकार ने 8503 करोड़ का राजकोषीय घाटा दिखाया है। केंद्रीय वित्त मंत्रालय और आरबीआई के अनुसार इसकी आदर्श स्थिति तीन फीसदी तक रहती है लेकिन सरकार 3.7 फीसदी पर पहुंच गई है, जो कि चिंताजनक है।

स्वास्थ्य, ऊर्जा के क्षेत्र में उदासीनता का आरोप

नेता प्रतिपक्ष ने बजट में स्वास्थ्य के क्षेत्र को लेकर सरकार पर उदासीनता का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि पहाड़ में डॉक्टर्स, नर्स नहीं हैं। दवाई नहीं है। विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं है। अधिकांश जिला अस्पतालों में रेडियोलॉजिस्ट नहीं है। रूरल हेल्थ रिपोर्ट 2019-20 के आंकड़ों पर गौर करें उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में 1839 उपकेंद्र हैं, जिनमें से 500 से अधिक के पास अपने भवन नहीं हैं। 100 से अधिक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के भी अपने भवन नहीं है।

उन्होंने कहा कि आरबीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक, देश के हिमालयी राज्यों में उत्तराखंड ने स्वास्थ्य सेवाओं पर सबसे कम खर्च किया है। स्वास्थ्य विभाग में 24,751 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 8,242 पदों पर तैनाती है। उन्होंने कहा कि इस बार बजट में स्वास्थ्य, ऊर्जा, शहरी विकास के क्षेत्र में भी कुछ खास प्रावधान नहीं है। यह बजट निराशाजनक और सत्य से परे है।

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