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उत्तराखंड बजट 2021 : चुनावी वर्ष में भी सरकार ने रोक लिए कदम, बड़ी घोषणाएं करने से बचे त्रिवेंद्र
Fri, 05 Mar 2021 10:25 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Fri, 05 Mar 2021 10:25 AM IST
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मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत
- फोटो : पीटीआई फाइल फोटो
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पूरी सहूलियत और दरकार होने के बाद भी चुनावी वर्ष में सरकार ने बजट में बड़ा कदम उठाने से रुक गई। केंद्रीय वित्त आयोग से मिली मदद का उपयोग कर किसी बड़ी योजना को भी सामने लाने से बचा गया।
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गैरसैंण-भराड़ीसैंण में बजट पेश होने से पहले चुनावी वर्ष को देखते हुए लोक लुभावन बजट की उम्मीद की जा रही थी। बतौर वित्त मंत्री बजट पेश करते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इस मामले में लोगों को खास उत्साहित नहीं किया। बजट में जारी योजनाओं को धरातल पर उतारने की कोशिश अधिक की और नई योजनाओं को घोषित करने से परहेज किया।
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15वें वित्त आयोग ने प्रदेश को अगले पांच साल के लिए करीब 98 हजार करोड़ रुपये का तोहफा दिया है। इसमें से 28 हजार करोड़ रुपये तो राजस्व घाटा अनुदान के रूप में ही दिया गया है। इस पैसे को बजट के केंद्रीय अंतरण में सामने नहीं रखा गया। खुद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि 15वें वित्त आयोग ने 14वें वित्त आयोग की तुलना में प्रदेश को करीब दोगुना पैसा दिया। ऐसे में प्रदेश सरकार के सामने पूरा मौका था कि वह राज्य सेक्टर में महत्वकांक्षी परियोजना लेकर आती।
स्वास्थ्य क्षेत्र को तवज्जो
बजट में प्रदेश सरकार ने तीन मेडिकल कालेज बनाने की बात कर स्वास्थ्य क्षेत्र को तवज्जो देने का संकेत दिया। इतना होने पर भी स्वास्थ्य में बुनियादी विकास के लिए सरकार ने 15वें वित्त आयोग की ओर से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में अपग्रेड करने के लिए जारी बजट पर ही भरोसा किया।
इसी तरह पर्यटन में सरकार ने टिहरी झील से संबंधित एक हजार करोड़ रुपये की केंद्रीय योजना पर ही भरोसा जताया। नए पर्यटन सर्किट विकसित करने, नए डेस्टीनेशन आदि पर भी सरकार का ध्यान नहीं गया।
बजट से साफ है कि प्रदेश सरकार ने विकास योजनाओं के लिए बजट में खास इजाफा नहीं किया है। कुल 13 हजार करोड़ के पंजीगत बजट में करीब नौ हजार करोड़ रुपये ही विकास योजनाओं के लिए रखे गए हैं। दूसरी ओर, कर्मचारियों के वेतन, पेंशन पर ही सरकार को 15 हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च करने हैं।
बाजार उधारी से बचने की भी कोशिश
प्रदेश में कर्ज 55 हजार करोड़ रुपये से अधिक है और इसके ब्याज की भरपाई के लिए ही सरकार को बाजार से उधार उठाना पड़ रहा है। ऐसे में कर्मचारियों के वेतन तक के लिए सरकार को बाजार से उधार लेना पड़ रहा है। इस बार करीब 12 हजार करोड़ रुपये का उधार लेना तय किया गया है। यह तब है जबकि सरकार को वर्ष 2020-21 में ही करीब 13 हजार करोड़ रुपये का उधार लेना पड़ा था।
अब आगे राहत में रह सकती है सरकार
बजट में बड़ी घोषणा न करके सरकार अब आगे आने वाले समय में भी राहत महसूस कर सकती है। इसका कारण यह भी वित्त आयोग के अनटाइड फंड के आधार पर नई और बड़ी योजनाओं को भी लागू किया जा सकता है।