उत्तराखंड : मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र को रुला गई सुरेंद्र सिंह जीना की यादें, बोले- अब नहीं सुनाई देगी आवाज
- बोले, अब नहीं सुनाई देगी भाई साहब प्रणाम की वो आवाज
- पत्नी के निधन पर बोले थे कि भाई साहब अब कभी चुनाव नहीं लडूंगा : भगत
विस्तार
सल्ट के विधायक सुरेंद्र सिंह जीना की यादों ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को रुला दिया। प्रदेश कार्यालय में जब वह मीडिया के साथ जीना की यादों को साझा कर रहे थे, उस दौरान उनकी आंखों में आंसू छलक पड़े। वह फफक पड़े और रुंधे गले से बोले, भाई साहब प्रणाम...! की वह आवाज अब कभी नहीं सुनाई देगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वह जीना के विधानसभा क्षेत्र में तीन बार गए थे। तीनों ही बार मैंने लोगों में जीना के प्रति भारी लगाव देखा। वह गरीब और कमजोर लोगों की चिंता करते थे। उनका जाना प्रदेश राजनीति के लिए बड़ी क्षति है।
श्रद्धांजलि सभा के क्षणों में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बंशीधर भगत भी भावुक दिखे। भगत ने कहा कि पत्नी के निधन से जीना इस कदर टूट गए थे कि उन्होंने मेरे कंधे पर सिर रखा और बोले, भाई साहब अब कभी चुनाव नहीं लडूंगा।
कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक भी जीना के जाने से बेहद गमगीन दिखे। मीडिया के लोग जब उनके आवास पर पहुंचे तो वह अपनी बात पूरी नहीं कर पाए और उनका गला रुंध गया। कौशिक के साथ जीना मेट्रो की संभावना तलाशने के लिए विदेश यात्रा पर गए थे। जीना का उनसे काफी लगाव था।
जीना के निधन से पैतृक गांव नैटी भी डूबा शोक में
रानीखेत (अल्मोड़ा) के सल्ट के विधायक सुरेंद्र जीना के आकस्मिक निधन से उनके पैतृक गांव नैटी सिमलधार (ताड़ीखेत ब्लॉक) में भी लोग शोक संतप्त हैं। ग्रामीणों ने कहा कि 22 दिन पहले विधायक जीना गांव आए थे। गुरुवार सुबह अचानक निधन की सूचना मिलते ही ग्रामीणों की आंखें नम हो गईं। ग्रामीण बोले की प्रदेश ने एक होनहार नेता खो दिया।
नैटी गांव में वर्तमान में 34 परिवार निवास करते हैं। जीना ने कक्षा तीन तक राजकीय प्राथमिक विद्यालय सिमलधार में पढ़ाई की। इसके बाद वह पिता स्व. प्रताप सिंह जीना के साथ दिल्ली चले गए। उनके पिता दिल्ली में फिल्म डिस्ट्रीब्यूटर थे। वर्षों पूर्व उनका परिवार दिल्ली चला गया।
स्व. विधायक के चचेरे भाई गोविंद सिंह जीना ने बताया कि वह एक मिलनसार प्रवृति के व्यक्ति थे। वह गांव आते रहते थे। अभी कुछ दिन पूर्व ही वह अल्मोड़ा बैठक में जा रहे थे तो गांव भी आए थे। सभी ग्रामीणों की उन्होंने कुशलक्षेम पूछी।
गांव में स्व. जीना का पैतृक मकान है जिसकी देखरेख गांव की खिमुली देवी करती हैं। चाचा चंदन सिंह जीना, बहादुर सिंह जीना, लक्ष्मण सिंह जीना, चंदन जीना, खीम सिंह जीना, नवीन आर्या सहित सभी ग्रामीणों की आंखें नम थीं। क्षेत्र पंचायत सदस्य गणेश राम, सुरेंद्र सिंह, बालम सिंह, त्रिलोचन सहित तमाम लोगों ने नैटी जाकर उनके परिजनों को सांत्वना दी।