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उत्तराखंड के चार निगमों में भाजपा मेयर की अग्नि परीक्षा तो दो में कांग्रेसी मेयर के लिए मुश्किल

Thu, 29 Nov 2018 09:34 AM IST
राकेश खंडूरी, अमर उजाला, देहरादून
राकेश खंडूरी, अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 29 Nov 2018 09:34 AM IST
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uttarakhand bjp facing problem in four nagar nigam and congress in two nagar nigam
देहरादून के मेयर सुनील उनियाल - फोटो : अमर उजाला

निकाय चुनाव में मेयर की सीट जीतकर खुशी से फूले नहीं समा रहे प्रत्याशियों के लिए दो दिसंबर को शपथ ग्रहण के बाद इस खुशी को सहेजना काफी कठिन होगा। वजह, जहां चार निगमों को चलाने में भाजपा मेयर की अग्नि परीक्षा होगी तो वहीं दो में कांग्रेसी मेयर के लिए बोर्ड चलाना मुश्किल होगा। इस मामले में दून नगर निगम के विजयी भाजपा मेयर प्रत्याशी सुनील उनियाल गामा ही भाग्यशाली निकले, यहां मेयर-बोर्ड दोनों भाजपा का है।  लब्बोलुआब, निर्दल के सहारे रहेंगी स्थानीय सरकारें। राज्य सरकार भले ही कोई हो स्थानीय सरकारें बहुमत के इस संकट से पूरे पांच साल जूझती रहेंगी।

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वर्तमान स्थिति में  जिन चार नगर निगमों में भाजपा के मेयर निर्वाचित हुए हैं, वहां बोर्ड में कांग्रेेस-निर्दल का वर्चस्व है तो जिन दो निगमों में कांग्रेस के मेयर चुने गए हैं, वहां भाजपा-निर्दल का प्रभुत्व है।  यही वजह है कि निकाय चुनाव में सबसे बड़े दल के रूप में उभरी भाजपा सात में से पांच नगर निगमों में मेयर पद पर काबिज होने के बावजूद सहज नहीं है। हल्द्वानी, ऋषिकेश, रुद्रपुर और काशीपुर में उसके पार्षदों की संख्या बहुमत से दूर है। ऐसे हालातों में निर्दलियों को साथ लेना उसकी मजबूरी होगी। ठीक यही हालत कोटद्वार और हरिद्वार नगर निगम में मेयर पद पर जीती कांग्रेस की है।
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 फिलहाल दो दिसंबर को शपथग्रहण समारोह से पहले भाजपा और कांग्रेस अपने-अपने वर्चस्व वाली छोटी सरकारों में भविष्य में बढ़ने वाली तकरार से बचने के रास्ते खोजने में जुटी है। सामान्य प्रस्ताव को पास कराने को जहां पचास फीसदी से एक अधिक संख्या बल चाहिए तो वहीं, संविधान संशोधन, बजट व अन्य विशेष मामलों में दो तिहाई कोरम की आवश्यकता होगी। छह नगर निगमों में बहुमत और कोरम की दिक्कतें हैं। यही वजह है कि दोनों दल निर्दलियों पर डोरे डाल रहे हैं। पूर्व मेयर विनोद चमोली कहते हैं, जिन मुद्दों पर मत विभाजन की नौबत आती है, निश्चिततौर पर उनमें दिक्कत आएगी। ऐसी स्थितियों में बहुमत महत्वपूर्ण हो जाता है। लेकिन कई विषय ऐसे हैं जहां शासन को अधिकार है। मेयर चाहे तो नगर आयुक्त की सहमति से प्रस्ताव शासन को भेज सकता है। ऐसी स्थिति में भाजपा ज्यादा सहज है क्योंकि प्रदेश में भाजपा की सरकार है। बहरहाल, स्थानीय सरकार के  बोर्डों को चलाने के लिए बहुमत का पेच कहां हटेगा और कहां दिक्कत पैदा करेगा, ये आने वाला समय बता देगा। 

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नगर निगमों में सीटों के समीकरण

रुद्रपुर नगर निगम
कुल सदस्य: 40
भाजपा: 17, कांग्रेस 17, निर्दलीय: 06
बहुमत के चाहिए: 21, कोरम के लिए चाहिए: 26
मेयर: रामपाल (भाजपा)
समीकरण:  बोर्ड में किसी दल को बहुमत नहीं। बहुमत के लिए निर्दलियों को साधना होगा। बोर्ड की बैठक करने के लिए कोरम चाहिए। कोरम दो तिहाई संख्या बल चाहिए। बोर्ड को सहजता से चलाने के लिए मेयर की मजबूरी है कि वो निर्दलियों को साथ लेकर चले।

बोर्ड चलाने में कोई दिक्कत नहीं होगी। सभी पार्षदों के साथ तालमेल बिठाकर विकास कार्य किए जाएंगे, किसी भी पार्षद के साथ भेदभाव नहीं होगा। दलगत राजनीति से ऊपर उठकर विकास कार्य होंगे। बोर्ड में भाजपा के पास बहुमत के लिए जरूरी पार्षद हो जाएंगे।
- रामपाल, मेयर, नगर निगम रुद्रपुर   

काशीपुर नगर निगम
कुल सदस्य: 40
भाजपा:15, कांग्रेस: 07, निर्दलीय: 16, बसपा: 02 
बहुमत के चाहिए: 21, कोरम के लिए चाहिए: 26
मेयर: भाजपा
समीकरण: बोर्ड में किसी भी दल को बहुमत नहीं। मेयर को बोर्ड चलाने के लिए बहाना पड़ेगा पसीना। निर्दलियों की भूमिका अहम। भाजपा और कांग्रेस दोनों का निर्दलियों पर दावा।

कोट: मैं पूर्व में भी मेयर थी। संख्या बल हमारे साथ नहीं था। लेकिन मुझे बोर्ड संचालित करने में कोई दिक्कत नहीं हुई। बहुमत होने से सहजता तो रहती है।
- ऊषा चौधरी, मेयर, नगर निगम काशीपुर  

हल्द्वानी नगर निगम
कुल सदस्य 60
भाजपा: 20, कांग्रेस: 0, निर्दलीय: 39, यूकेडी:01
बहुमत: 31 का, कोरम: 40 का
मेयर: जोगेंद्र रौतेला (भाजपा)
समीकरण: निगम में बेशक मेयर भाजपा का है, लेकिन उसके पास बहुमत नहीं है। बोर्ड को चलाने के लिए उसे निर्दलियों का समर्थन चाहिए। कांग्रेस दावा कर रही है कि अधिकांश निर्दलीय उसके हैं। यानी बोर्ड उनके हिसाब से संचालित होगा। 
कोट
दलीय राजनीति से ऊपर उठकर बोर्ड चलाना होता है। पिछले कार्यकाल में भी हमारे पास पर्याप्त संख्या बल नहीं था। लेकिन विकास और क्षेत्र की प्रगति के लिए सदस्य दलगत राजनीति से ऊपर उठकर बोर्ड संचालित किया। इस बार भी ऐसे बोर्ड का संचालन होगा। कोई दिक्कत नहीं आएगी।
- जोगेंद्र रौतेला, मेयर, नगर निगम, हल्द्वानी
 

ऋषिकेश नगर निगम
कुल सदस्य: 40
भाजपा: 15, कांग्रेस 10, निर्दलीय:15
मेयर: भाजपा
समीकरण: भाजपा के पास बहुमत नहीं है। उसे सात सदस्यों के समर्थन की आवश्यकता है। इसके लिए उसे निर्दलियों को साधना पड़ रहा है। 

कोट: हमारे पास 15 सदस्य हैं। इसके अलावा कई निर्दलियों ने समर्थन दिया है, जिसके आधार पर हमारी संख्या 21 हो गई है, जो बहुमत के बराबर है। कई निर्दलीय हमारे संपर्क में हैं। ये संख्या 25 तक जाएगी।
-अनीता ममगाईं,  मेयर, नगर निगम, ऋषिकेश

हरिद्वार नगर निगम
कुल सदस्य: 60
भाजपा: 33, कांग्रेस 19, निर्दलीय: 07, बसपा: 01
मेयर: कांग्रेस
बहुमत: 31 का, कोरम: 40 का 
समीकरण: नगर निगम में भाजपा पार्षदों की संख्या के हिसाब से सबसे बड़ा दल है। लेकिन मेयर की कुर्सी कांग्रेस के पास है। कम संख्या बल होने के कारण मेयर के लिए बोर्ड संचालित करना चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। सभी निर्दलियों के साथ आने पर भी वह बहुमत से दूर है। इसलिए प्रस्ताव पारित कराने में उसे भाजपा पार्षदों का भी साथ चाहिए होगा। 
कोट       
यह सही है कि पार्षदों का बहुमत हमारे पास नहीं है लेकिन शहरहित में सभी पार्षदों का सहयोग लेकर आगे बढ़ेंगे। शहर के विकास तथा जनहित के मुद्दों पर भाजपा के बोर्ड में सहमति रहती थी। पार्षदों के राय तथा सुझाव के अनुसार ही काम किया जाएगा। शहरहित में भाजपा पार्षद कोई अच्छा प्रस्ताव लाएंगे तो उसे भी पास करेंगे। चुनाव में सच्चाई की जीत हुई, जिसका सभी सम्मान करेंगे और मिलकर ईमानदारी से काम करेंगे।
-अनीता शर्मा, मेयर, हरिद्वार नगर निगम  
   
कोटद्वार नगर निगम
कुल सदस्य: 40
कांग्रेस:13,  भाजपा: 12,  निर्दलीय:15  
मेयर: कांग्रेस
समीकरण: नगर निगम में कांग्रेस का मेयर चुनकर आया है। लेकिन संख्या बल कांग्रेस के पक्ष में नहीं है। बोर्ड चलाने के लिए उसे निर्दलियों का साथ लेना होगा। कांग्रेस दावा कर रही है कि निर्दलीय जीत कर आए पार्षद उसकी विचारधारा से संबंधित है, इसलिए वे सहयोग करेंगे। बहुतम और कोरम दोनों निर्दलियों के समर्थन पर निर्भर करेगा। साथ मिला तो ठीक वरना बोर्ड चलाने में दिक्कतें आएंगी।   

नवसृजित कोटद्वार नगर निगम क्षेत्र के विकास के लिए राजनीति से ऊपर उठकर काम किया जाएगा। कांग्रेस के जीते हुए प्रत्याशियों की संख्या सबसे अधिक हैं। निर्दलीय जीतकर आए पार्षदों में आधे से अधिक कांग्रेस से जुड़े हैं। एक वार्ड में कई कार्यकर्ताओं के चुनाव लड़ने के कारण उन्हें पार्टी सिंबल नहीं दिया गया था। वह सभी पार्षदों को विश्वास में लेकर और उनके सहयोग से सदन ही नहीं चलाएंगी, बल्कि संपूर्ण नगर निगम क्षेत्र को मॉडल सिटी के रुप में विकसित करने के लिए कार्य करेंगी।
-हेमलता नेगी, मेयर, कोटद्वार नगर निगम  

बड़ी संख्या में साथ आ रहे हैं निर्दलीय

निकाय चुनाव में भाजपा ने अपना परचम फहराया है। नगर निगम में भाजपा बेहद सहज स्थिति में है। भाजपा शासित निगमों में बोर्ड का संचालन करने में कोई परेशानी नहीं आएगी। मुझे जो जानकारी प्राप्त हो रही है, बहुत बड़ी संख्या में निर्दलीय भाजपा के साथ आ रहे हैं।
- अजय भट्ट, प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा

बोर्ड चलाने में कोई परेशानी नहीं
हरिद्वार और कोटद्वार नगर निगम में कांग्रेस के मेयर चुने गए हैं। दोनों नगर निगमों में बोर्ड का संचालन करने में कोई परेशानी नहीं आएगी। सभी नगर निगमों में कांग्रेस की विचारधारा के निर्दलीय पार्षद चुनकर आए हैं। वे सभी हमारे संपर्क में हैं। उनका साथ हमें मिलेगा।
- प्रीतम सिंह, प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस

बहुमत न भी हो तो शासन सहमति दे सकता है
जिन मुद्दों पर मत विभाजन की नौबत आती है, उनमें दिक्कत आती है। यदि पार्टी लाइन पर जाएंगे तो किसी भी मुद्दे को गिराया जा सकता है। बहुत सारे मुद्दे ऐसे हैं, जिनमें अंतिम निर्णय शासन ले सकता है। मेयर चाहेगा तो नगर आयुक्त के साथ मिलकर प्रस्ताव शासन को भेज सकता है और शासन सहमति दे सकता है। कई बार बहुमत होने के बाद भी दिक्कतें आती हैं। सीमा विस्तार पर अपने ही लोग सहमत नहीं थे। मैंने नगर आयुक्त के साथ मिलकर प्रस्ताव शासन को भेजा। उस पर सहमति बनीं।
- विनोद चमोली, पूर्व मेयर, देहरादून नगर निगम

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