भाजपा कोर कमेटी बैठक: विधायक फर्त्याल के मामले में कार्रवाई टली, दो सांसदों से बात के बाद होगा फैसला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
देहरादून में आज भाजपा कोर कमेटी की बैठक आयोजित की गई। इस दौरान विधायक फर्त्याल के मामले में होने वाली कार्रवाई कमेटी ने टाल दी। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बंशीधर भगत ने बताया कि कोर कमेटी ने पार्टी के दो सांसदों अजय भट्ट और अजय टम्टा को विधायक फर्त्याल से बातचीत करने की जिम्मेदारी दी है। उनसे बात करने के बाद ही पार्टी फैसला लेगी।
उन्होंने कहा कि दो से तीन दिन में प्रदेश कार्यकारिणी और मोर्चों की कार्यकारिणी की घोषणा होगी। 16 अक्तूबर को देहरादून में कार्यशाला का आयोजन होगा। पांच से 10 अक्तूबर तक जिलों और 10 से 15 अक्तूबर तक मंडलों की बैठकें होंगी। 17 अक्तूबर को प्रदेश भाजपा के कार्यालय का शिलान्यास किया जाएगा। पार्टी के सांसद, विधायक और पदाधिकारी इसमें भाग लेंगे।
बैठक में पार्टी के दिग्गजों ने विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर भी विचार विमर्श किया। इस दौरान बैठक में राष्ट्रीय सह महामंत्री संगठन शिव प्रकाश, केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, पार्टी के सांसद, प्रदेश पदाधिकारी व मंत्री शामिल रहे।
बैठक का मुख्य एजेंडा पिछली बैठक में लिए गए फैसलों की समीक्षा करना भी था। पिछली बैठक में नगर निकायों में सदस्यों के मनोनयन में पार्टी कार्यकर्ताओं को समाहित करने का फैसला हुआ था। कोर कमेटी की बैठक से ठीक पहले शनिवार को शहरी विकास विभाग ने मनोनीत सदस्यों की सूची जारी कर दी गई थी।
विधायक पूरन फर्त्याल पर अनुशासनहीनता का आरोप
विधायक पूरन फर्त्याल को पार्टी अनुशासनहीनता का नोटिस दे चुकी है। फर्त्याल पर अपनी ही पार्टी की सरकार को भ्रष्टाचार के मुद्दे पर कठघरे में खड़ा करने का आरोप है। उनकी बयानबाजी को पार्टी ने अनुशासनहीनता के दायरे में माना है। हालांकि फर्त्याल पार्टी के इस आरोप से सहमत नहीं हैं। उन्होंने पार्टी को अपना जवाब दे दिया है। जवाब देने के बाद से फर्त्याल चुप हैं।
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बंशीधर भगत का कहना था कि फर्त्याल का मामला और उनका जवाब कोर कमेटी के सामने रखा जाएगा। कोर कमेटी उनके बारे में निर्णय लेगी। लेकिन बैठक में इस पर कोई निर्णय नहीं हो सका।
माना जा रहा है कि 2022 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए पार्टी ऐसा कोई संकेत नहीं देना चाहती जो उसके अनुशासन को लेकर बनी छवि के लिए नुकसानदेय है। ऐसे मेंl सांसदों से बातचीत के बाद फर्त्याल के मामले में कड़ा निर्णय होगा इस संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता।