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Uttarakhand: नए भू-कानून में निवेश और स्थानीय हितों के बीच संतुलन साधने की चुनौती, अगले हफ्ते होगी अहम बैठक

Wed, 01 Feb 2023 04:20 PM IST
रेनू सकलानी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Wed, 01 Feb 2023 04:20 PM IST
सार

पूर्व मुख्य सचिव सुभाष कुमार की अध्यक्षता वाली भू-कानून समिति ने यह पाया था कि राज्य में पिछले कुछ वर्षों में कई निवेशकों ने अलग-अलग उद्देश्य से भूमि खरीदी। कुछ ने उसका दूसरा उपयोग किया और कुछ ने तय समय सीमा के बावजूद उसका कोई उपयोग नहीं किया। समिति की रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद अब शासन स्तर पर इसका परीक्षण हो रहा है।

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Uttarakhand Bhu Kanoon challenge of balancing investment and local interests in new land law
बैठक - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राज्य सरकार के सामने प्रस्तावित नए भूमि संशोधन कानून में स्थानीय भू स्वामियों के हितों और विकास के लिए जरूरी निवेश के बीच संतुलन साधने की चुनौती खड़ी हो गई है। भू-कानून के लिए गठित समिति ने उस भूमि को राज्य सरकार में समाहित करने की सिफारिश कर रखी है, जिसका तय समय-सीमा में उद्देश्य के मुताबिक उपयोग नहीं हो पाया है।

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आशंका यह है कि राज्य सरकार यदि ऐसी भूमि अधिग्रहित करती है तो इससे निवेश प्रभावित हो सकता है, जबकि राज्य सरकार का जोर निवेश को प्रोत्साहित करने पर है। पूर्व मुख्य सचिव सुभाष कुमार की अध्यक्षता वाली भू-कानून समिति ने यह पाया था कि राज्य में पिछले कुछ वर्षों में कई निवेशकों ने अलग-अलग उद्देश्य से भूमि खरीदी।

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कुछ ने उसका दूसरा उपयोग किया और कुछ ने तय समय सीमा के बावजूद उसका कोई उपयोग नहीं किया। समिति की रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद अब शासन स्तर पर इसका परीक्षण हो रहा है। समिति ने अपनी सिफारिशों में रोजगार आधारित उद्योगों में निवेश के लिए भूमि देने की सिफारिश की है लेकिन इसमें स्वास्थ्य क्षेत्र शामिल नहीं है। जबकि कुछ निवेशक जिनके पास पहले से ही भूमि है, चिकित्सालयों के निर्माण में निवेश के इच्छुक हैं।

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भूमि का दूसरा उपयोग करना चाहते हैं निवेशक

सूत्रों के मुताबिक, तय समय-सीमा में भूमि का उपयोग नहीं कर पाए निवेशक सरकार से यह अपेक्षा कर रहे हैं कि उन्हें भूमि का दूसरा उपयोग करने की अनुमति मिले। वे पर्यटन, स्वास्थ्य व सेवा क्षेत्र में भूमि का उपयोग करना चाहते हैं। लेकिन दिक्कत की बात यह है कि नियमों में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। इसलिए यहां पेच फंसा हुआ है।

नए कानून में शामिल होने हैं स्थानीय भू-कानून

राज्य का अब एक नया संशोधित भू-कानून बनाने के लिए सरकार को सभी स्थानीय भू-अधिनियमों को इसमें शामिल करना है। कुमाऊं मंडल में कुमाऊं जमींदारी विनाश एवं भूमि सुधार कानून 1966 लागू है। इसी तरह गढ़वाल में जौनसार बावर जमींदारी उन्मूलन एवं भूमि सुधार एक्ट 1956 है। इन दोनों अधिनियमों में स्थानीय भूमि से संबंधित प्रावधान हैं। इन दोनों कानूनों पर शासन ने गढ़वाल और कुमाऊं मंडलायुक्तों से मंतव्य मांगा है।

अगले हफ्ते बैठक में होगा मंथन

भू-कानून समिति की सिफारिशों के आलोक में नए भू-कानून के बारे में अगले हफ्ते बैठक होगी। इस बैठक में अधिनियम को लेकर मंथन होगा। साथ ही स्थानीय भू-कानूनों के बारे में चर्चा होगी।

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स्थानीय भू-कानूनों को कैसे शामिल करेंगे, इस बारे में मंडलायुक्तों से मंतव्य मांगा गया है। अगले हफ्ते में इस बारे में एक बैठक होगी। जिस भूमि का तय समय में उपयोग नहीं हो पाया है वह रोजगारपरक उद्योग, पर्यटन व स्वास्थ्य के क्षेत्र के साथ कैसे जुड़े, इस बारे में भी विचार होना है।- सचिन कुर्वे, सचिव राजस्व।

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