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Uttarakhand Assembly Winter Session: किसान मामले को लेकर गरमाया सदन, विपक्ष का वॉक आउट, सत्र एक दिन बढ़ा

Tue, 22 Dec 2020 09:35 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Tue, 22 Dec 2020 09:35 PM IST
सार

  • सदन में जमकर हंगामा, अपनेे सदस्यों की वजह से फिर असहज हुई सरकार
  • देर रात पारित हुआ 4000 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट

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Uttarakhand Assembly winter session 2020:  Supplementary budget will be passed, four bills and reports will be presented today
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत - फोटो : AMAR UJALA FILE PHOTO

विस्तार

विधानसभा सत्र के दूसरे दिन विपक्ष ने सदन में कई मुद्दों पर खासा हंगामा काटा। कृषि कानूनों के मामले में सरकार के जवाब से नाखुश विपक्ष ने वाक आउट भी किया। अपने ही विधायकों के तल्ख रुख से सरकार एक बार फिर सदन मे असहज हुई और उसे एक जिलाधिकारी के खिलाफ जांच का आदेश देना पड़ा।

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मंगलवार को सदन की शुरुआत कार्यस्थगन के प्रस्ताव पर विपक्ष के तल्ख रुख से हुई। विपक्ष की ओर से कृषि कानूनों के खिलाफ धरने पर बैठे किसान, बेरोजगारी, गन्ना भुगतान, पिथौरागढ़ की आपदा, अशासकीय स्कूलों का अनुदान बंद करने आदि मुद्दों पर काम रोको प्रस्ताव लाया गया था।
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इससे पहले कांग्रेस के विधायक गन्ना लेकर विधानसभा पहुंचे। इस दौरान खासा हंगामा भी हुआ। स्पीकर प्रेमचंद अग्रवाल की ओर से इन मामलों को सुनने का आश्वासन मिलने के बाद ही सदन की कार्यवाही शुरू हो पाई।
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सरकार के लिए राहत की बात यह रही कि 4000 करोड़ रुपये से अधिक की अनुदान मांगें बिना किसी शोर शराबे के पास हो गईं। संसदीय कार्यमंत्री मदन कौशिक ने अनुदान मांगे पेश की। चर्चा में पक्ष और विपक्ष के विधायक शामिल हुए।

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शूून्य काल में बरपा हंगामा
शून्यकाल के दौरान किसान समस्याओं और गन्ना भुगतान के मसले पर सरकार के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने बहिर्गमन किया। विपक्ष का आरोप था कि सरकार इन मुद्दों पर चर्चा से बच रही है। विपक्ष ने नारेबाजी कर विरोध जताया, लेकिन वैल में जाने से परहेज किया। 

अपनों से घिरी सरकार, डीएम अल्मोड़ा के खिलाफ जांच
इस बार भी सत्र में एक मौका ऐसा आया जब सत्ता पक्ष के विधायक की वजह से सरकार को खासी असहज स्थिति का सामना करना पड़ा। उपसभापति रघुनाथ सिंह चौहान ने पीठ पर आसन ग्रहण करते हुए कहा कि वे विशेषाधिकार हनन का मामला लेकर आ रहे हैं। इस पर विपक्ष ने संसदीय कार्यमंत्री को घेर लिया। बाद में सरकार की ओर से इस मामले में मुख्य सचिव से जांच कराने का आश्वासन दिया गया।

सीएम की वर्चुअल स्थिति पर भी विवाद
सीएम की ओर से सत्र में वर्चुअल भाग लेने पर ट्वीट करने पर सदन में विवाद हुआ। कांग्रेस विधायक काजी निजामुद्दीन ने नियम 299 के तहत औचित्य का सवाल उठाया। काजी ने कहा कि सीएम अगर वर्चुअल शामिल हैं तो फिर फोटो बाहर कैसे गया और सीएम अगर वर्चुअल नहीं हैं तो सदन की कार्यवाही में शामिल कैसे हैं। पीठ ने माना कि यह मामला गंभीर है और इसको लेकर नियम बनना चाहिए।
 

विपक्ष के दबाव में आई सरकार

विपक्ष के दबाव में आई सरकार ने सत्र की अवधि एक दिन बढ़ाने पर सहमति दी है। संसदीय कार्यमंत्री मदन कौशिक ने इसकी पुष्टि की है। मंगलवार को हुई कार्यमंत्रणा की बैठक में बुधवार 23 दिसंबर का बिजनेस तय किया गया। बैठक में तय किया गया कि 23 दिसंबर को सदन में करीब पांच विधेयक पेश किए जाएंगे। आधा दिन असरकारी कार्य होगा और प्रश्नकाल चलेगा। 

विपक्ष की ओर से मौजूद नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने सत्र की अवधि बढ़ाने की मांग की। इस पर संसदीय कार्यमंत्री ने सहमति जाहिर की। बाद में संसदीय कार्यमंत्री ने बताया कि बुधवार को कार्यमंत्रणा समिति की बैठक फिर होगी। इस बैठक में एक दिन के सत्र का बिजनेस तय किया जाएगा। 

इससे पहले सरकार की ओर से 21 दिसंबर से तीन दिन का सत्र घोषित किया गया था। इस पर विपक्ष ने खासा हल्ला मचाया और कहा कि सत्र को कम से कम शुक्रवार तक चलना चाहिए। विपक्ष का यही दबाव आखिरकार काम आया। 

एक दिन का सत्र बढ़ाने पर सरकार सहमत हो गई है। विपक्ष की ओर से दबाव पड़ा तो सरकार को यह कदम उठाने को सरकार मजबूर हुई है। लगातार इसकी मांग भी की जा रही थी। कुछ मुद्दों पर तो कम से कम बात हो पाएगी।
-प्रीतम सिंह, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष

सल्ट के दिवंगत विधायक सुरेंद्र सिंह जीना के मामले में स्थानिक आयुक्त की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। खुद सत्ता पक्ष के विधायक कई मामलों को लेकर परेशान हैं। आखिरकार इन सब मामलों के लिए सत्र बढ़ाना सरकार की मजबूरी थी।
-करन माहरा, उपनेता कांग्रेस विधायक दल

प्रश्नकाल में ये मिले जवान

कुंभ में निशुल्क बस सेवा चलाने का विचार नहीं
प्रदेश सरकार ने कहा कि कुंभ मेला के दौरान ऋषिकेश और हरिद्वार के तीर्थयात्रियों के लिए निशुल्क बस सेवा चलाने की कोई योजना विचाराधीन नहीं है। परिवहन मंत्री ने आतारांकित प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी। कांग्रेस विधायक काजी निजामुद्दीन ने पूछा था कि क्या सरकार कुंभ मेला 2021 में हरिद्वार शहर और ऋषिकेश शहर के बीच तीर्थयात्रियों के लिए मुफ्त बस सेवा शुरू करने पर विचार कर रही है।

देहरादून में बनेगा संस्कृति ग्राम, खोजी जा रही है जमीन
प्रदेश सरकार राजधानी देहरादून में संस्कृति ग्राम की स्थापना करेगी। इसके लिए देहरादून सदर तहसील के अंतर्गत तिमलीमान सिंह में 3.354 हैक्टेयर भूमि तलाशने की प्रक्रिया चल रही है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इसकी घोषणा की थी। यह जानकारी आतारांकित प्रश्न के उत्तर में संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने दी। उन्होंने कहा कि टिहरी के चंबा में साबली ग्राम को संस्कृति ग्राम घोषित करने का कोई प्रस्ताव नहीं है। उन्होंने बताया कि पौराणिक संस्कृत को संरक्षित करने के लिए संस्कृति विभाग के स्तर पर कई योजनाएं संचालित हो रही हैं। इनमें लोक संस्कृति की विभिन्न विधाओं के लिए कार्यशालाएं करना, गुरु शिष्ट परंपरा के माध्यम से विलुप्त होती विधाओं का प्रशिक्षण, लोक कला के विभिन्न आयामों का अभिलेखीकरण, पारंपरिक मेलों का आयोजन प्रमुख है।

अनुरोध: केंद्रीय सूची में शामिल नहीं टिहरी का फिक्वाल व गंगाड़ी समुदाय
टिहरी जिले में फिक्वाल और गंगाड़ी समुदाय को लोगों को केंद्रीय अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की सूची में शामिल नहीं किया गया है। प्रदेश स कार ने कहा कि उसने यह मामला राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग और केंद्र सरकार से उठाया है। यह जानकारी धनोल्टी के विधायक प्रीतम सिंह पंवार के आतारांकित प्रश्न के उत्तर में प्रदेश सरकार ने दी। बता दें कि टिहरी जिले के धनोल्टी के कुछ भाग में गंगाड़ी और प्रतापनगर में फिक्वाल समुदाय को लोगों को राज्य सरकार ने ओबीसी घोषित किया गया है। लेकिन इस समुदाय के लोगों को केंद्रीय नौकरियों में ओबीसी आरक्षण का लाभ नहीं मिल रहा है। प्रदेश सरकार 17 सितंबर 2019 को केंद्र सरकार से इस संबंध में अनुरोध कर चुकी है।

निदेशालय नहीं साहसिक पर्यटन विंग बनेगा

प्रदेश सरकार राज्य में साहसिक पर्यटन के लिए अलग से निदेशालय स्थापित नहीं करेगी। इसके बजाय उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद के तहत साहसिक पर्यटन विंग का गठन होगा। यह जानकारी पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने सदन में दी। विधायक धन सिंह नेगी के प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि साहसिक पर्यटन विंग के लिए कर्मचारियों के ढांचे का निर्धारण कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि अभी तक औली में नेशनल स्कीइंग एवं स्नो बोर्ड चैंपियनशिप, भीतमताल में लेक कार्निवाल, ट्रैक ऑफद इयर, हिमालय माउंटेन बा इकिंग, चैलेंज, पैराग्लाइडिंग एक्यूरेसी प्रतियोगिता, पिथौरागढ़ जौलजीबी में राफ्टिंग, प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। स्थानीय युवाओं को साहसिक पर्यटन का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।

ग्राम पंचायत व नगर निकाय कराएंगे मंदिरों का जीर्णोद्धार
पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने प्रदेश सरकार के आदेशों का हवाला देते हुए कहा कि मंदिरों का जीर्णोद्धार का कार्य संबंधित ग्राम पंचायतों व नगर निकाय अपने संसाधनों से कराएंगे। विधायक निधि से अतिरिक्त धनराशि की व्यवस्था भी कराई जा सकता है। यह जवाब उन्होंने कांग्रेस विधायक ममता राकेश के प्रश्न के उत्तर में दिया। ममता राकेश ने पूछा था कि उनके चुनाव क्षेत्र रविदास मंदिर, महर्षि वाल्मिकी मंदिर, शिव मंदिर जीर्ण शीर्ण अवस्था में हैं। क्या सरकार उनका जीर्णोद्धार कराएगी?

टिहरी बांध विस्थापितों की नकद धनराशि का मामला केंद्र में अटका
टिहरी बांध विस्थापितों की नकद धनराशि का मामला केंद्र सरकार में अटका है। सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि यह प्रस्ताव राज्य सरकार ने केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय को भेज दिया था।  मंत्रालय की मंजूरी के बाद ही विस्थापितों को नकद प्रतिकर का भुगतान हो सकेगा। आतारांकित प्रश्न के उत्तर में महाराज ने बताया कि राज्य में परियोजना के हिसाब से अलग अलग पुनर्वास नीति है। टिहरी बांध परियोजना के प्रभावित परिवारों के विस्थापन पुनर्वास नीति 1998 एवं  संपार्शिविक क्षति नीति 2013 के तहत है।

तीन साल में रोडवेज बसों के लिए खुले 91 रूट
देहरादून। प्रदेश सरकार ने पिछले तीन साल में उत्तराखंड परविहन निगम की बसों के लिए 91 नए मार्ग खोले। परिवहन मंत्री यशपाल आर्य ने आतारांकित प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 2016-17 से 2018-19 तक 91 नए रूटों पर रोडवेज बसों का संचालन शुरू किया गया। उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों के लिए देहरादून से 17, हरिद्वार से चार और हल्द्वानी पांच नए रूट पर बसे सेवाएं संचालित की गईं।

मंगलौर बस अड़्डे का नहीं होगा पुनर्निर्माण

हरिद्वार के मंगलौर बस अड्ड़े का पुनर्निर्माण नहीं होगा। बस अड्डे का कुछ भाग राष्ट्रीय राजमार्ग के चौड़ीकरण में प्रयोग किया जा चुका है। परिवहन मंत्री का कहना है कि क्षेत्रफल कम होने के कारण वर्तमान मानकों के अनुसार बस अड्डे का पुन: निर्माण कराया जाना संभव नहीं है। उन्होंने यह जवाब मंगलौर विधायक काजी निजामुद्दीन के आतारांकित प्रश्न के लिखित उत्तर में दिया। 

प्राइवेट स्कूल बसों में बच्चों के बीमा का प्रावधान नहीं
निजी स्कूलों की बसों में यात्रा करने वाले स्कूली बच्चों का किसी भी प्रकार का बीमा नहीं कराया जाता। ऐसा कोई प्रस्ताव भी सरकार के पास विचाराधीन नहीं है। परिवहन मंत्री यशपाल आर्य ने सदन में यह जानकारी दी। आतारांकित प्रश्न के उत्तर में उन्होंने बताया कि मोटरयान अधिनियम 1988 के तहत स्कूलों के वाहनों के सत्यापन की व्यवस्था नहीं दी गई है। नियमों में स्कूल बसों के ठीक होने का प्रमाण पत्र, वाहन के प्रपत्रों की जांच और तकनीकी निरीक्षण का ही प्रावधान है। इसके तहत ही वाहनों का निरीक्षन्ण किया जाता है। उन्होंने कहा कि निजी स्कूलों की वाहनों के बीमा कराए जाने की व्यवस्था है। बच्चों के बीमा कराया जाना परिवहन विभाग के कार्यों से संबंधित नहीं है। न ही ऐसा कोई प्रस्ताव सरकार के पास विचाराधीन है।

रानीखेत में एआरटीओ कार्यालय खोलने को परिसर की तलाश
परिवहन मंत्री ने कहा कि रानीखेत में एआरटीओ कार्यालय खोलने के लिए परिसर की तलाश की जा रही है। इसके लिए कर्मचारियों की तैनाती कर दी गई है। वर्तमान में आरटीओ कार्यालय अल्मोड़ा से रानीखेत कार्यालय का संचालन किया जा रहा है। परिवहन मंत्री यह जानकारी सदन में प्रश्नकाल के दौरान दी।

यात्री नहीं मिले तो बंद हुई रोडवेज बस सेवा
बसों की कमी और यात्री न मिलने के कारण पहाड़ के कई मार्गों पर परिवहन निगम की बसों का संचालन बंद कर दिया गया। परिवहन मंत्री ने कहा कि यात्री नई बसें प्राप्त होने और यात्रियों की उपलब्धता के बाद ही इन रूटों पर बसों का संचालन हो सकेगा। उन्होंने यह जानकारी सदन में प्रश्नकाल के दौरान दी। लॉकडाउन से पहले देहरादून जाखणीधार और देहरादून-कांडीखाल रोडवेज बस सेवा बंद कर दी गई थी। देहरादून से वाया सुवाखोली-भवान-नगुण- उत्तरकाशी भटवाड़ी रैथल तक रोडवेज की बस जाती थी। इस मार्ग पर भी बस सेवा बंद हो गई है। 

हरिद्वार में एक भी पात्र को नहीं मिला पुत्री विवाह अनुदान

हरिद्वार जिले में इस वित्तीय वर्ष के दौरान अभी तक अनुसूचित जाति एक भी पात्र व्यक्ति को पुत्री के विवाह के लिए अनुदान नहीं मिला है। 2020-21 में जिले में 270 लोगों ने पुत्री के विवाह के  लिए आवेदन किया है। यह जानकारी परिवहन मंत्री ने आतारांकित प्रश्न के उत्तर में सदन पटल पर रखी। उन्होंने बताया कि पुत्री के विवाह के लिए 50 हजार रुपये अनुदान का प्रावधान है। 2017-18 में हरिद्वार में 783 में 760 को, 2018-19 में 858 में से सभी को, 2019-20 में 976 में से 482 को पात्र व्यक्तियों को यह अनुदान दिया गया था। निराश्रित विधवा की पुत्री की शादी के लिए 2020-21 में 30 में से अभी तक एक भी पात्र व्यक्ति को अनुदान नहीं दिया गया है। वित्तीय वर्ष की समाप्ति के बाद लंबित आवेदन स्वत: निरस्त हो जाते हैं।

जलागम योजनाओं पर अब तक 33.57 करोड़ खर्च
प्रदेश के 84 विकासखंडों में जलागम विकास की योजनाएं संचालित हैं। केंद्र पोषित समेकित जलागम प्रबंध कार्यक्रम के तहत 2012-2021 तक 71.62 करोड़  योजना संचालित है। इस योजना के तहत अब तक 33.57 करोड़ खर्च हो चुके हैं।  इसके अलावा राज्य गठन से अब तक विश्व बैंक, उत्तराखंड विकेंद्रीकृत जलागम विकास व अन्य  की 220 करोड़ की योजनाओं पर काम हो चुका है। यह जानकारी जलागम मंत्री सतपाल महाराज ने सदन को लिखित जवाब में दी।

भूमि के चक्कर में लटका जसपुर बस स्टेशन
जसपुर में बस स्टेशन का निर्माण भूमि के चक्कर में लटक गया है। 2011 में परिवहन विभाग को 0.563 हैक्टेयर भूमि पट्टी मंशा में परिवहन विभाग को निशुल्क हस्तांतरित की गई थी लेकिन न्यायिक वाद के चलते भूमि परिवहन विभाग के नाम नहीं हो पाई। इसके बाद नगर पालिकाकी सीमा में 0.178 हैक्टेयर भूमि चिन्हित हुई। अपर जिलाधिकारी ने सर्किल रेट के आधार पर इस भूमि की 7.83 लाख रुपये लागत तय की। परिवहन निगम ने भूमि के मूल्य के भुगतान में असमर्थता जताई और सरकार से निशुल्क भूमि देने का अनुरोध किया। इस बीच इस भूमि को लेकर भी अदालत में वाद दायर हो गया।  जिससे बस स्टेशन का निर्माण लटक गया। आतारांकित प्रश्न के उत्तर में परिवहन मंत्री ने सदन को यह जानकारी दी।

अब तक 2317 लोक कलाकारों को दी आर्थिक सहायता

कोविड महामारी से लॉकडाउन के कारण आर्थिक संकट को देखते हुए सरकार की ओर से 6675 पंजीकृत लोक कलाकारों व ढोल वादकों को एक बार में दो हजार रुपये की सहायता राशि दी जाएगी। अब तक 2317 लोक कलाकारों को जिलाधिकारियों के माध्यम से आर्थिक सहायता दी गई है। विधायक प्रीतम सिंह पंवार ने प्रश्न काल के दौरान सदन में कोविड महामारी के कारण लोक कलाकारों को आर्थिक सहायता देने का प्रश्न सदन में उठाया।

इसके जवाब में संस्कृति मंत्री ने सदन को जानकारी दी कि लॉकडाउन के कारण प्रदेश के लोक कलाकारों को आर्थिक रूप से नुकसान हुआ है। सरकार ने मुख्यमंत्री राहत कोष से पंजीकृत कलाकारों व ढोल वादकों को एक बार में एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने का निर्णय लिया। 11 नवंबर 2020 को पर्यटन विभाग ने पंजीकृत कलाकारों को आर्थिक सहायता एक हजार से बढ़ावा दो हजार करने की स्वीकृति प्रदान की है। अब तक प्रदेश के 2317 लोक कलाकारों को सहायता राशि दी जा चुकी है। अन्य कलाकारों को आर्थिक सहायता देने की प्रक्रिया जारी है।

दैवीय आपदा से प्रदेश में बंद पड़ी हैं 392 सिंचाई नहरें

विधानसभा सत्र के दूसरे दिन प्रश्न काल के दौरान सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज ने सदन को अवगत कराया कि प्रदेश में नहरों की संख्या 3005 है। इसमें 2454 नहरें सुचारू रूप से चल रही है। दैवीय आपदा बाढ़, भूस्खलन के कारण क्षतिग्रस्त होने से 392 नहरें बंद पड़ी है। जबकि स्रोत में पानी की कमी और अत्यधिक क्षतिग्रस्त होने से 159 नहरों को दोबारा से चलाया नहीं जा सकता है। 

मानसिक रूप से दिव्यांगों को मिले प्रति माह 10 हजार सहायता राशि
कांग्रेस विधायक ममता राकेश ने मानसिक रूप से दिव्यांगों को प्रति माह 10 हजार रुपये की सहायता राशि देने की मांग की है। सत्र के दूसरे दिन विपक्ष के विधायक ममता राकेश के सवाल के जवाब में समाज कल्याण मंत्री यशपाल आर्य ने कहा कि दिव्यांग भरण पोषण अनुदान योजना के तहत 0 से 18 वर्ष की आयु वर्ग के दिव्यांगों बच्चों को सरकार की ओर से 700 रुपये प्रति माह भत्ता दिया जाता है। यह राशि दिव्यांग बच्चे के माता-पिता को दी जाती है। ममता राकेश का कहना है कि दिव्यांग बच्चे पूरी तरह से माता-पिता पर आश्रित होते हैं। माता-पिता की मृत्यु के बाद दिव्यांग बच्चे असहाय हो जाते हैं। सदन के माध्यम से उन्होंने मानसिक रूप से दिव्यांग बच्चों को प्रति माह 10 हजार रुपये की सहायता राशि देने की मांग की है। 

जमरानी बांध के विस्थापन के लिए बनेगी पुनर्वासन नीति
विधायक राम सिंह कैड़ा के सवाल के जवाब में सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि जमरानी बांध के डूब क्षेत्र में आने वाले लोगों के विस्थापन के लिए पुनर्वासन एवं पुनर्व्यवस्थापन नीति बनाई जाएगी। महाराज ने कहा कि प्रस्तावित जमरानी बांध बहुद्देशीय परियोजना का एसआईए का कार्य पूर्ण हो चुका है। सरकार की ओर से भूमि अर्जन, पुनर्वासन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता अधिकारी अधिनियम के तहत सरकार नीति बनाएगी। जिसके आधार पर ही विस्थापितों को पुनर्वास किया जाएगा।

ढेला व फीका नदी में बाढ़ सुरक्षा को 88.56 करोड़ की योजना तैयार
कांग्रेस विधायक आदेश सिंह चौहान की ओर उठाए गए प्रश्न के जवाब में सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज ने अवगत कराया कि ऊधमसिंह नगर जिले के अंतर्गत ढेला व फीका नदी से रामनगर, काशीपुर व जसपुर में बाढ़ सुरक्षा और भूमि कटाव रोकने के लिए 88.56 करोड़ की योजना बनाई है। इसे स्वीकृति के लिए गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग को स्वीकृति के लिए भेजा गया है। आयोग की ओर से वर्तमान आवश्यकता को देखते हुए योजना में संशोधित करने का सुझाव दिया है।

बेरोजगारी, किसान समस्या के मुद्दे पर घेरा सरकार को
शून्यकाल में विपक्ष ने सरकार को किसानों की समस्याओं और बेेरोजगारी के मुद्दे पर घेरा। सत्ता पक्ष ने विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज किया। सरकार ने कहा कि यह पहली बार है कि गन्ना किसानों का शत प्रतिशत भुगतान कर दिया गया है। बेरोजगारी के मुद्दे पर भी विपक्ष ने सरकार को घेरा। 

इन सब मामलों का जवाब सरकार की ओर से संसदीय कार्यमंत्री मदन कौशिक ने दिया। कौशिक ने कहा कि कांग्रेस ने सदन में अपनी गलती स्वीकार की। सवाल उठाने वाले कांग्रेस विधायक काजी निजामुद्दीन ने स्वीकार किया कि उन्हें मीडिया से जानकारी मिली लेकिन सरकार ने गन्ना किसानों का शत प्रतिशत भुगतान कर दिया है। 

संसदीय कार्यमंत्री ने बेरोजगारी के मुद्दे पर भी कांग्रेस को निशाने पर लिया और कहा कि इस मामले में पूर्ववर्ती सरकार से बेहतर काम वर्तमान प्रदेश सरकार ने किया है। कांग्रेस तीन साल के कार्यकाल में 4000 को ही रोजगार दे पाई। वर्तमान सरकार ने तीन साल के कार्यकाल में ही 16000 को प्रत्यक्ष रोजगार दिया। एमएसएमई के तहत 84 हजार को रोजगार दिया गया।
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